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Karauli Food News: बाबूलाल के ठेले पर केवल समोसा ही नहीं मिलता. यहां दाल के मंगोड़े, दही भल्ले और नमकपारे समेत नाश्ते की चीजें भी हरी और लाल चटनी के साथ परोसी जाती हैं. इन चीजों को भी ग्राहक काफी पसंद करते हैं. खासतौर से लोग इसके समोसे को ज्यादा पसंद करते है. यह करौली शहर का नंबर वन और सबसे सस्ता समोसा है.
समोसे के स्वाद के लिए करौली शहर में कई ठिकाने हैं, लेकिन भुड़ारे बाजार में ठेले पर मिलने वाला ₹10 का समोसा पिछले 15 सालों से लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. महंगाई के इस दौर में भी यहां गरम कड़ाही से उतरता हुआ समोसा महज 10 रुपये में हरी और लाल चटपटी चटनी के साथ मिलता है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.
इस समोसे की एक और खास बात यह है कि इसका स्वाद दिनभर उपलब्ध नहीं रहता. इसका स्वाद परोसने वाले बाबूलाल राठौर का ठेला रोजाना करीब चार से पांच घंटे ही लगता है. लिहाजा जिस समय समोसा मिलता है, उस दौरान ठेले पर ग्राहकों की भीड़ नजर आती है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक, हर उम्र के लोग इस समोसे के स्वाद के मुरीद हैं.
भुड़ारे बाजार में यह ठेला करीब 15 सालों से लोगों को समोसे का स्वाद चखा रहा है. इतने वर्षों में समोसे की कीमत भले ही बाजार में कई जगह बढ़ी हो, लेकिन यहां आज भी समोसा 10 रुपये में ही मिलता है. कम कीमत और स्वाद के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के गांवों से आने वाले लोग भी यहां समोसा खाने पहुंचते हैं.
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समोसा खाने पहुंचे नरेश जाटव बताते हैं कि करौली में उन्हें इस ठेले का समोसा सबसे ज्यादा पसंद है. उनके मुताबिक, स्वाद के साथ इसकी कीमत भी काफी किफायती है और बच्चों को भी यह बहुत पसंद आता है. वह करीब पांच से सात साल से यहां का समोसा खा रहे हैं और उनके अनुसार करौली में इस तरह का स्वाद कहीं और आसानी से नहीं मिलता.
15 वर्षों से इस समोसे बना रहे बाबूलाल राठौर बताते हैं कि समोसे तैयार करने में रिफाइंड और सोयाबीन तेल का इस्तेमाल किया जाता है. उनके अनुसार, समोसे के स्वाद में सबसे अहम भूमिका उसके मसाले और आलू की होती है. इसलिए वे मसाले में अच्छी गुणवत्ता वाले आलू का इस्तेमाल करते हैं और पिसे हुए मसालों से भरावन तैयार करते हैं.
बाबूलाल का कहना है कि उनके समोसे की सबसे बड़ी खासियत 10 रुपये की कीमत और अच्छी गुणवत्ता है. वे समोसे को दिनभर नहीं बेचते, बल्कि करीब चार से पांच घंटे ही ठेला लगाते हैं. इसी वजह से इस दौरान ग्राहकों की अच्छी भीड़ रहती है.
करौली के भुड़ारे बाजार में लगा यह छोटा-सा ठेला अब सिर्फ समोसा बेचने की जगह नहीं रह गया है. करीब एक दशक से ज्यादा समय से यहां आने वाले ग्राहकों के लिए यह स्वाद और पुरानी यादों का हिस्सा बन चुका है. महंगाई के दौर में भी 10 रुपये में गरम-गरम समोसा और चटपटी चटनी मिलने की वजह से इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है.