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न गरम मसाला, न भारी ग्रेवी… फिर भी स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएं!

 

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राजस्थान की पारंपरिक रसोई अपने अनोखे स्वाद और सादगी के लिए जानी जाती है. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में एक ऐसी सब्जी भी शामिल है, जो बिना गरम मसाले और बिना भारी ग्रेवी के तैयार होती है, लेकिन स्वाद में किसी शाही डिश से कम नहीं होती. हम बात कर रहे हैं मारवाड़ की मशहूर देसी मोठ की सब्जी की, जो आज भी गांवों से लेकर शहरों तक लोगों की पसंद बनी हुई है. खास बात यह है कि इस सब्जी को बनाने के लिए बहुत कम सामग्री की जरूरत होती है, फिर भी इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है.

पुराने समय में शादी-ब्याह और पारिवारिक आयोजनों में लापसी, कढ़ी और मोठ की सब्जी से ही पूरी थाली सज जाती थी. आज भी कई परिवार इस पारंपरिक स्वाद को संजोए हुए हैं. दादी कमल देवी के अनुसार, धीमी आंच पर साधारण मसालों के साथ पकाई गई मोठ का असली स्वाद ही इसकी पहचान है. आखिर क्यों पीढ़ियों से लोगों की पसंद बनी हुई है यह देसी रेसिपी और क्या है इसके स्वाद का असली रहस्य? जानिए इस खास रिपोर्ट में.

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