हॉलीवुड ने दशकों से इंसानों को ऐसी कहानियां दिखाई हैं, जिनमें एलियन पृथ्वी पर हमला करते हैं, मशीनें इंसानों के खिलाफ हो जाती हैं और कोई सुपरपावर पूरी मानवता को खत्म करने की कोशिश करती है. अमेर‍िका- यूरोप के लोगों ने इन काल्पनिक खतरों को खूब इंटरटेन क‍िया. लेकिन जब वही AI की शक्‍ल में सामने है तो खौफ लग रहा है. बड़े-बड़े एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि खतरा इतना बड़ा है क‍ि कभी भी एआई की वजह से दुन‍िया खत्‍म हो सकती है. डर आखिर इतना गहरा क्यों है?

2014 में स्टीफन हॉकिंग ने चेतावनी दी थी कि AI इतना हाईटेक हो सकता है कि वह खुद को दोबारा डिजाइन करने लगे. उनके मुताबिक, इंसान बायोलॉज‍िकल ग्रोथ की धीमी गति से बंधे हैं, जबकि मशीनें बहुत तेजी से डेवलप हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में इंसानों के लिए AI के साथ कंपटीशन करना मुश्किल हो सकता है.

आज यह चिंता इसलिए ज्यादा महसूस हो रही क्योंकि AI अब केवल लैब की तकनीक नहीं है. जनरेटिव AI लोगों के रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल हो रहा है और मशीनें ऐसे काम कर रही हैं जो कुछ साल पहले तक केवल इंसानों के लिए संभव माने जाते थे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मानवता के खत्म होने का खतरा निश्चित है.

सबसे बड़ा खतरा क्या है?

ब्र‍िट‍िश अखबार द गार्जियन की र‍िपोर्ट के मुताबिक- एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि आने वाले द‍िनों में अगर एआई की स्‍पीड नहीं रोकी गई तो यह इंसानों के कंट्रोल से बाहर हो जाएगा. अपने आप कमांड देकर साइबर अटैक करने लगेगा. खुद आतंक फैलाएगा, यहां तक क‍ि दुन‍िया की बड़ी बड़ी इकॉनमी को डुबो देगा.

Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने भी चेतावनी दी है कि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा अगर कंपनियों को लगातार तेज और शक्तिशाली AI बनाने की दौड़ में धकेलती है, तो जोखिम बढ़ सकते हैं. यानी खतरा केवल यह नहीं है कि कोई AI अचानक इंसानों के खिलाफ हो जाएगा. ज्यादा व्यावहारिक चिंता यह भी है कि शक्तिशाली तकनीक गलत हाथों में जा सकती है या कंपनियां प्रतिस्पर्धा के दबाव में सुरक्षा से समझौता कर सकती हैं.

फिर चेतावनियों के बावजूद AI की दौड़ क्यों नहीं रुकी?

AI के खतरे को लेकर चेतावनियां जितनी बढ़ीं, AI कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही तेज होती गई. OpenAI की शुरुआत भी इसी चिंता के बीच हुई थी. कंपनी का घोषित उद्देश्य डिजिटल इंटेलिजेंस को इस तरह आगे बढ़ाना था कि उसका लाभ पूरी मानवता को मिले. लेकिन बाद में OpenAI के भीतर सुरक्षा और तेजी से व्यावसायिक विकास को लेकर मतभेद सामने आए. कुछ कर्मचारियों ने कंपनी छोड़ दी और बाद में Anthropic जैसी नई कंपनी बनाई.

Anthropic खुद को AI सुरक्षा और रिसर्च कंपनी के तौर पर पेश करती है. लेकिन विडंबना यह है कि उसके ही एक शोधकर्ता Jacob Coxon ने हाल में आरोप लगाया कि AI कंपनियां सेल्फ-इंप्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रही हैं और मानव जीवन के साथ जोखिम ले रही हैं.

असली समस्या AI है या AI की दौड़?

शायद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है. AI से डर का एक बड़ा कारण तकनीक की क्षमता के साथ-साथ उसे विकसित करने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी है. AI Now Institute की Sarah Myers West का तर्क है कि कई कंपनियों के पीछे यह सोच काम करती है कि अगर वे AI नहीं बनाएंगी, तो कोई दूसरी कंपनी या देश बनाएगा. इसलिए वे खुद को सुरक्षित AI बनाने वाला पक्ष मानते हुए भी दौड़ से बाहर नहीं होना चाहतीं. यही उन्‍हें और आग में कुदा रही है.

खतरा कितना बड़ा है?

बहुत शक्तिशाली AI सिस्टम अगर इंसानी नियंत्रण से बाहर हो जाएं, तो गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं. दूसरा, AI का इस्तेमाल बड़े और अधिक प्रभावी साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है. अस्‍पतालों को ठप क‍िया जा सकता है. इलेक्‍ट्र‍िस‍िटी लाइनें रोकी जा सकती हैं. AI के गलत इस्तेमाल से जैविक हमलों को लेकर भी चिंता जताई गई है. AI के तेजी से विकास से रोजगार और अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव या गंभीर व्यवधान आ सकते हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर AI खुद को लगातार सुधारकर इंसानों से ज्यादा सक्षम हो गया, तो क्या इंसान उस पर नियंत्रण बनाए रख पाएगा?

इसलिए AI का खतरा हॉलीवुड के एलियन जैसा सीधा और दिखाई देने वाला खतरा नहीं है. असली चिंता यह है कि इंसान ऐसी तकनीक को कितनी तेजी से और कितनी सुरक्षित तरीके से विकसित करता है. डर का आधार AI का अस्तित्व नहीं, बल्कि उसकी बढ़ती क्षमता और उसे विकसित करने की दौड़ है.



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