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Rani Jalebi: पाली के सर्राफा बाजार की 100 साल से ज्यादा पुरानी ‘प्रहलाद जी की जलेबी’ आज भी अपने खास स्वाद और कुरकुरेपन के लिए मशहूर है. लोग इसे प्यार से ‘रानी जलेबी’ कहते हैं. सदी पुरानी परंपरा, शुद्धता और चाशनी से लबालब स्वाद के चलते यहां जलेबी खाने के लिए सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतार लग जाती है.

पाली. अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और कभी मारवाड़ की तरफ आएं, तो पाली के सर्राफा बाजार की हवा में घुली जलेबियों की खुशबू आपको अपनी तरफ खींच ही लेगी. पतली, रस से लबालब और एकदम क्रिस्पी हम बात कर रहे हैं 100 साल से भी ज्यादा पुरानी ‘प्रहलाद जी की जलेबी’ की, जिसे शहर के लोग प्यार से ‘रानी जलेबी’ भी कहते हैं.

आज के बदलते दौर में जहां स्वाद और दुकानें बदल जाती हैं, वहीं दादोसा की बनाई परंपरा, शुद्धता और इस जलेबी की वही सदी पुरानी मिठास आज भी वैसी की वैसी ही बरकरार है.

खान पान के लिहाज से पाली मशहूर
राजस्थान का ऐतिहासिक पाली शहर केवल अपनी जगमगाती दुकानों और पारंपरिक खरीदारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनूठे खान-पान के लिए भी देशभर में जाना जाता है. शहर का हृदय स्थल माना जाने वाला सर्राफा बाजार कपड़ों और आभूषणों के साथ-साथ ज़ायके के शौकीनों की पहली पसंद है. इस बाज़ार की गलियों में घुली मिठास की खुशबू यहां आने वाले हर राहगीर को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है.

जाने कैसे पहुंचे यहां पर
इस प्रसिद्ध स्वाद का आनंद लेने के लिए दुकान तक पहुंचना बेहद आसान है. यह प्रतिष्ठान पाली के सर्राफा बाजार के मैन चौक में स्थित है. यदि आप शहर के बाहर से आ रहे हैं, तो पुराना बस स्टैंड से सीधे सर्राफा बाजार पहुंचकर मुख्य चौक की ओर आ सकते हैं. स्थानीय लोगों के बीच यह दुकान इतनी मशहूर है कि कोई भी आपको यहां तक का रास्ता आसानी से बता देगा.

शुद्धता के लिए भी यहां की पहचान
अपनी खास बनावट, लाजवाब चाशनी और बेहतरीन करकरेपन की वजह से लोग इसे प्यार से ‘रानी जलेबी’ भी कहते हैं. कड़ाही से निकलती सुनहरी, गरमा-गरम और क्रिस्पी जलेबियों को देखने मात्र से ही किसी के भी मुंह में पानी आ जाता है. शुद्धता और स्वाद का यह मेल हर वर्ग के लोगों का पसंदीदा नाश्ता बना हुआ है. यही कारण है कि दुकान के बाहर सुबह से शाम तक ग्राहकों का हुजूम लगा रहता है. लोग अपनी बारी आने के लिए घंटों कतार में खड़े रहकर इंतज़ार करने को भी सहर्ष तैयार रहते हैं. स्वाद प्रेमियों का यह लंबा इंतज़ार और चेहरे की मुस्कान साबित करती है कि दादोसा के हाथों की यह जलेबी आज भी पाली की सबसे मीठी पहचान बनी हुई है.

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मोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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