नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी एक ऐसी खबर आई है जिसने टेक इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है. वैज्ञानिकों ने एआई की मदद से फोटोनिक माइक्रोचिप के तीन अहम हिस्सों को 500 गुना तक छोटा कर दिया है. यह डिजाइन इतना ज्यादा जटिल है कि इसे कोई आम इंसान कभी सोच भी नहीं सकता था. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक खास एल्गोरिदम ने यह बड़ा चमत्कार कर दिखाया है. इस अल्ट्रा कॉम्पैक्ट डिजाइन से चिप पर दूसरे काम करने के लिए काफी जगह बच जाएगी. फोटोनिक माइक्रोचिप डेटा को ट्रांसफर करने के लिए इलेक्ट्रॉन्स की जगह रोशनी का इस्तेमाल करते हैं. इससे डेटा ट्रांसफर स्पीड काफी तेज हो जाती है और एनर्जी भी बहुत कम खर्च होती है. इस खास चिप का इस्तेमाल आने वाले समय में क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई सेक्टर में बड़े बदलाव लाएगा. नीचे 5 सवाल और उनके जवाबों से समझें पूरी कहानी.
1. क्या होते हैं फोटोनिक माइक्रोचिप और यह कैसे हमारी दुनिया को बदलेंगे?
सामान्य माइक्रोचिप डेटा ट्रांसफर करने के लिए मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन फोटोनिक चिप पूरी तरह से रोशनी के छोटे कणों पर काम करते हैं. साइंस की भाषा में रोशनी के इन कणों को फोटोन कहा जाता है. इसी खास वजह से यह पुराने इलेक्ट्रॉनिक चिप के मुकाबले बहुत ज्यादा स्पीड से काम करते हैं. ये चिप रोशनी की स्पीड से भारी भरकम डेटा ट्रांसफर करने की ताकत रखते हैं. इन आधुनिक चिप्स में हाई बैंडविड्थ की सुविधा भी मिलती है. इसका सीधा मतलब है कि अलग-अलग वेवलेंथ एक साथ कई डेटा स्ट्रीम को ले जा सकती हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि ये चिप बहुत कम गर्मी पैदा करते हैं. जब गर्मी कम पैदा होती है तो पावर और एनर्जी की बचत भी काफी ज्यादा होती है. इसलिए इनका इस्तेमाल आज के समय में फाइबर ऑप्टिक कम्युनिकेशन सिस्टम में बहुत जरूरी हो गया है.
2. कहां होता है इन सुपरफास्ट फोटोनिक माइक्रोचिप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल?
आज के समय में बहुत तेज इंटरनेट और फास्ट डेटा प्रोसेसिंग हमारी सबसे बड़ी जरूरत बन गई है. यही वजह है कि एडवांस फोटोनिक चिप की डिमांड दुनिया भर के डेटा सेंटर्स में काफी ज्यादा बढ़ गई है. इसके अलावा ऑटोनॉमस व्हीकल्स यानी बिना ड्राइवर वाली कारों के लिडार सिस्टम में भी इनका बड़ा रोल है. क्वांटम कंप्यूटिंग भी भविष्य की एक बहुत बड़ी और अहम तकनीक है. इसमें भी फोटोनिक चिप का एक अहम योगदान रहने वाला है. इन चिप्स में पुराने मेटल वायर की जगह माइक्रोमीटर के साइज वाले पतले चैनल होते हैं. इन्हें साइंस की दुनिया में वेवगाइड्स कहा जाता है जो पूरे चिप पर रोशनी को सही रास्ता दिखाते हैं. इसके अंदर वेवलेंथ स्प्लिटर और खास तरह के मिरर भी लगे होते हैं. ये सभी पुर्जे इंसान के एक बाल से भी कई गुना छोटे होते हैं. इन्हें एआई ने इस कदर डिजाइन किया है कि कम जगह में ज्यादा और अच्छे पुर्जे फिट हो सकें.
3. एआई ने आखिर कैसे तैयार किया इंसानी सोच से भी 500 गुना छोटा डिजाइन?
वैज्ञानिकों ने इस नए डिजाइन को तैयार करने के लिए एक बेहद खास तकनीक का सहारा लिया है. इस रिसर्च को मशहूर ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ जर्नल में 28 मई को पब्लिश किया गया था. शोधकर्ताओं ने एआई एल्गोरिदम को सबसे पहले यह बताया कि वे रोशनी के साथ क्या करना चाहते हैं. उन्होंने नैनोस्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग की कुछ लिमिट्स भी एआई को अच्छी तरह सेट करके दी थीं. इसके ठीक बाद एआई ने रिवर्स तरीके से अपना काम करना शुरू कर दिया. उसने अलग-अलग डिजाइन बनाकर उनका टेस्ट किया और फिर उनमें लगातार सुधार किया. इस तरह से एआई ने एक ऐसा नैनोस्ट्रक्चर ढूंढ निकाला जो वैज्ञानिकों को चाहिए था. मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के जाने-माने रिसर्चर टोबी बी इस स्टडी के मुख्य लेखक हैं. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘इन्वर्स डिजाइन ने हमें वो हासिल करने में बहुत मदद की जो कोई इंसान कभी ड्रा नहीं कर सकता था.’
2. कहां होता है इन सुपरफास्ट फोटोनिक माइक्रोचिप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल?
