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Jalore Famous Mirchi Vada on Muharram: जालौर के गणेश चौक में मुहर्रम पर 20 साल पुरानी परंपरा निभाई जाती है. यहां ‘वसनो बा का मिर्ची बड़ा’ साल में सिर्फ एक दिन मिलता है. सोहन सिंह गुर्जर द्वारा बनाए जाने वाले इस मिर्ची बड़े में एक खास सामग्री मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद हल्का मीठा होता है. इसे खाने के लिए लोग सालभर इंतजार करते हैं. शाम को बिक्री शुरू होते ही 30 रुपये की कीमत वाला यह मिर्ची बड़ा कुछ ही घंटों में हजारों की संख्या में बिक जाता है, जो आपसी भाईचारे का प्रतीक है.

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Jalore: राजस्थान का जालौर शहर अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासतों और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है. इसी कड़ी में जालौर शहर के गणेश चौक स्थित गुर्जरों के वास में मुहर्रम के मौके पर एक बेहद ही अनोखी और अनूठी परंपरा देखने को मिलती है. यहां सालभर के लंबे इंतजार के बाद सिर्फ एक दिन के लिए एक विशेष प्रकार का ‘मिर्ची बड़ा’ तैयार किया जाता है. इस पकवान को चखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में लोग गणेश चौक पहुंचते हैं.

इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि यह मिर्ची बड़ा सिर्फ एक साधारण व्यंजन या पकवान नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की भावनाओं, गहरी आस्था और आपसी भाईचारे का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है. मुहर्रम के पवित्र मौके पर जैसे ही इस विशेष दुकान पर मिर्ची बड़े बनना शुरू होते हैं, वैसे ही लोगों की भारी भीड़ जुटना शुरू हो जाती है. हिंदू-मुस्लिम सहित सभी समुदाय के लोग इस खास स्वाद का आनंद लेने और इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनने के लिए खिंचे चले आते हैं.

हल्का मीठा स्वाद देता है इसे सबसे अलग पहचान
इस खास मिर्ची बड़े का स्वाद आम दिनों में मिलने वाले सामान्य मिर्ची बड़ों से बिल्कुल अलग और जुदा होता है. इसे बनाने वाले कारीगरों के अनुसार, इसमें एक ऐसा खास और गुप्त इंग्रेडिएंट (सामग्री) मिलाया जाता है, जिससे इसका तीखापन संतुलित हो जाता है और स्वाद में एक हल्का सा मीठापन आ जाता है. यही अनोखा और हल्का मीठा स्वाद इस मिर्ची बड़े को राजस्थान के बाकी सभी मिर्ची बड़ों से एकदम अलग और अनूठी पहचान देता है. जो भी व्यक्ति इसे एक बार चख लेता है, वह इसके स्वाद का कायल हो जाता है.

‘वसनो बा का मिर्ची बड़ा’ के नाम से है बेहद मशहूर
इस पारंपरिक कार्य को पूरी श्रद्धा के साथ निभाने वाले सोहन सिंह गुर्जर ने बताया कि यह परंपरा करीब 18 से 20 साल पुरानी है. उन्होंने कहा कि पहले हमारे पिताजी इस विशेष मिर्ची बड़े को बनाते थे और अब उनकी विरासत को संभालते हुए हम इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. पूरे जालौर क्षेत्र में यह मिर्च बड़ा उनके स्वर्गीय पिताजी के नाम से यानी ‘वसनो बा का मिर्ची बड़ा’ के नाम से बेहद प्रसिद्ध है. सोहन सिंह के अनुसार, इस व्यंजन में केवल मसाले ही नहीं, बल्कि लोगों का अपार प्यार और आशीर्वाद भी शामिल होता है, यही वजह है कि लोग इसे खाने के लिए पूरे 365 दिन का लंबा इंतजार करते हैं.

सुबह से शुरू होती है तैयारी, कुछ ही घंटों में बिक जाते हैं हजारों बड़े
इस विशेष पकवान को तैयार करने के लिए सुबह करीब 6 बजे से ही कारीगर और परिवार के सदस्य तैयारी शुरू कर देते हैं. दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद शाम को करीब 6 बजे से इसकी बिक्री आम जनता के लिए शुरू की जाती है. सोहन सिंह ने बताया कि मुहर्रम के इस एक दिन में करीब 3 से 4 हजार मिर्ची बड़े तैयार किए जाते हैं. जैसे ही शाम को दुकान खुलती है, ग्राहकों की लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं और देखते ही देखते कुछ ही घंटों में सारे मिर्ची बड़े खत्म हो जाते हैं.

महंगाई के दौर में समय के साथ इसकी कीमतों में भी बदलाव आया है. शुरुआत में इस एक मिर्ची बड़े की कीमत महज 10 रुपए हुआ करती थी, जो वर्तमान में बढ़कर 30 रुपए प्रति पीस हो गई है. हालांकि, कीमत बढ़ने के बावजूद लोगों के उत्साह और इस स्वाद के प्रति दीवानगी में कोई कमी नहीं आई है. आज यह मिर्ची बड़ा जालौर की समृद्ध परंपरा, अटूट आस्था और सामाजिक जुड़ाव की एक बेहतरीन मिसाल बन चुका है.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें



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