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Pali Dalgona Coffee: पाली में नरेश भाई की ‘देशी डालगोना कॉफी’ इन दिनों लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. कॉफी का अनोखा नाम, देसी अंदाज और ऊपर बनी मलाईदार झाग इसे सामान्य कॉफी से अलग बनाती है. स्वाद के साथ इसकी प्रस्तुति भी लोगों को खूब पसंद आ रही है. स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास से आने वाले लोग भी इस खास कॉफी का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं. सोशल मीडिया और लोगों की चर्चा के चलते इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. नरेश भाई का यह देसी प्रयोग अब पाली की खास फूड स्टोरी बन चुका है.
इतना ही नहीं,यह कॉफी जहां मिलती है और प्रसिद्ध है एस एरिया का नाम है बादशाहो का झंडा. यह नाम जितना अनोखा है, लोगों में इसको लेकर उत्सुकता भी उतनी ही ज्यादा रहती है. न सिर्फ पाली के स्थानीय लोग, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटक भी इस जायके का लुत्फ उठाए बिना यहाँ से नहीं जाते. आखिर क्या है इस नाम के पीछे की कहानी और कैसे तैयार होती है यह मलाईदार झागदार कॉफी, देखिए हमारी इस खास रिपोर्ट में.
राजस्थान का पाली शहर अपने समृद्ध इतिहास, परंपराओं और लजीज खान-पान के लिए जाना जाता है. लेकिन इन दिनों पाली के बाजार में एक 50 साल पुरानी दुकान पर मिलने वाली ‘देशी डलगोना कॉफी’ की जबरदस्त धूम है. यूँ तो डलगोना कॉफी आधुनिक कैफे का हिस्सा मानी जाती है, लेकिन नरेश भाई के हाथों का यह देशी तड़का पिछले पाँच दशकों की विरासत को संभाले हुए है. यहाँ की कॉफी का स्वाद इतना लाजवाब है कि केवल स्थानीय निवासी ही नहीं, बल्कि पाली आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक भी इस दुकान पर खिंचे चले आते हैं.
इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत और आकर्षण का केंद्र है इसका अनोखा नाम—’बादशाहों का झंडा’. यह नाम सुनते ही हर किसी के मन में उत्सुकता जग जाती है कि आखिर एक कॉफी का नाम ऐसा क्यों रखा गया. यही अनोखापन और शाही स्वाद लोगों को अपनी ओर खींच लाता है. लोग दूर-दूर से यहाँ पहुँचते हैं और चुस्कियाँ लेते हुए कहते हैं कि स्वाद वाकई में ‘बादशाहों’ वाला ही है.
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अब बात करते हैं इस मशहूर देशी डलगोना कॉफी को बनाने के अनोखे अंदाज़ की. नरेश भाई इसे पूरी तरह पारंपरिक और देशी तरीके से तैयार करते हैं. तैयारी का तरीका: एक बड़े कटोरे में 2 बड़े चम्मच बेहतरीन इंस्टेंट कॉफी, 2 बड़े चम्मच चीनी और 2 बड़े चम्मच एकदम गर्म पानी मिलाया जाता है.
इसके बाद शुरू होता है असली हुनर. इसे एक ही दिशा में लगातार 8 से 10 मिनट तक हाथ से फेंटा जाता है. फेंटते-फेंटते जब इसका रंग हल्का भूरा हो जाता है और टेक्सचर बिल्कुल गाढ़ी मलाईदार क्रीम की तरह बन जाता है, तब जाकर तैयार होता है इसका परफेक्ट झाग. परोसने का अंदाज़: एक बड़े गिलास में ठंडा या गर्म दूध डाला जाता है (जरूरत के हिसाब से बर्फ के टुकड़े भी मिलाए जाते हैं). इसके बाद तैयार मलाईदार कॉफी के झाग को दूध के ऊपर सजाकर ग्राहकों को परोसा जाता है.