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Kathal Pakora Desi Style: आलू-प्याज, पनीर के पकौड़े तो आपने खूब खाए होंगे, एक बार कटहल के पकौड़े भी ट्राय कीजिए. झारखंड की तरफ इन खास पकौड़ों को अक्सर शाम की चाय के साथ तला जाता है. इनका स्वाद आम पकौड़ों से बिलकुल अलग होता है और कुछ टिप्स का ध्यान रखेंगे तो ये बेहद कुरकुरे बनेंगे.

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देवघर. रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश के साथ ही देवघर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में एक खास स्वाद और परंपरा की शुरुआत हो जाती है. इस मौसम में खेतों और बागानों में मिलने वाला कटहल सिर्फ सब्जी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे एक बेहद स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किया जाता है, जिसे कटहल का पकौड़ा कहा जाता है. बारिश के मौसम में गरम चाय के साथ इसका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. इसका स्वाद इतना खास होता है कि एक बार खाने के बाद बार-बार खाने का मन करता है.

कटहल का पकौड़ा बनाने के लिए लगती है यह सामग्री
आमतौर पर लोग प्याज और आलू के पकौड़े खाते हैं, लेकिन कटहल का पकौड़ा अपने अलग स्वाद और कुरकुरेपन के लिए जाना जाता है. यह खासतौर पर एक से डेढ़ महीने के सीमित समय में ही बनता है, जब कटहल पूरी तरह कच्चा और मुलायम होता है. इसे बनाने के लिए कच्चा कटहल, बेसन, चावल का आटा, लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च का पेस्ट, नमक, जीरा, लाल मिर्च पाउडर और तेल की जरूरत होती है.

कटहल का पकौड़ा बनाने की आसान रेसिपी
सबसे पहले कटहल को अच्छी तरह छीलकर उसके अंदर के छोटे-छोटे गूदों को अलग निकाल लें. कटहल काटते समय हाथों में सरसों का तेल जरूर लगा लें, क्योंकि इसका गोंद हाथों में चिपक सकता है और साफ करना मुश्किल हो जाता है. इसके बाद चावल को साफ करके मिक्सी में पीस लें और उसका बारीक आटा तैयार कर लें.

अब एक बड़े बर्तन में बेसन और चावल का आटा मिलाएं. इसमें लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च का पेस्ट, नमक, जीरा और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें. फिर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए मध्यम गाढ़ा घोल तैयार करें. ध्यान रखें कि घोल न ज्यादा पतला हो और न ज्यादा गाढ़ा, ताकि पकौड़े कुरकुरे और स्वादिष्ट बनें.

एक्स्ट्रा तेल निकाल दें
अब इस घोल में कटहल के गूदे डालकर अच्छी तरह मिला दें, ताकि हर टुकड़े पर मसाले और घोल की परत चढ़ जाए. इसके बाद कड़ाही में तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें. तेल गर्म होने पर तैयार मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा करके तेल में डालें और मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें. पकौड़े तैयार होने पर उन्हें टिशू पेपर पर निकाल लें, ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए.

देवघर के ग्रामीण इलाकों में दो महीने तक बनता है यह स्वाद
गरमा-गरम कटहल के पकौड़े, हरी चटनी, टमाटर सॉस या धनिया-पुदीना की चटनी के साथ परोसे जाते हैं. बारिश की हल्की फुहार और चाय के साथ इनका स्वाद और बढ़ जाता है. देवघर के ग्रामीण इलाकों में यह पकौड़ा सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि मौसम और परंपरा का हिस्सा माना जाता है, जो हर साल लोगों को अपने स्वाद और खुशबू से जोड़ता है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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