सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI को लेकर जो फैसला लिया गया है, उसे वापस नहीं लिया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने माना कि 2000 रुपये से ज्यादा के UPI transaction पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानि MDR लगाना सरकार का बड़ा और अच्छा फैसला है। RBI ने कहा कि इस फैसले से आम लोगों और छोटे दुकानदारों पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा। सिर्फ चार परसेंट बड़े व्यापरियों को मामूली ट्रांजेक्शन चार्ज देना होगा लेकिन इससे जो पैसा मिलेगा वो UPI सिस्टम को और ज्यादा मजबूत करने में काम आएगा।

RBI ने कहा कि सरकार का ये फैसला भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। RBI का कहना है कि सरकार के इस फैसले से लोगों को नई सुविधाएं मिलेगी, ग्राहकों और व्यापारियों को अच्छी सेवा मिल सकेगी, कंपनियों का घाटा कम होगा। बैंक खुश हैं, डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां गदगद हैं, आम लोग भी इस फैसले के खिलाफ नहीं हैं, बड़े व्यापारियों ने भी इस फैसले की आलोचना नहीं की है लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने इस फैसले को डिजिटल ट्रांजेक्शन को खत्म करने की साजिश बताया।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से मांग की कि इस ‘UPI Tax’ को वापस लिया जाय। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा राहुल गांधी कभी अच्छा सोच ही नहीं सकते, मौका कोई भी हो, मुद्दा कोई भी हो, राहुल हमेशा भारत को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, इसीलिए कोई उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेता।

UPI को लेकर दो बड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। क्या इससे आम आदमी और छोटे व्यापारियों को कोई फ़र्क़ पड़ेगा? ये 4% transaction पर भी चार्ज लगाने की क्या ज़रूरत थी? पहले सवाल का जवाब, दरअसल जितने transactions होते हैं, उनमें से 96% पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। जो बाक़ी 4% हैं, उनके बड़े ट्रांजेक्शन पर 0.4% चार्ज लगेगा। अगर normal card से हम 4000 रुपये का सामान खरीदें तो merchant को 80 रुपये देने पड़ेंगे और UPI से ख़रीदेंगे तो सिर्फ़ 16 रुपये लगेंगे। अब दूसरे सवाल का जवाब। UPI दुनिया का सबसे बड़ा payment platform है। पिछले साल UPI ने 24 हजार 161 करोड़ transactions हैंडल किए, 314 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया, और क्या चाहिए? असल में ये काफ़ी नहीं है, हमारे देश में अभी भी एक बड़ा तबका digital payment नहीं करता।

आज भी बहुत बड़ी संख्या में लोग cash देकर सामान खरीदते हैं। अगर इस cash economy को कम करना है, UPI को और बढ़ाना है तो ये मौजूदा form में नहीं हो सकता। इसके लिए UPI के सिस्टम को और मजबूत बनाना पड़ेगा, Cyber security को और मजबूत करना पड़ेगा, जो service provider banks हैं उन्हें भी अपनी टेकनोलोजी को और एडवांस करना पड़ेगा। UPI में नए कस्टमर जोड़ने के लिए गांव-गांव जाना पड़ेगा। यानी front-end और back-end दोनों पर पूंजी लगानी होगी। जो बड़े transactions पर 4% merchants से charge मिलेगा वो UPI के साथ और लोगों को जोड़ने के लिए होगा। इसलिए ये कहना बिल्कुल बेकार की बात है कि चार्ज लगेगा तो digital transaction कम हो जाएंगे।

क्या हूतियों ने मक्का शरीफ पर हमला किया?

यमन के हूती बागियों ने कल सऊदी वायु सेना के एफ-15 फाइटर जेट विमान को मार गिराया। सऊदी विमानों ने हाल के दिनो में यमन के हूती कब्जे वाले इलाकों में ज़बरदस्त बमबारी की थी, जिसके बाद सैकड़े यमनी नावों में सवार होकर गांवों से भाग निकले हैं। हूती बागियों ने सऊदी सीमा पर  मिसाइल और ड्रोन से हमले किये। खाड़ी युद्ध फैलने के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें इस वक्त 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। हूती विद्रोहियों ने मुसलमानों के सबसे पवित्र शहर मक्का को टारगेट करने की कोशिश की। मक्का को निशाना बनाने के लिए ड्रोन से हमला किया लेकिन सऊदी डिफेंस सिस्टम ने ड्रोन को वक्त पर मार गिराया। इस हमले के कारण मक्का में रात भर सायरन बजते रहे। हूतियों ने कहा, उन्होंने मक्का पर हमला नहीं किया।

हूती लड़ाकों को ईरान का समर्थन है। हूतियों ने यमन के ज्यादातर इलाकों को हथिया लिया है और लाल सागर के कई तटीय क्षेत्रों पर भी कब्जा कर लिया है। इन हमलों के कारण लाल सागर में बाब अल मंदब से जहाजों की आवाजाही रुक गई है। लेकिन न अमेरिका सऊदी की मदद के लिए तैयार है और पाकिस्तान भी मक्का पैक्ट से पलट गया है। ऐसे में अब सऊदी अरब क्या करेगा? क्या इजराइली सेना सऊदी अरब को बचाएगी?

हूतियों का दावा है कि उसके लड़ाकों ने यमन के दो बंदरगाहों पर कब्जा कर लिया और यमन सरकार की फौज को भगा दिया है। सऊदी अरब ने यमन की सेना को टैंक्स, हथियार और गाड़ियां दी थी, उन सब पर हूती बागियों ने कब्जा कर लिया है। हूती जिस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, उससे सऊदी अरब परेशान है। सऊदी अरब ने लाल सागर में यानबू पोर्ट पर कच्चे तेल की लोडिंग पूरी तरह रोक दी है। कच्चे तेल की सप्लाई के लिए समुद्र के नीचे बनी पाइप लाइन को भी बंद कर दिया है। अभी तक इस बात के सबूत तो नहीं मिले हैं कि हूतियों ने मक्का पर हमला किया लेकिन अगर उन्होंने ये हरकत की है तो ये बहुत शर्मनाक है। इसका उन्हें बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा।

हूतियों ने सऊदी अरब के तेल केंद्रों पर हमले किए हैं। ये वो खुद भी मानते हैं। लाल सागर के entrance पर कंट्रोल करने की कोशिश की है। दुनिया का 8.7% समुद्री व्यापार बाब अल-मंदब strait से गुजरता है। Strait of Hormuz पहले से ही बंद है। चिंता की बात ये है कि ओपेक देशों के कच्चे तेल की कीमतें पिछले दस दिन में 78 डॉलर से बढ़कर 124 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। अगर हालात नहीं सुधरे तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में आग लगेगी। मतलब ये है कि सऊदी और हूतियों के बीच जो जंग चल रही है, उसका ख़ामियाज़ा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 16 सितंबर, 2026 का पूरा एपिसोड





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