पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया है। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार द्वारा राज्य में इमरजेंसी के दौरान डेमोक्रेसी की रक्षा के लिए प्रोटेस्ट करने वाले 325 लोगों को 10,000 रुपये महीने की पेंशन देने का फैसला किया गया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, यह पेंशन ‘वेस्ट बंगाल लोकतंत्र सेनानी ऑनर’ स्कीम के तहत दिए जाने का फैसला किया गया है।
क्या है सरकार का फैसला?
पश्चिम बंगाल सरकार इमरजेंसी के दौरान डेमोक्रेसी की रक्षा के लिए प्रोटेस्ट करने वाले 325 लोगों को 10,000 रुपये महीने की पेंशन देगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह ऐलान रविवार को नबान्न में आयोजित एक फंक्शन में किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पेंशन ‘वेस्ट बंगाल लोकतंत्र सेनानी ऑनर’ स्कीम के तहत दी जाएगी। आपको बता दें कि सीएम बनने के बाद से शुभेंदु अधिकारी एक के बाद एक कई बड़े फैसले ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड की नए सिरे से जांच कराने का ऐलान किया है।
325 लोगों की पहचान हुई
सामने आई जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने पहले ही 325 ऐसे लोगों की पहचान कर ली है, जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया था और जेल गए थे। उन्हें ‘वेस्ट बंगाल लोकतंत्र सेनानी ऑनर’ के तहत लाने और उन्हें महीने की पेंशन देने का फैसला किया गया है। सीएम शुभेंदु ने यह भी कहा कि नई सरकार देश के लिए कुर्बानी देने वालों के आदर्शों को ध्यान में रखकर काम करेगी। सरकार ने विधानसभा के बजट सेशन में पेंशन के बारे में पहली बार जानकारी दी थी।
इमरजेंसी के बारे में जानिए
आपको बता दें कि 25 जून 1975 को भारत में इमरजेंसी लगाने का ऐलान किया गया था। तत्कालीन इंदिरा गांधी की सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू किया गया था। ये आपातकाल 21 मार्च 1977 तक लगभग 21 महीने तक चला। इस दौरान सरकार का विरोध करने को लेकर दमनकारी कानून के तहत एक लाख से भी ज्यादा लोग जेल भेज दिए गए थे। इस दौरान लाखों लोगों की जबरन नसबंदी भी करा दी गई थी।
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