Milk Safety and Consumer Awareness : दूध हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है, लेकिन अगर यही दूध मिलावटी हो तो यह सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. हाल ही में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे(Tukaram Mundhe FDA Statement) ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि कुछ गिरोह बेहद कम लागत में कथित सिंथेटिक दूध तैयार कर उसे असली दूध की तरह बाजार में बेच रहे हैं. उनके अनुसार, इस दूध को बनाने में स्किम्ड मिल्क पाउडर के साथ कॉस्टिक सोडा, इमल्सीफायर, केमिकल और यहां तक कि शैंपू जैसी चीजों का भी इस्तेमाल किया जाता है. जानिए क्या है पूरा मामला.

महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि जांच के दौरान अधिकारियों को ऐसे गिरोहों की जानकारी मिली, जो कथित तौर पर बेहद कम लागत में सिंथेटिक दूध तैयार कर रहे थे. उनके अनुसार, इस दूध को बनाने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर के साथ इमल्सीफायर, कॉस्टिक सोडा, कुछ केमिकल और यहां तक कि शैंपू जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. उनका कहना है कि यह मिश्रण देखने में असली दूध जैसा लगता है, जिससे आम लोगों के लिए इसकी पहचान करना आसान नहीं होता.

15 रुपये की लागत, 50 रुपये में बिक्री
मुंढे के मुताबिक, गाय के दूध जैसा दिखने वाला कथित सिंथेटिक दूध लगभग 15 रुपये प्रति लीटर में तैयार हो सकता है, जबकि भैंस के दूध जैसा उत्पाद बनाने की लागत करीब 30 रुपये प्रति लीटर बताई गई. दूसरी ओर, बाजार में असली दूध 40 से 50 रुपये या उससे अधिक कीमत पर बिकता है. ऐसे में अगर कोई असली दूध में इस तरह का नकली मिश्रण मिलाए, तो उसे बड़ा मुनाफा हो सकता है. हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि यह पूरी तरह गैरकानूनी है.

सप्लाई चेन के कई चरणों में हो सकती है मिलावट
FDA कमिश्नर ने यह भी दावा किया कि दूध में मिलावट किसी एक जगह नहीं होती. जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले कि फार्म, दूध संग्रह केंद्र (Milk Collection Centre), चिलिंग सेंटर और डेयरी तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन के अलग-अलग चरणों में भी मिलावट की जा सकती है. यही वजह है कि दोषियों तक पहुंचना और मिलावट की असली जगह का पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है.

महाराष्ट्र में तेज हुई कार्रवाई
मुंढे के अनुसार, महाराष्ट्र में मिलावट के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 मई को पद संभालने के बाद से विभाग ने 1,131 से ज्यादा निरीक्षण किए हैं. इस दौरान करीब 49.57 करोड़ रुपये के खाद्य पदार्थ जब्त किए गए और लगभग 1.6 लाख लीटर कथित मिलावटी दूध भी पकड़ा गया. विभाग रोजाना 20 से ज्यादा जगहों पर जांच कर रहा है ताकि लोगों तक सुरक्षित खाद्य पदार्थ पहुंच सकें.

उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
ध्यान देने वाली बात यह है कि शैंपू और कॉस्टिक सोडा से सिंथेटिक दूध तैयार किए जाने का दावा महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने एक पॉडकास्ट के दौरान किया है. विभाग मिलावट के मामलों की जांच और कार्रवाई कर रहा है. उपभोक्ताओं के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि वे भरोसेमंद डेयरी या विश्वसनीय ब्रांड का दूध खरीदें और दूध की गुणवत्ता पर संदेह होने पर तुरंत स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें.

सिंथेटिक दूध की पहचान करने के आसान तरीके-
सिंथेटिक या मिलावटी दूध की पहचान केवल देखकर करना आसान नहीं होता, क्योंकि कई बार इसका रंग और बनावट असली दूध जैसी ही दिखाई देती है. हालांकि, कुछ आसान संकेत आपको सतर्क जरूर कर सकते हैं.

सबसे पहले दूध की गंध पर ध्यान दें. अगर उसमें साबुन, डिटर्जेंट या किसी केमिकल जैसी तेज और अजीब महक महसूस हो, तो उसे पीने से बचें. स्वाद भी एक बड़ा संकेत हो सकता है. यदि दूध का स्वाद सामान्य से अलग, कड़वा या साबुन जैसा लगे, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है.

दूध को उबालते समय भी उस पर नजर रखें. शुद्ध दूध उबलने के बाद सामान्य रूप से मलाई बनाता है, जबकि संदिग्ध दूध में असामान्य झाग, अलग तरह की परत या अजीब अवशेष दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, इन संकेतों के आधार पर किसी दूध को निश्चित रूप से सिंथेटिक नहीं कहा जा सकता.

यदि आपको दूध की गुणवत्ता पर बार-बार संदेह हो, तो FSSAI से मान्यता प्राप्त मिलावट जांच किट का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये किट यूरिया, डिटर्जेंट और कुछ अन्य प्रकार की मिलावट की शुरुआती जांच में मदद करती हैं.

विशेषज्ञों की सलाह है कि हमेशा भरोसेमंद डेयरी या विश्वसनीय विक्रेता से ही दूध खरीदें. अगर किसी दूध के मिलावटी होने का शक हो, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें. ध्यान रखें कि किसी भी दूध के सिंथेटिक या मिलावटी होने की अंतिम पुष्टि केवल अधिकृत लैब जांच से ही हो सकती है.



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