स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर निर्देशक राजकुमार संतोषी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। देश के विभाजन की कठिन और दर्दनाक पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म दर्शकों को इतिहास के एक बेहद संवेदनशील दौर में वापस ले जाती है। फिल्म के जरिए बॉलीवुड की हिट जोड़ी सनी देओल और प्रीति जिंटा लंबे समय बाद एक बार फिर पर्दे पर साथ वापसी कर रहे हैं, जिसे लेकर प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह बना हुआ था। एक मजबूत स्टारकास्ट, अनुभवी निर्देशक और भारत के इतिहास के एक संवेदनशील अध्याय से जुड़ी कहानी होने के कारण इस बात की काफी उत्सुकता थी कि फिल्म दर्शकों से कितना जुड़ पाएगी। फिल्म के रिलीज होते ही दर्शकों, फिल्म समीक्षकों और फिल्म इंडस्ट्री के सदस्यों से इसे त्वरित प्रतिक्रियाएं मिलने लगी हैं। शुरुआती रुझानों के अनुसार फिल्म की भावनात्मक गहराई और कलाकारों के सशक्त अभिनय की जमकर तारीफ की जा रही है। विशेष रूप से सनी देओल की स्क्रीन प्रेजेंस और प्रीति जिंटा की हिंदी सिनेमा में वापसी चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है।

X रिव्यू: दर्शकों और क्रिटिक्स की पहली प्रतिक्रियाएं

सोशल मीडिया मंच X पर ‘बंटवारा 1947’ को लेकर दर्शकों की बेहद सकारात्मक और भावुक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। दर्शकों का मानना है कि यह फिल्म विभाजन की त्रासदी के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को बहुत ही प्रभावी ढंग से उजागर करती है।

X यूजर्स के ट्वीट्स और रिव्यू:

एक यूजर ने फिल्म देखते हुए तुरंत लिखा, ‘शुरुआती 20 मिनट ही बेहद भावुक कर देने वाले हैं, मेकर्स ने कमाल कर दिया! #Batwara1947 #SunnyDeol’

एक अन्य X यूजर ने सनी देओल के किरदार की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘#Batwara घावों पर मरहम लगाने जैसा अहसास देती है। मुझे नहीं लगता कि सनी देओल ने अपने पूरे करियर में इससे अधिक महान और हीरोइक किरदार निभाया होगा।’

एक अन्य दर्शक ने अपने अनुभव को साझा करते हुए लिखा, ‘क्या ही शक्तिशाली और प्रभावकारी सिनेमाई अनुभव है!!’

एक और सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, ‘बंटवारा अपनी बड़ी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरती है। इसमें वह सब कुछ है जो एक क्लासिक में होना चाहिए: ड्रामा, इमोशन और एक्शन।’

X पर एक यूजर ने विस्तृत रिव्यू देते हुए इसे 5 में से 4 स्टार दिए और लिखा, ‘Batwara1947 – अभी देखी और यह रहा मेरा रिव्यू! एक लाइन में राय: सुपरहिट। संतोषी और सनी देओल की जोड़ी कमाल की है। उनका साथ मिलकर काम करना इमोशन, इंटेंसिटी और मास अपील का बेहतरीन मेल पेश करता है। सनी देओल जबरदस्त फॉर्म में हैं और अपनी दमदार मौजूदगी से पूरी स्क्रीन पर छा जाते हैं।’

इंटरवल तक की पहली राय

एक अन्य यूजर ने फिल्म के पहले हाफ की तारीफ में लिखा, ‘बंटवारा 1947 का पहला हाफ: यह स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के लिए एक बिल्कुल सटीक फिल्म है। फिल्म का पहला भाग बहुत ही मनोरंजक और बांधकर रखने वाला है। यह उन लोगों के दर्द को खूबसूरती से दिखाता है जिन्होंने विभाजन का दंश झेला था। फिल्म में सनी देओल की कास्टिंग सटीक है, उनकी डायलॉग डिलीवरी और एक्शन सीन आपको अंत तक बांधे रखते हैं। वहीं, प्रीति जिंटा और शबाना आजमी ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ पूरा न्याय किया है।’

रमेश तौरानी का रिएक्शन

जाने-माने फिल्म निर्माता रमेश तौरानी ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का रिव्यू साझा करते हुए लिखा, ‘बंटवारा 1947 एक बेहद संवेदनशील, मार्मिक और मानवता का सम्मान करने वाली फिल्म है, जिसे पहले दिन, पहला शो ही देखा जाना चाहिए। यह हमारे इतिहास के सबसे काले अध्यायों के दौरान भी इंसानियत के जज्बे, सहनशीलता और करुणा के महत्व की एक शक्तिशाली याद दिलाती है।’

‘बंटवारा 1947’ की स्टारकास्ट और दमदार अभिनय

फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल मुख्य भूमिका में ‘सिकंदर मिर्जा’ के सशक्त किरदार में नजर आ रहे हैं, वहीं प्रीति जिंटा उनकी पत्नी ‘हमीदा मिर्जा’ का रोल निभा रही हैं। इन दोनों के अलावा फिल्म में दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे बेहतरीन कलाकारों की बड़ी टुकड़ी शामिल है। यह फिल्म सनी देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी का एक और बड़ा रीयूनियन है। इससे पहले यह जोड़ी ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर और क्लासिक फिल्में दे चुकी है। यही वजह है कि इस फिल्म से दर्शकों को बहुत अधिक उम्मीदें थीं। इसके साथ ही, कई सालों बाद मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में प्रीति जिंटा की वापसी ने फैंस के बीच पुरानी यादों को तरोताजा कर दिया है।

क्या है फिल्म की कहानी और बैकग्राउंड?

आसिफ वजाहत के प्रसिद्ध नाटक ‘जिस लाहौर नै देख्या, ओ जम्याई नै’ पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और इसे आमिर खान द्वारा प्रोड्यूस किया गया है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का नाम ‘लाहौर 1947’ रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर ‘बंटवारा 1947’ कर दिया गया। कहानी भारत के विभाजन के दौरान फैले डर, उथल-पुथल और हिंसा के बीच फंसे परिवारों की त्रासदी को दर्शाती है। यह महज एक ऐतिहासिक घटना का दस्तावेज नहीं है, बल्कि उस दौर में अपने घरों और पहचान को खोते इंसानों के अस्तित्व की लड़ाई है। फिल्म दिखाती है कि कैसे डर और नफरत से बंटी दुनिया में भी कुछ लोग करुणा, साहस और इंसानियत के बल पर जीवित रहने की उम्मीद जगाते हैं।

‘आवारापन 2’ के साथ बॉक्स ऑफिस पर महासंग्राम

स्वतंत्रता दिवस के इस लंबे वीकेंड पर ‘बंटवारा 1947’ का मुकाबला सिनेमाघरों में इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ से हो रहा है। जहां एक तरफ सनी देओल और राजकुमार संतोषी का यह पीरियड ड्रामा देशभक्ति और इतिहास के पन्नों से जुड़ी एक गंभीर कहानी पेश करता है, वहीं दूसरी तरफ इमरान हाशमी लगभग 19 साल बाद ‘शिवम पंडित’ के रूप में अपनी कल्ट फ्रेंचाइजी का सीक्वल लेकर आए हैं। दोनों ही फिल्में दर्शकों को आकर्षित करने में लगी हैं, जिससे इस वीकेंड बॉक्स ऑफिस पर प्रतिस्पर्धा बेहद दिलचस्प हो गई है।

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