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सिर्फ गेहूं पर निर्भर न रहें! 6तरह के आटे से बनाएं रोटी, हर आटे की अपनी खासियत

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6 Healthy Flour Roti: रोज की थाली में रोटी हो और वह भी वही गेहूं की, तो कुछ दिनों बाद खाने में एक जैसा स्वाद महसूस होना स्वाभाविक है. ऐसे में रोटी को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं, बस उसके आटे में थोड़ी वैरायटी लाई जा सकती है. भारतीय रसोई में गेहूं के अलावा कई ऐसे अनाज और बीज मौजूद हैं, जिनसे स्वादिष्ट रोटियां बनाई जाती हैं. ज्वार, बाजरा, रागी से लेकर राजगीरा तक के आटे का इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जा सकता है. इनसे बनी रोटियां खाने में स्वाद का बदलाव तो देती ही हैं, साथ ही अलग-अलग पोषक तत्व डाइट का हिस्सा बन सकते हैं. हालांकि, हर आटा हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सही नहीं होता.

गेहूं के अलावा इन आटों की रोटियां आजमाएं रोटी को हेल्दी बनाने का मतलब यह नहीं है कि गेहूं को हमेशा के लिए डाइट से बाहर कर दिया जाए. बेहतर तरीका यह है कि अलग-अलग अनाजों को अपनी जरूरत और पसंद के हिसाब से बारी-बारी से खाने में शामिल किया जाए. इससे रोज की थाली में स्वाद और अनाज दोनों की विविधता आती है. (Image-AI generated)

मक्के की रोटी मक्के की रोटी का नाम आते ही सरसों के साग की याद आ जाती है. मक्के में फाइबर, मैग्नीशियम और कुछ मात्रा में विटामिन ए जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसकी रोटी स्वाद में भरपूर होती है और खाने में गेहूं से बिल्कुल अलग अनुभव देती है. अगर आप कैलोरी या ब्लड शुगर पर ध्यान दे रहे हैं तो किसी भी रोटी की तरह इसकी मात्रा भी अपनी पूरी डाइट के हिसाब से रखें. (Image-AI generated)

ज्वार की रोटी ज्वार ग्लूटेन-फ्री अनाज है और इसमें फाइबर भी पाया जाता है. इसकी रोटी पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकती है. ज्वार की रोटी का स्वाद हल्का मिट्टी जैसा और खास होता है. शुरुआत में इसे गेहूं के आटे के साथ मिलाकर बनाना भी आसान तरीका हो सकता है. जिन लोगों को पाचन संबंधी परेशानी रहती है, वे अपनी सहनशीलता के अनुसार इसकी मात्रा तय करें. (Image-AI generated)

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रागी की रोटी रागी को कैल्शियम, आयरन और फाइबर वाले अनाज के तौर पर जाना जाता है. इससे बनी रोटी डाइट में पोषक तत्वों की विविधता बढ़ा सकती है. रागी का आटा बारीक होता है और इसकी रोटी बनाते समय आटा गूंथने के तरीके पर ध्यान देना पड़ता है. कुछ लोगों के लिए इसकी रोटी सीधे बनाने के बजाय दूसरे आटे के साथ मिलाना ज्यादा सुविधाजनक रहता है. (Image-AI generated)

जौ की रोटी जौ की रोटी उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है जो अपनी डाइट में फाइबर बढ़ाना चाहते हैं. जौ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स गेहूं की तुलना में कम माना जाता है. यही वजह है कि इसे वजन और ब्लड शुगर मैनेजमेंट वाली डाइट में जगह दी जाती है. हालांकि, जौ में ग्लूटेन होता है. इसलिए सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इसे नहीं खाना चाहिए. (Image-AI generated)

राजगीरे की रोटी राजगीरा आम दिनों के साथ व्रत की थाली में भी खूब इस्तेमाल होता है. यह ग्लूटेन-फ्री है और इसमें प्रोटीन, आयरन तथा कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. राजगीरे के आटे की रोटी स्वाद में अलग होती है और इसे डाइट में शामिल करने से अनाज की विविधता बढ़ती है. अगर किसी व्यक्ति को राजगीरे से एलर्जी है तो इसे खाने से बचना चाहिए. (Image-AI generated)

बाजरे की रोटी बाजरे की रोटी खासकर ठंड के मौसम में भारतीय घरों में खूब पसंद की जाती है. इसमें फाइबर, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मिलते हैं. इसका स्वाद थोड़ा भारी और भरपूर होता है. बाजरे की रोटी को सब्जी, दही या हरी चटनी के साथ खाया जा सकता है. थायरॉयड से जुड़ी समस्या वाले लोग बाजरे को लेकर अपने डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार डाइट तय करें. (Image-AI generated)

रोटी बदलें, गेहूं नहीं तोड़ें अलग-अलग आटे की रोटियां खाने का मतलब गेहूं की रोटी छोड़ना नहीं है. असल बात डाइट में विविधता लाने की है. आप अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार कभी ज्वार, कभी बाजरा या रागी की रोटी खा सकते हैं. किसी खास बीमारी, एलर्जी या पाचन संबंधी समस्या की स्थिति में आटा चुनने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा. (Image-AI generated)

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