वैशाख के निर्देशन में बनी साउथ और बॉलीवुड फिल्मों के स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘खलीफा’ 20 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म में मोहनलाल के कैमियो रोल के साथ नील नितिन मुकेश और मालविका शर्मा की अहम भूमिकाएं हैं। फिल्म के रिलीज होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं। जहां एक तरफ पृथ्वीराज की स्क्रीन प्रेजेंस और एक्शन की जमकर तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी तरफ फिल्म के कमजोर लेखन और इमोशनल जुड़ाव की कमी को लेकर कड़ी आलोचना भी देखने को मिल रही है।

स्क्रीन प्रेजेंस दमदार, लेकिन पटकथा में नहीं दिखा दम

एक यूजर ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि फिल्म का स्केल काफी बड़ा दिखता है, लेकिन यह अपनी मुख्य कहानी में भटक जाती है। पृथ्वीराज अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से सीन में जान डालते हैं और जेक्स बिजॉय का बैकग्राउंड म्यूजिक कई मौकों पर बेहतरीन लगता है, हालांकि यह पूरी फिल्म में एक जैसा प्रभाव नहीं छोड़ पाता। इसके अलावा, स्क्रीनप्ले फिल्म के पैमाने से मेल नहीं खाता और इमोशनल सीन्स भी अधूरे लगते हैं, जबकि कैमियो रोल कहानी का स्वाभाविक हिस्सा बनने के बजाय सिर्फ फैन-सर्विस की तरह इस्तेमाल किए गए हैं।

एक अन्य यूजर ने पृथ्वीराज के लुक और म्यूजिक की सराहना की, लेकिन कहानी को पुराना बताया। यूजर ने लिखा कि पृथ्वीराज की टोंड फिजीक, स्टाइलिश अंदाज और जेक्स बिजॉय का बीजीएम दो एक्शन ब्लॉक्स के साथ शानदार है। नील नितिन मुकेश का विलेन किरदार कमजोर रहा और लालेट्टन (मोहनलाल) का कैमियो सामान्य था। बिना किसी नए संघर्ष या स्मार्टनेस के यह एक प्रेडिक्टेबल और आउटडेटेड स्मगलिंग-रिवेंज ड्रामा है, जिसे औसत से नीचे ही माना जाएगा।

कमजोर कहानी और रफ्तार पर उठे सवाल

फिल्म की रफ्तार से असहमत एक दर्शक ने लिखा कि घिसी-पिटी कहानी और किरदारों से जुड़ाव न होने के कारण फिल्म को मुख्य ट्रैक पर आने में ही शुरुआती 40 मिनट का समय लग जाता है। इंटरवल के पास का हिस्सा अच्छा था, लेकिन उसके अलावा फिल्म में कुछ भी नया या दिलचस्प देखने को नहीं मिलता।

फिल्म राइटिंग पर बात करते हुए एक अन्य यूजर ने लिखा कि सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यह है कि हमारे पास तकनीकी रूप से बेहद सक्षम और प्रतिभाशाली फिल्ममेकर्स की टीम तो है, लेकिन ऐसे लेखक नहीं हैं जो एक मजबूत स्क्रिप्ट के साथ एक बेहतरीन कमर्शियल एक्शन फिल्म बना सकें।

मिला-जुला रिस्पॉन्स और तीखी समीक्षाएं

फिल्म को एक मिला-जुला अनुभव बताते हुए एक यूजर ने लिखा कि खलीफा एक उतार-चढ़ाव भरी फिल्म है। पृथ्वीराज के एक्शन सीन और जेक्स बिजॉय का म्यूजिक इसके मजबूत पक्ष हैं, जिसमें कुछ अच्छे मास मोमेंट्स देखने को मिलते हैं। हालांकि, कमजोर राइटिंग और इमोशनल गहराई की कमी फिल्म के असर को कम कर देती है।

कुछ दर्शक फिल्म के प्रति और ज्यादा सख्त नजर आए। एक एक्स यूजर ने लिखा कि यह तय करना मुश्किल है कि फिल्म में सबसे ज्यादा खराब क्या था, कहानी, पटकथा या फिर निर्देशन। वहीं विलेन का किरदार भी बिल्कुल भी असरदार नहीं रहा।

एक अन्य यूजर ने खलीफा को एक भावनाहीन ड्रामा करार देते हुए लिखा कि ज्यादातर मौकों पर फिल्म की मेकिंग औसत दर्ज की लगती है। आलसी लेखन, खराब संवाद और अनुभवहीन अभिनय इसे और कमजोर बनाते हैं। पृथ्वीराज ने अच्छा काम किया, लेकिन उनके कैरेक्टर आर्क में नयापन नहीं था। इंट्रो, इंटरवल और क्लाइमेक्स को छोड़ दें तो फिल्म निराश करती है।

क्लाइमेक्स की तारीफ, पर स्क्रीनप्ले से निराशा

फिल्म को बिलो-एवरेज का टैग देते हुए एक दर्शक ने लिखा कि उनके लिए केवल पृथ्वीराज का स्टाइलिश लुक ही सकारात्मक बिंदु रहा। प्रेडिक्टेबल कहानी और प्रभावहीन फाइट सीक्वेंस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी हैं। इसके साथ ही जेक्स बिजॉय का बैकग्राउंड स्कोर भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

एक अन्य पोस्ट में यूजर ने लिखा कि पुराने ढर्रे की स्क्रिप्ट के कारण फिल्म का अनुभव सामान्य रह गया। केवल हाउस अटैक और जेल फाइट वाले सीन्स ही देखने लायक थे। कैमियो भले ही ठीक थे, लेकिन एक अच्छा निर्देशक भी एक साधारण स्क्रिप्ट से बेहतरीन फिल्म नहीं बना सकता। हालांकि कुछ दर्शकों ने फिल्म के अंत को सराहा। एक यूजर ने लिखा कि यह एक औसतन ठीक फिल्म है, लेकिन इसका एंड-क्रेडिट सीक्वेंस जबरदस्त है। निर्देशक वैशाख ने इसे सिंपल रखने की कोशिश की, लेकिन इस तरह की एक्शन फिल्मों को और अधिक ओवर-द-टॉप ट्रीटमेंट की जरूरत होती है।

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