तेजा सज्जा साउथ के मशहूर अभिनेता हैं, लेकिन पैन इंडिया फिल्म ‘हनु-मैन’ के बाद उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई. इस फिल्म ने उन्हें वो स्टारडम दिलाया जिसकी उन्हें तलाश थी. अब, तेजा की नई फिल्म ‘मिराई’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है, जो एक फैंटेसी एक्शन एडवेंचर फिल्म है जो आपको दूसरी दुनिया में ले जाती है. शानदार वीएफएक्स इफेक्ट्स और ओरिजिनल कंटेंट… इस फिल्म को देखने लायक बनाते हैं. ‘मिराई’ एक ऐसी फिल्म है जो पौराणिक कथाओं को बेहतरीन तरीके से पेश करती है.

‘मराई’ के ट्रेलर ने ही यह साबित कर दिया था कि तेजा एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर लंबी छलांग मारने वाले हैं. तो चलिए सबसे पहले आपको फिल्म की कहानी के बारे में बताते हैं. पिछली बार जहां ‘हनु-मैन’ में कहानी पवन पुत्र हनुमान से जोड़कर दिखाई गई थी, वहीं इस बार तेजा के मदद करते भगवान श्रीराम नजर आए. फिल्म की कहानी वेद (तेजा सज्जा) नाम एक शख्स की कहानी है, जो एक चतुर युवक है, जिसे नियति ने सम्राट अशोक के नौ पवित्र ग्रंथों की रक्षा के लिए चुना है, जिन पर बुरी शक्तियों की नजर है.

वेद की मां रेया सरन (अंबिका) जन्म के साथ ही उसे छोड़कर चली जाती है, फिर वह अपनी जिंदगी की कहानी खुद लिखता है. फिल्म में ‘मिराई’ भगवान राम के त्रेता युग में गढ़ा गया एक दिव्य अस्त्र की अवधारणा, कहानी में गहराई और गंभीरता जोड़ती है, और इसे शाश्वत पौराणिक जड़ों से जोड़ती है. कार्तिक घट्टामनेनी और मणिबाबू करनम द्वारा लिखित यह कहानी भावनात्मक और गहन क्षणों और रोमांचक एक्शन के बीच सहजता से आगे बढ़ती है, और दर्शकों को बांधे रखती है.

वैसे फिल्म 3 घंटे के बजाय 2.30 घंटे की होती तो शायद यह अपने रफ्तार में रहती, लेकिन फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो लगता है, जिससे कहानी भी धीमी पड़ जाती है और थोड़ी बोरियत महसूस होती है. लेकिन, सेकंड हाफ आते ही फिल्म की रफ्तार अच्छी हो जाती है, जो क्लाइमैक्स तक आपको एंटरटेन करती है.

अभिनय की बात की जाए तो वेद के रूप में तेजा सज्जा अपनी भूमिका में कमाल करते हैं, उनका अभिनय आकर्षण, धैर्य और संवेदनशीलता का एक आदर्श संतुलन है. एक साधारण व्यक्ति से एक चुने हुए योद्धा में उनके परिवर्तन को दृढ़ विश्वास के साथ चित्रित किया गया है, और वह कहानी को सहजता से आगे बढ़ाते हैं. काले जादू के विशेषज्ञ, खलनायक महाबीर लामा की भूमिका निभा रहे मनोज मांचू, डरावने और आकर्षक दोनों हैं. उनकी प्रभावशाली उपस्थिति हर टकराव में जान डाल देती है. एक विलेन के अवतार में उन्हें पर्दे पर देखना काफी डरावना लगता है.

वहीं, रणवीर दग्गुबाती भी अपनी रहस्यमयी भूमिका में एक शक्तिशाली प्रभाव छोड़ते हैं, जिससे कहानी में और रोमांच जुड़ जाता है.जगपति बाबू तंत्र गुरु अंगमबली के रूप में गरिमा और शक्ति का प्रदर्शन करते हैं, जबकि फिल्म में उनका रोल बहुत बड़ा नहीं है. वहीं, रितिका नायक (विभा) एक ताजा स्क्रीन उपस्थिति देती हैं. श्रेया सरन (अंबिका) और जयराम सुब्रमण्यम (अगस्त्य) भी ठोस सहयोग देते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर किरदार को अपना समय मिले. अगर कोई एक विभाग है जहां ‘मिराई’ ने मानक स्थापित किए हैं, तो वह है इसके दृश्य. रामजी डॉट द्वारा निर्देशित और मुथु सुब्बैया द्वारा समन्वित, वीएफएक्स (दृश्य प्रभाव) का काम उत्कृष्ट है, जो विशाल, अलौकिक परिदृश्य और रोमांचकारी एक्शन दृश्य प्रस्तुत करता है जो कहीं भी बनावटी नहीं लगते.

चलती ट्रेन के दृश्यों से लेकर भव्य युद्धों तक, फिल्म एक अद्भुत दृश्य अनुभव प्रदान करती है. इस फिल्म की जा बैकग्राउंड स्कोर है, जो बीच-बीच में खासकर क्लाइमैकस में आपके रोंगटे खड़े कर देता है. कार्तिक घट्टामनेनी द्वारा किया गया छायांकन, मिथक की भव्यता और एक्शन की कठोरता, दोनों को दर्शाता है, जिससे हर फ्रेम सिनेमाई और विस्तृत लगता है. प्रदीप सेलम (नांग), केचा खम्पाकडी और अन्य द्वारा की गई एक्शन कोरियोग्राफी प्रशंसा के पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसे रोमांचकारी दृश्य प्रस्तुत किए हैं जो प्रामाणिक और भव्य दोनों लगते हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो आप इस फिल्म को अपनी पूरे परिवार, खासकर बच्चों के साथ देख सकते हैं. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3 स्टार.



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