इन दिनों इंडियन बॉक्स ऑफिस पर साउथ इंडियन फिल्मों का बोलबाला है. लोग साउथ इंडियन फिल्मों को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें ओरिजिनल कंटेंट की तलाश नहीं करनी पड़ती. इसलिए मैं आज (25 सितंबर, 2025) रिलीज हुई साउथ के सुपरस्टार पवन कल्याण की पैन इंडिया फिल्म ‘दे कॉल हिम ओजी’ का पहला शो देखने के लिए सिनेमाघरों पहुंच गया. फिल्म के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, और यह उम्मीदों से कहीं बढ़कर रही. पवन इस बार जबरदस्त एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. इसके अलावा, बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी इस फिल्म से तेलुगु फिल्मों में डेब्यू कर रहे हैं. तो चलिए सबसे पहले फिल्म की कहानी समझते हैं.

यह फिल्म ओजस गंभीरा ‘ओजी’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक पूर्व गैंगस्टर और योद्धा है, जो 15 साल के लापता होने के बाद, 1990 के दशक में फिल्म के लीड विलेन ओमी भाऊ की हत्या करने के लिए बॉम्बे लौटता है. पवन कल्याण फिल्म में ओजस गंभीरा “ओजी” की भूमिका निभा रहे हैं, और इमरान हाशमी ओमी भाऊ की भूमिका में हैं. फिल्म शुरू से ही आपको बांधे रखती है. फिल्म में कई उतार-चढ़ाव हैं. अपने एक्शन के लिए मशहूर साउथ इंडियन फिल्में आपका मनोरंजन करने के लिए काफी होंगी.

वास्तव में, पवन कल्याण ने इस फिल्म के साथ गैंगस्टर फिल्मों को एक नई दिशा दी है. फिल्म में प्रियंका मोहन कनमनी (ओजी की पत्नी), अर्जुन दास अर्जुन (ओजी का भतीजा), श्रेया रेड्डी गीता (अर्जुन की मां) और प्रकाश राज सत्यनारायण ‘सत्य दादा’ (ओजी के पिता) की भूमिका में हैं. कहानी की शुरुआत अच्छी होती है, ओजी अपने पूरे परिवार को छोड़कर मुंबई से बाहर चला जाता है, जबकि उसे 15 साल हो गए हैं. ओजी के परिवार का एक बंदरगाह का व्यवसाय है, जहां सत्य दादा एक बंदरगाह चलाते हैं. ओमी भाऊ के आरडीएक्स से भरा एक कंटेनर बंदरगाह पर आता है, जिसे सत्य दादा छिपा देते हैं, यह जानते हुए कि ओमी इस आरडीएक्स से मुंबई को तबाह करने का इरादा रखता है.

इस कंटेनर की तलाश में, ओमी ओजी के परिवार पर हमला करता है. वह अपने भाई को सत्य दादा को मारने के लिए भेजता है. ओमी बंदरगाह पर कब्जा भी कर लेता है, लेकिन आरडीएक्स हासिल करने में नाकाम रहता है. इसी बीच, जब सत्य दादा का परिवार मुश्किल में होता है, ओजी मुंबई लौट आता है. लेकिन क्या ओजी अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर ओमी पर जीत हासिल कर पाएगा? ओजी ने मुंबई क्यों छोड़ा? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको थिएटर जाकर पूरी फिल्म देखनी होगी.

ओजी की वापसी के बाद कहानी में आगे क्या होता है, यह तो आपको पहले से ही पता होगा, लेकिन क्लाइमैक्स में ओजी के बारे में कुछ ऐसा खुलासा होगा जो हैरान कर देगा. फिल्म के एक्शन सीन प्रभावशाली हैं. इस बार पवन कल्याण ने बंदूकों की बजाय तलवारों से एक्शन फिल्माया है, जो उनके व्यक्तित्व पर जंचता है. अभिनय की बात करें तो पवन कल्याण ने फिल्म में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है. कभी वह शांत तो कभी खूंखार दिखाई देते हैं. वहीं, इमरान हाशमी इस फिल्म से साउथ इंडियन फिल्मों में डेब्यू कर रहे हैं. उनकी लगन और अभिनय क्षमता तो लाजवाब है, लेकिन खलनायक के रूप में उन्हें कितना पसंद किया जाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा.

प्रकाश राज भी फिल्म में अहम भूमिका में हैं. वह निस्संदेह एक अनुभवी अभिनेता हैं, लेकिन उनकी संवाद अदायगी ही आपको प्रेरित करेगी. प्रियंका मोहन, अर्जुन दास और श्रिया रेड्डी भी अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं. बॉलीवुड अभिनेता अभिमन्यु सिंह भी फिल्म में इंस्पेक्टर तावड़े की भूमिका निभाते नजर आएंगे. हालांकि उनके दृश्य छोटे हैं, लेकिन वे पूरे समय अपने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लेते हैं. वहीं, निर्देशन की बात करें तो सुजीत ने एक बार फिर खुद को दक्षिण के एक अनुभवी निर्देशक के रूप में साबित किया है.

कोई भी फिल्म कितनी भी अच्छी क्यों न हो, उसमें कुछ खामियां जरूर होती है. इस फिल्म का पहला भाग आपको अपनी सीट से बांधे रखेगा, लेकिन दूसरा भाग कई बार काफी धीमा पड़ता है, जिससे आप थोड़ा ऊबा हुआ महसूस करते हैं. हालांकि, क्लाइमैक्स से पहले यह अपनी सामान्य गति पर लौट आती है. हिंदी भाषी दर्शकों के लिए संगीत थोड़ा उबाऊ हो सकता है. हिंदी भाषी दर्शकों के लिए कुछ गाने फिल्म को और भी आकर्षक बना सकते थे. हालांकि, फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इतना लुभावना है कि यह कई दृश्यों में आपको ऊर्जा से भर देगा. कुल मिलाकर, यह फिल्म देखने लायक ज़रूर है. इस फिल्म को मेरी ओर से 5 में से 3.5 स्टार.



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