आज के समय में बहुत तेज इंटरनेट और फास्ट डेटा प्रोसेसिंग हमारी सबसे बड़ी जरूरत बन गई है. यही वजह है कि एडवांस फोटोनिक चिप की डिमांड दुनिया भर के डेटा सेंटर्स में काफी ज्यादा बढ़ गई है. इसके अलावा ऑटोनॉमस व्हीकल्स यानी बिना ड्राइवर वाली कारों के लिडार सिस्टम में भी इनका बड़ा रोल है. क्वांटम कंप्यूटिंग भी भविष्य की एक बहुत बड़ी और अहम तकनीक है. इसमें भी फोटोनिक चिप का एक अहम योगदान रहने वाला है. इन चिप्स में पुराने मेटल वायर की जगह माइक्रोमीटर के साइज वाले पतले चैनल होते हैं. इन्हें साइंस की दुनिया में वेवगाइड्स कहा जाता है जो पूरे चिप पर रोशनी को सही रास्ता दिखाते हैं. इसके अंदर वेवलेंथ स्प्लिटर और खास तरह के मिरर भी लगे होते हैं. ये सभी पुर्जे इंसान के एक बाल से भी कई गुना छोटे होते हैं. इन्हें एआई ने इस कदर डिजाइन किया है कि कम जगह में ज्यादा और अच्छे पुर्जे फिट हो सकें.
3. एआई ने आखिर कैसे तैयार किया इंसानी सोच से भी 500 गुना छोटा डिजाइन?
वैज्ञानिकों ने इस नए डिजाइन को तैयार करने के लिए एक बेहद खास तकनीक का सहारा लिया है. इस रिसर्च को मशहूर ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ जर्नल में 28 मई को पब्लिश किया गया था. शोधकर्ताओं ने एआई एल्गोरिदम को सबसे पहले यह बताया कि वे रोशनी के साथ क्या करना चाहते हैं. उन्होंने नैनोस्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग की कुछ लिमिट्स भी एआई को अच्छी तरह सेट करके दी थीं. इसके ठीक बाद एआई ने रिवर्स तरीके से अपना काम करना शुरू कर दिया. उसने अलग-अलग डिजाइन बनाकर उनका टेस्ट किया और फिर उनमें लगातार सुधार किया. इस तरह से एआई ने एक ऐसा नैनोस्ट्रक्चर ढूंढ निकाला जो वैज्ञानिकों को चाहिए था. मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के जाने-माने रिसर्चर टोबी बी इस स्टडी के मुख्य लेखक हैं. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘इन्वर्स डिजाइन ने हमें वो हासिल करने में बहुत मदद की जो कोई इंसान कभी ड्रा नहीं कर सकता था.’
4. सिलिकॉन नाइट्राइड का इस्तेमाल करके वैज्ञानिकों ने कैसे बचाई रोशनी की एनर्जी?
आमतौर पर फोटोनिक चिप के छोटे पुर्जे हाथ से डिजाइन किए जाते हैं. इंजीनियर्स एक पुराने डिजाइन को बेस बनाते हैं और फिर उसमें कुछ जरूरी बदलाव करते हैं. यह तरीका बहुत धीमा होता है और इसमें ज्यादा नए डिवाइस ज्योमेट्री के प्रयोग नहीं हो पाते हैं. इस बार टीम ने कंपोनेंट्स को बेहतर बनाने के लिए मोटे सिलिकॉन नाइट्राइड का इस्तेमाल करने का फैसला किया. इसकी मोटाई लगभग 400 से 800 नैनोमीटर के बीच सेट की गई थी. यह आम सिलिकॉन के मुकाबले साइज में थोड़ा ज्यादा मोटा होता है. इसका फायदा यह हुआ कि वेवलेंथ कन्फाइनमेंट काफी अच्छा हो गया और रोशनी की बर्बादी कम हो गई. चिप में लगे यह छोटे मिरर आने वाली 98.5 प्रतिशत रोशनी को रिफ्लेक्ट कर देते हैं. इसके साथ ही वेवलेंथ स्प्लिटर का साइज सिर्फ एक सिंगल बैक्टीरिया के बराबर है. इतने छोटे साइज में यह चिप वाकई एक शानदार परफॉर्मेंस दे रहा है.
5. क्या रियल वर्ल्ड में इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार है यह नया एआई चिप?
वैज्ञानिकों ने अभी सिर्फ इन छोटे पुर्जों को अलग-अलग लेवल पर टेस्ट किया है. उन्होंने अभी तक इन सभी को मिलाकर एक पूरा इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल सर्किट नहीं बनाया है. टीम का अगला कदम एक पूरी तरह से फंक्शनल फोटोनिक चिप तैयार करना है. रिसर्चर का कहना है कि यह सफलता सिलिकॉन नाइट्राइड बेस्ड सिस्टम में क्रांति ला सकती है. पिछले कुछ सालों में सेमीकंडक्टर डिजाइन और फेब्रिकेशन में एआई का रोल काफी बढ़ गया है. एआई की मदद से डिजाइन बनाने का समय हफ्तों से घटकर सिर्फ कुछ घंटों में आ गया है. गूगल का अल्फाचिप भी इसी तरह का एक सफल उदाहरण है. इस मशीन लर्निंग मेथड ने भी ‘सुपरह्यूमन’ डिजाइन तैयार किए हैं जिनका इस्तेमाल गूगल अपने एआई चिप्स में कर रहा है. आने वाले भविष्य में एआई चिप मेकिंग प्रोसेस को काफी एडवांस बना देगा.
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