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Heart Health: जब भी दिल की बीमारी या हार्ट अटैक की बात होती है, सबसे पहले लोग खाने के तेल को दोष देने लगते हैं. कई घरों में तेल कम कर देना ही दिल को स्वस्थ रखने का सबसे आसान उपाय माना जाता है. लेकिन क्या वास्तव में सिर्फ तेल ही इसकी वजह है? विशेषज्ञों का कहना है कि तस्वीर इससे कहीं ज्यादा बड़ी है. हमारी रोजमर्रा की थाली में मौजूद कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें हम बिना सोचे-समझे खाते रहते हैं और वही धीरे-धीरे दिल की सेहत पर असर डालती हैं. बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, कम शारीरिक गतिविधि और खानपान की गलत आदतें मिलकर जोखिम बढ़ा रही हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि दिल का असली दुश्मन कौन है और किन छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके लंबे समय तक हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है.

सिर्फ तेल नहीं, जरूरत से ज्यादा चीनी भी बन सकती है बड़ा खतरा मेडिकवर हॉस्पिटल्स, चंदनगर की वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भैरवी चुंदुरी के अनुसार, दिल की सेहत के लिए सिर्फ तेल को जिम्मेदार मानना सही नहीं है. रोजमर्रा के खानपान में जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन भी उतना ही नुकसान पहुंचा सकता है. अधिक चीनी शरीर में ब्लड शुगर बढ़ाती है और लंबे समय तक यही स्थिति डायबिटीज का कारण बन सकती है. डायबिटीज रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत यानी एंडोथेलियम को नुकसान पहुंचाती है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज बनने का खतरा बढ़ जाता है. अगर किसी व्यक्ति की दिन की शुरुआत मीठी चाय से होती है, बीच में मीठे स्नैक्स और रात को मिठाई खाने की आदत है, तो यह धीरे-धीरे दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. इसलिए सिर्फ तेल कम करना ही काफी नहीं, बल्कि चीनी की मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है. (Image-AI generated)

हर फैट नुकसानदायक नहीं होता अच्छे और बुरे फैट का फर्क समझना जरूरी- अक्सर लोग फैट का नाम सुनते ही उसे पूरी तरह नुकसानदायक मान लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. शरीर को कुछ प्रकार के फैट की जरूरत भी होती है. HDL कोलेस्ट्रॉल को अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है, क्योंकि यह धमनियों को साफ रखने में मदद करता है. वहीं LDL कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और नॉन-एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा स्तर दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है. यही वजह है कि डॉक्टर केवल फैट कम करने की नहीं, बल्कि सही फैट चुनने की सलाह देते हैं. संतुलित आहार और नियमित जांच से कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर नजर रखना भी जरूरी है. (Image-AI generated)

खाना पकाने के लिए सही तेल चुनना क्यों जरूरी है कोल्ड-प्रेस्ड तेल बेहतर विकल्प हो सकते हैं- विशेषज्ञों का मानना है कि खाना पकाने के लिए कोल्ड-प्रेस्ड तेल या अच्छी गुणवत्ता वाले रिफाइंड तेल का सीमित मात्रा में इस्तेमाल बेहतर माना जाता है. वहीं पाम ऑयल और डालडा जैसे हाइड्रोजनेटेड फैट से बचना चाहिए. ऐसे फैट, जो सामान्य तापमान पर जम जाते हैं, लंबे समय में धमनियों में वसा जमा होने का खतरा बढ़ा सकते हैं. आज कई परिवार स्वाद या कीमत देखकर तेल खरीदते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से तेल की गुणवत्ता और उसका सही उपयोग कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है. (Image-AI generated)

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हर एक-दो महीने में तेल बदलने की सलाह क्यों दी जाती है डॉ. भैरवी चुंदुरी के अनुसार, एक ही तरह का तेल लगातार इस्तेमाल करने की बजाय समय-समय पर तेल बदलना बेहतर हो सकता है. उदाहरण के तौर पर एक महीने सूरजमुखी का तेल, अगले महीने राइस ब्रान ऑयल और फिर मूंगफली का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसा करने से शरीर को अलग-अलग प्रकार के फैटी एसिड और पोषक तत्व मिलते रहते हैं. हालांकि किसी भी बदलाव से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना चाहिए, खासकर यदि पहले से हृदय या अन्य गंभीर बीमारी हो. (Image-AI generated)

तेल इस्तेमाल करते समय इन गलतियों से जरूर बचें बार-बार गर्म किया हुआ तेल पड़ सकता है भारी- बहुत से घरों में पकौड़े या पूरी तलने के बाद बचा हुआ तेल दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह आदत नुकसानदायक हो सकती है. हर तेल का एक निश्चित स्मोक पॉइंट होता है. उससे ज्यादा तापमान पर तेल के गुण बदल सकते हैं और हानिकारक तत्व बनने लगते हैं. इसके अलावा तेल को हमेशा ठंडी और सूखी जगह पर रखें. सीधी धूप या अधिक गर्मी में रखा तेल जल्दी खराब हो सकता है. छोटी-सी सावधानी लंबे समय में दिल की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. (Image-AI generated)

दिल को स्वस्थ रखने का मतलब केवल कम तेल खाना नहीं है. जरूरत से ज्यादा चीनी, गलत फैट, बार-बार गर्म किया हुआ तेल और असंतुलित खानपान मिलकर दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं. संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के साथ सही खानपान की आदतें अपनाना ही लंबे समय तक स्वस्थ हृदय का सबसे प्रभावी तरीका है. (Image-AI generated)

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