Poori Dough Tips: त्योहार हो, मेहमान घर आए हों या फिर रविवार की खास सुबह, पूड़ी का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है. गरमा गरम पूड़ियां जब आलू की सब्जी, छोले, रायता या खीर के साथ परोसी जाती हैं तो खाने का मजा कई गुना बढ़ जाता है. लेकिन कई लोगों की शिकायत रहती है कि घर पर बनाई गई पूड़ियां बाजार या हलवाई जैसी नहीं बनतीं. कभी वे कढ़ाई से निकालते ही बैठ जाती हैं, कभी बहुत ज्यादा तेल सोख लेती हैं और कभी उनमें वह हल्का करारापन नहीं आता जो अच्छी पूड़ी की पहचान माना जाता है. ऐसे में एक बेहद आसान किचन ट्रिक आपकी मदद कर सकती है.

यह ट्रिक है पूड़ी का आटा गूंथते समय उसमें थोड़ी सी सूजी मिलाना. सुनने में यह बात छोटी लग सकती है, लेकिन इसके फायदे इतने हैं कि एक बार अपनाने के बाद आप हर बार यही तरीका इस्तेमाल करना चाहेंगे.

आटे में कितनी सूजी मिलानी चाहिए
सूजी मिलाने का फायदा तभी मिलता है जब उसकी मात्रा सही हो. अगर मात्रा ज्यादा हो जाए तो आटा बहुत सख्त हो सकता है और पूड़ियां तलते समय फट भी सकती हैं. आमतौर पर 2 कप गेहूं के आटे में 2 से 3 चम्मच बारीक सूजी मिलाना पर्याप्त माना जाता है. आटा गूंथने के बाद उसे 10 मिनट तक ढककर रखना भी जरूरी है ताकि सूजी पानी सोखकर अच्छी तरह फूल जाए.

पूड़ियां लंबे समय तक फूली रहती हैं
अक्सर देखा जाता है कि पूड़ियां कढ़ाई से निकलते ही धीरे-धीरे बैठने लगती हैं. लेकिन जब आटे में थोड़ी सी सूजी मिलाई जाती है तो पूड़ियों का स्ट्रक्चर मजबूत हो जाता है. इससे तलने के बाद उनके अंदर बनी भाप जल्दी बाहर नहीं निकलती. नतीजा यह होता है कि पूड़ियां लंबे समय तक फूली हुई और आकर्षक बनी रहती हैं.

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मिलता है हलवाई जैसा करारापन
कई लोग पूड़ी में हल्का क्रंच पसंद करते हैं. सिर्फ आटे से बनी पूड़ियां जल्दी नरम पड़ सकती हैं, जबकि सूजी मिलाने से उनमें हल्का करारापन आता है. यही कारण है कि शादी समारोह या हलवाई की दुकान पर मिलने वाली पूड़ियां ज्यादा स्वादिष्ट और टेक्सचर में बेहतर लगती हैं. सूजी उस खास करारेपन को बढ़ाने में मदद करती है.

कम तेल सोखती हैं पूड़ियां
तेल से भरी पूड़ियां न सिर्फ खाने में भारी लगती हैं बल्कि सेहत के लिए भी अच्छी नहीं मानी जातीं. सूजी की खासियत यह है कि यह आटे में मौजूद नमी को संतुलित रखती है. इसके कारण पूड़ियां तलते समय अतिरिक्त तेल कम सोखती हैं. इससे वे ज्यादा ऑयली नहीं लगतीं और स्वाद भी बेहतर बना रहता है.

एक साथ रखने पर चिपकती नहीं हैं
त्योहार या किसी फंक्शन में अक्सर बहुत सारी पूड़ियां पहले से बनाकर रखनी पड़ती हैं. ऐसे में सामान्य पूड़ियां अपनी भाप से नरम होकर आपस में चिपक सकती हैं. लेकिन सूजी वाली पूड़ियां अपना टेक्सचर बेहतर बनाए रखती हैं. इसलिए उन्हें हॉटकेस या कैसरोल में रखने पर भी वे आसानी से अलग-अलग निकल आती हैं.

बेलने में भी मिलती है आसानी
कई बार आटा थोड़ा ज्यादा नरम हो जाता है और बेलते समय चकले या बेलन पर चिपकने लगता है. ऐसे में बार-बार सूखा आटा लगाना पड़ता है. सूजी पानी को अच्छी तरह सोख लेती है, जिससे आटा संतुलित और थोड़ा मजबूत बनता है. ऐसा आटा आसानी से बेल जाता है और पूड़ियां भी अच्छी बनती हैं.

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