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Teej Special Food: तीज के त्योहार पर राजस्थान में एक खास पारंपरिक सत्तू बनाने की अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. यह सत्तू साल में केवल तीज के अवसर पर तैयार किया जाता है. इसकी खासियत दाल को मिट्टी में सेंकने की पारंपरिक विधि है. इसके बाद दाल को पीसकर देसी घी और शक्कर के साथ मिलाया जाता है. अनोखे स्वाद वाला यह व्यंजन आज भी कई परिवारों में पुरानी परंपरा और संस्कृति को जीवित रखे हुए है.
जालौर: तीज का त्योहार राजस्थान में सिर्फ पूजा-पाठ और श्रृंगार का पर्व नहीं, बल्कि इससे जुड़ी पारंपरिक रसोई और खास पकवानों की भी अपनी अलग पहचान है. जालोर में तीज के मौके पर बनने वाला सत्तू ऐसी ही एक पारंपरिक रेसिपी है, जो साल में सिर्फ तीज के दिन ही तैयार की जाती है. इसकी खासियत इसका स्वाद ही नहीं, बल्कि इसे बनाने का देसी तरीका भी है. यहां सत्तू के लिए दाल को मिट्टी में सेंककर तैयार किया जाता है, जिसके बाद देसी शक्कर, घी और इलायची मिलाकर इसे खास स्वाद दिया जाता है.
जालोर में तीज के दिन घरों में सत्तू तैयार करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. इस खास सत्तू को बनाने के लिए गेहूं या चने की दाल का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले दाल को मिट्टी में अच्छी तरह सेंका जाता है. मिट्टी में सिकने से दाल में एक अलग तरह की खुशबू और देसी स्वाद आता है, जो साधारण तरीके से भुनी दाल से अलग होता है.
सत्तू का पारंपरिक आकार दिया जाता
दाल के अच्छी तरह सिक जाने के बाद इसे साफ किया जाता है. पहले इसे छलनी से अच्छी तरह छाना जाता है और फिर बारीक करने के लिए सूती कपड़े से भी छानने की पारंपरिक तरीका अपनाया जाता है. इसके बाद दाल को पीसकर सत्तू का आटा तैयार किया जाता है. अब इस आटे में मिलाई जाती है देसी शक्कर. इसके बाद इसमें गरम देसी घी और इलायची पाउडर डाला जाता है. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिक्स किया जाता है, ताकि घी, शक्कर और इलायची सत्तू के आटे में अच्छी तरह मिल जाए. इसके बाद हाथों की सहायता से इस मिश्रण को दबाकर और मिलाकर सत्तू का पारंपरिक आकार दिया जाता है.
तीज के दिन सत्तू बनाने की परंपरा
इस सत्तू को बनाने वाली गृहणी संतोष देवी ने लोकल18 को बताया कि हमारे यहां तीज के दिन सत्तू बनाने की परंपरा है. इसे साल में इसी दिन बनाया जाता है. पहले दाल को मिट्टी में सेंकते हैं, फिर उसे अच्छी तरह छानकर पीसते हैं. इसके बाद इसमें देसी शक्कर, गरम देसी घी और इलायची पाउडर मिलाते हैं. सब चीजों को अच्छे से मिक्स करके हाथों से सत्तू का आकार देते हैं. इसका स्वाद मिट्टी में दाल सेंकने की वजह से अलग ही आता है. हमारे लिए तीज का सत्तू सिर्फ एक पकवान नहीं है, बल्कि हमारी पुरानी परंपरा का हिस्सा है.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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