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Kesar Ghevar Recipe : ब्रज और उसके आसपास रक्षाबंधन पर बहनें घेवर लेकर ही अपने भाई के घर जाती हैं. ये परंपरा सदियों पुरानी है. इस मिठाई के बिना रक्षाबंधन अधूरा माना जाता है, इसलिए भी देशभर में सावन के महीने में इसकी मांग चरम पर होती है. देहरादून में गोयल स्वीट शॉप अपने लजीज घेवर के लिए मशहूर है. लोकल 18 से दुकान मालिक अरुण गोयल बताते हैं कि घेवर दूसरी सभी मिठाइयों से काफी अलग है क्योंकि इसे तैयार करने की विधि बहुत जटिल है. उनके यहां देसी घी और वनस्पति घी दोनों में प्लेन, ड्राईफ्रूट, मलाई और केसर घेवर तैयार किए जाते हैं.
देहरादून. रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों के लिए मिठाइयां जरूर खरीदती हैं, जिससे बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. सावन में त्यौहारों की खुशियों को दोगुना करने वाली सबसे खास मिठाई ‘घेवर’ है. इन दिनों देहरादून के बाजारों में घेवर की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है. शहर में कई दुकानें हैं, लेकिन सहारनपुर चौक स्थित ‘गोयल स्वीट शॉप’ आजादी से पहले की अपनी ऐतिहासिक पहचान और मानसून के मौसम में मिलने वाले लजीज घेवर के लिए बहुत मशहूर है. लोकल 18 से दुकान मालिक अरुण कुमार गोयल बताते हैं कि घेवर दूसरी सभी मिठाइयों से काफी अलग है क्योंकि इसे तैयार करने की विधि बहुत जटिल है. इसे बनाने के लिए कई भट्ठियां जलानी पड़ती हैं और एक कारीगर एक दिन में केवल 12 से 14 किलो मैदे का घेवर ही तैयार कर पाता है. यही वजह है कि त्यौहार के लिए इसका स्टॉक पहले से ही करना पड़ता है. घेवर को नमी से बचाने के लिए पानी के माध्यम से विशेष पैकिंग में रखा जाता है, क्योंकि थोड़ी सी भी नमी इसे खराब कर देती है. यहां देसी घी और वनस्पति घी दोनों में प्लेन, ड्राईफ्रूट, मलाई और केसर घेवर तैयार किए जाते हैं.
सालों पुराना विश्वास
गोयल स्वीट्स के प्रति स्थानीय निवासियों का विश्वास सालों पुराना है. नियमित ग्राहक मुकेश गुप्ता बताते हैं कि वे पिछले तीन दशकों से इस दुकान से मिठाइयां खरीद रहे हैं और यहां का केसर घेवर बेहद लाजवाब होता है. वे रक्षाबंधन के दौरान अक्सर यहां से रसगुल्ले और घेवर लेकर जाते हैं. पुराने कारीगरों के हाथों का स्वाद ही इस पारंपरिक दुकान की सबसे बड़ी खासियत है.
कितने रुपये कीमत
अरुण कुमार गोयल बताते हैं कि घेवर की उत्पत्ति मूल रूप से राजस्थान में हुई थी, लेकिन आज यह पूरे भारत में बड़े चाव के साथ खाया जाता है. सदियों से ब्रज और उसके आसपास के क्षेत्रों में यह परंपरा चली आ रही है कि रक्षाबंधन पर बहनें घेवर लेकर ही अपने भाई के घर जाती हैं. इस मिठाई के बिना रक्षाबंधन अधूरा माना जाता है, इसलिए सावन के महीने में इसकी मांग चरम पर होती है. देहरादून के बाजारों में फीका घेवर, मीठा घेवर, ड्राई फ्रूट्स घेवर और मलाई घेवर मुख्य रूप से बिक्री के लिए उपलब्ध हैं. घेवर की कीमत उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर निर्भर करती है. जहां फीका और सिंपल घेवर सस्ता होता है, पिस्ता, बादाम और मावे से सजा घेवर थोड़ा महंगा बिकता है. लोग मावा और ड्राई फ्रूट्स वाले घेवर को ज्यादा पसंद करते हैं, जो बाजार में 600 से 800 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रहा है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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