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Famous Seb Namkeen Recipe: क्या आपने कभी ऐसी जलेबी देखी है जो मीठी नहीं बल्कि तीखी और मसालेदार होती है? जी हां, समस्तीपुर के ग्रामीण हाट-बाजारों में इन दिनों एक ऐसा अजब-गजब स्नैक धूम मचा रहा है. जो पहली नजर में देखने पर तो रसीली जलेबी जैसी दिखती है, लेकिन जीभ पर जाते ही चटपटी मिर्ची का अहसास कराती है. स्वाद और कुरकुरेपन के मामले में बड़े-बड़े ब्रांड्स के चिप्स और कुरकुरे को भी फेल कर देती है. आज के महंगाई के दौर में भी इसकी कीमत मात्र 1 रुपया है. जानिए समस्तीपुर की इस नमकीन जलेबी की रेसिपी.
हर इलाके की अपनी एक खास खान-पान परंपरा होती है. जो वहां की संस्कृति और जीवनशैली को दर्शाती है. बिहार के समस्तीपुर जिले में भी ऐसा ही एक अनोखा और देसी स्वाद वर्षों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है. यह कोई महंगी डिश नहीं, बल्कि गांवों के साधारण पेठिया (हाट-बाजार) में बिकने वाला खास नाश्ता है. जिसे स्थानीय लोग सेब या झिल्ली के नाम से जानते हैं. नाम सुनकर भले ही फल की याद आए, लेकिन इसका स्वाद और रूप दोनों ही बिल्कुल अलग और खास हैं.
पहली नजर में यह आपको जलेबी जैसा दिखेगा. घुमावदार आकार, हल्का सुनहरा रंग और ताजगी भरी खुशबू. लेकिन जैसे ही आप इसे चखेंगे, आपको तुरंत समझ आ जाएगा कि यह कोई मीठी जलेबी नहीं, बल्कि एक चटपटा और नमकीन स्नैक है. इसकी कुरकुरी बनावट और मसालेदार स्वाद इसे आम नाश्तों से अलग बनाते हैं. यही वजह है कि यह ग्रामीण इलाकों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंद बना हुआ है.
यह व्यंजन कोई नया ट्रेंड नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही एक परंपरा का हिस्सा है. गांवों में लगने वाले साप्ताहिक हाट में लोग इसे खास तौर पर खरीदते हैं और बड़े चाव से खाते हैं. यह केवल एक नाश्ता नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की एक झलक भी है, जो आज भी अपने पुराने स्वाद और तरीके को संजोए हुए है.
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इस खास व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प है. समस्तीपुर के पटोरी क्षेत्र की एक महिला, सुनीता देवी, बताती हैं कि सबसे पहले बेसन को अच्छे से घोला जाता है. इसमें हल्दी, मंगरेला (कलौंजी), काला नमक और अन्य मसाले मिलाए जाते हैं ताकि इसका स्वाद और भी बढ़िया हो जाए. इसके बाद इस मिश्रण को एक सूती कपड़े में भरकर, जलेबी की तरह गरम सरसों तेल में घुमाते हुए डाला जाता है. कुछ ही मिनटों में यह कुरकुरा और सुनहरा बनकर तैयार हो जाता है.
इस देसी सेब की सबसे खास बात है इसकी कीमत. आज के समय में जहां हर चीज महंगी होती जा रही है, वहीं यह स्वादिष्ट नाश्ता केवल 1 से 2 रुपये प्रति पीस में आसानी से मिल जाता है. छोटे-छोटे आकार में बिकने वाला यह स्नैक गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए एक सस्ता और स्वादिष्ट विकल्प है. यही कारण है कि यह हर गांव के पेठिया में आसानी से देखने को मिल जाता है.
चखा है, तो अगली बार जब भी आपको किसी गांव के पेठिया में जाने का मौका मिले, इसे जरूर ट्राय करें. इसका कुरकुरापन, मसालेदार स्वाद और देसी खुशबू आपको ऐसा अनुभव देंगे, जिसे आप लंबे समय तक याद रखेंगे। सच कहें तो यह छोटा सा स्नैक स्वाद के मामले में बड़ा धमाका है,जो एक बार खाने के बाद आपको इसका दीवाना बना देगा.