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बालाघाट में 53 प्रतिशत जंगल है, जहां पर तरह-तरह के फल होते हैं. ऐसे में यहां पर चार के भी काफी पेड़ हैं, जिसे जामुनी फल चारपाक भी कहते हैं. गर्मी के दिनों के आते ही चार बीज खाने का शौक बालाघाट वासियों को होता है. ऐसे में जहां पर भी ये बीज नजर आते हैं, तो लोग उन्हें तोड़ने चले जाते हैं. 

बालाघाट. मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला अपने घने वनों के लिए प्रसिद्ध. ऐसे में यहां पर साल भर अलग-अलग वनोपज देखने को मिलते हैं. लेकिन वहीं वनोपज शहरों की ओर आते हैं, तो सभी के सभी लोग देखने लग जाते हैं. सभी के मुंह में पानी आता है और सभी के बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. ऐसे में लोग उन फलों और बीजों को देख आकर्षित हो जाते हैं. अब बालाघाट के जंगलों में चिरौंजी का जामुनी फल आता है, जिसे हम चार कहते हैं. गर्मियों की दिनों में यह फल दिखाई देता है. ऐसे में जानिए क्यों है ये चार बिजी क्यों है खास.

बालाघाट में 53 प्रतिशत भूभाग पर वन है, जहां पर तरह-तरह के फल है. ऐसे में यहां पर चार के भी काफी पेड़ हैं, जिसे जामुनी फल चारपाक भी कहलाता है. गर्मी के दिनों के आते ही चार बीज खाने का शौक बालाघाट वासियों को होता है. ऐसे में जहां पर भी ये बीज नजर आते हैं, तो लोग उन्हें तोड़ने चले जाते हैं.

शहरों में खूब दिख रहा ये फल
बालाघाट के चौक चौराहों पर इन दिनों चार के बीज खूब दिख रहे है. इन्हें आदिवासी अंचल से लोग लेकर आते हैं और बेहद सस्ते दामों बेच देते हैं. इसके लिए लोग भी काफी उत्साहित रहते हैं और जल्द ही इसे खरीद लेते हैं. देखते ही देखते सामग्री बिक जाती है और वह अपने जंगलों की ओर लौट जाते हैं. उकवा से आए शख्स ने बताया कि वह सुबह पांच बजे ही चार बीजी तोड़ने के लिए जंगल की ओर जाते हैं.

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Mohd Majid

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