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Ghazipur Street Food : गाजीपुर के महुआबाग में इन दिनों इंदौरी अंदाज में तैयार होने वाला फ्राइड राइस और मंचूरियन कॉम्बो लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. लोकल 18 से शेफ रमेश बताते हैं कि इसमें इस्तेमाल होने वाला 95 मसालों का खास मिश्रण इसे बाकी चाइनीज खाने से अलग बनाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इंदौरी तड़का है. सामान्य चाइनीज खाने की तुलना में इसमें ज्यादा मसालेदार, लहसुन वाला और हल्का खट्टा स्वाद मिलता है. तेज आंच पर लोहे की कड़ाही में जब लहसुन, अदरक और हरी मिर्च का तड़का लगता है, तो स्मोकी महक उठती है.

गाजीपुर. भारत के हर शहर का अपना एक स्वाद होता है. इंदौर के हिस्से आया चटपटापन, जो अब गाजीपुर के महुआबाग में लोगों की प्लेटों तक पहुंच रहा है. तेज आंच, 95 मसालों का मिश्रण और देसी तड़के के साथ तैयार होने वाला यह फ्राइड राइस-मंचूरियन कॉम्बो अब शहर की नई फूड पहचान बनता जा रहा है. बड़ी कढ़ाई में तेज आंच पर भुनता लहसुन, उड़ती मसालों की महक और उसके बीच इंदौरी अंदाज में तैयार होता फ्राइड राइस-मंचूरियन कॉम्बो. इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका इंदौरी तड़का है. सामान्य चाइनीज खाने की तुलना में इसमें ज्यादा मसालेदार, लहसुन वाला और हल्का खट्टा स्वाद मिलता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले अच्छी किस्म के बासमती चावल को उबालकर ठंडा किया जाता है, ताकि चावल के दाने अलग-अलग बने रहें. तेज आंच पर लोहे की कड़ाही में जब लहसुन, अदरक और हरी मिर्च का तड़का लगता है, तो स्मोकी महक उठती है.

कुरकुरा टेक्सचर

इसके बाद बड़ी कढ़ाई में तेल गर्म कर उसमें बारीक कटा लहसुन, अदरक और हरी मिर्च को तेज आंच पर भुना जाता है. इसी प्रक्रिया से इसमें धुएंदार खुशबू आती है. फिर पत्तागोभी, गाजर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियां डाली जाती हैं, जिन्हें हल्का कुरकुरा रखा जाता है. इसे बनाने वाले गाजीपुर के रमेश लोकल 18 से बताते हैं कि चावल का हर दाना अलग होना चाहिए, तभी मसालों का मिक्सअप होता है. बासमती के लंबे दानों को पहले उबालकर ठंडा किया जाता है, फिर सब्जियों के साथ उन्हें एक कुरकुरा टेक्सचर दिया जाता है.

छह साल की मेहनत

इस डिश की असली जान है सीक्रेट मसाला. रमेश का दावा है कि उन्होंने करीब 95 मसालों को सहेजकर एक मिश्रण तैयार किया है. यह इंदौर का वह चटोरापन है जिसे गाजीपुर के लोग अब जी भरकर खा रहे हैं. आमतौर पर मिलने वाले चाइनीज में सिरका और सॉस का बोलबाला होता है, लेकिन यहां मसालों की एक पूरी लेयर (परत) है जो हर निवाले के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराती है. रमेश बताते हैं कि उन्होंने इंदौरी अंदाज में चाइनीज खाना बनाना दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में सीखा. वहां करीब छह साल तक अलग-अलग फूड स्टॉल और रसोइयों में काम करते हुए उन्होंने तेज आंच पर बनने वाले चाइनीज व्यंजनों की बारीकियां समझीं. रमेश के मुताबिक, पहाड़गंज में देशभर से आने वाले लोगों की पसंद अलग होती थी.

कॉम्बो का दूसरा नाम 

कड़ाही से निकले गरमा-गरम गोलों को जब सोया सॉस, मिर्च और कॉर्नफ्लोर की उस गाढ़ी, चमकदार तरी में डुबोया जाता है, तो वह एक वेलवेटी फील देता है. लहसुन की तीखी खुशबू और सब्जियों का क्रंच. गाजीपुर के महुआबाग इलाके में स्थित चाट पुचका आउटलेट पर इंदौरी अंदाज में तैयार होने वाला चाइनीज फूड लोगों को आकर्षित कर रहा है. लहसुन की तीखी खुशबू और सब्जियों का क्रंच यही वो जुगलबंदी है जिसके लिए महुआबाग में शाम ढलते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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