Idli Batter Tips: घर पर इडली और मेदू वड़ा बनाना जितना आसान लगता है, उतना होता नहीं है. कई बार सारी सामग्री सही होने के बाद भी इडली सख्त बन जाती है या मेदू वड़ा जरूरत से ज्यादा तेल पी लेता है. ऐसे में लोग अक्सर दाल या चावल की क्वालिटी को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि असली फर्क बैटर तैयार करने के तरीके से भी पड़ता है. खासकर उड़द दाल पीसते समय की गई छोटी सी गलती पूरी मेहनत खराब कर सकती है. हाल के दिनों में कई कुकिंग एक्सपर्ट्स ने एक आसान ट्रिक बताई है, जिसे अपनाकर बैटर पहले से ज्यादा हल्का और फूला हुआ बन सकता है. इस ट्रिक में साधारण पानी की जगह ठंडा पानी या थोड़ी सी बर्फ का इस्तेमाल किया जाता है. इससे बैटर का तापमान संतुलित रहता है और इडली व मेदू वड़ा दोनों का टेक्सचर बेहतर बन सकता है.
बैटर पीसते समय क्यों गर्म हो जाता है?
जब उड़द दाल को मिक्सर में पीसा जाता है, तो मिक्सर के ब्लेड बहुत तेज गति से घूमते हैं. लगातार चलने की वजह से जार गर्म होने लगता है. यही गर्मी धीरे-धीरे बैटर तक पहुंच जाती है. अगर बैटर ज्यादा गर्म हो जाए, तो उड़द दाल की प्राकृतिक बनावट पर असर पड़ सकता है. इससे बैटर उतना हल्का नहीं बनता, जितना होना चाहिए. यही कारण है कि बाद में इडली और वड़ा दोनों का रिजल्ट भी अच्छा नहीं आता.
ठंडा पानी या बर्फ क्यों डालते हैं?
कई अनुभवी कुक उड़द दाल पीसते समय थोड़ा-थोड़ा ठंडा पानी या एक-दो छोटे बर्फ के टुकड़े डालते हैं. इससे मिक्सर का तापमान ज्यादा नहीं बढ़ता और बैटर ठंडा बना रहता है. ठंडा बैटर अपनी प्राकृतिक बनावट बनाए रखता है और उसमें हवा भी बेहतर तरीके से मिलती है. यही हवा बाद में इडली को स्पंजी बनाने में मदद करती है.
फर्मेंटेशन पर भी पड़ता है असर
कुछ लोगों का मानना है कि अगर बैटर थोड़ा गर्म हो जाए तो वह जल्दी फूलता है, लेकिन ऐसा हमेशा सही नहीं होता. अगर बैटर जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाए, तो उसके प्राकृतिक गुण बदल सकते हैं. इससे बैटर जरूरत से ज्यादा खट्टा हो सकता है या सही तरीके से फूल नहीं पाता. वहीं संतुलित तापमान पर तैयार किया गया बैटर अच्छी तरह फर्मेंट होता है और स्वाद भी बेहतर रहता है.
स्पंजी इडली का असली राज
अच्छी इडली वही मानी जाती है जो हल्की, मुलायम और स्पंज जैसी हो. ठंडे पानी से तैयार बैटर में ज्यादा हवा बनी रहती है. यही वजह है कि स्टीम होने के बाद इडली ज्यादा फूली हुई और नरम बनती है. खाने पर इसका टेक्सचर भी काफी हल्का महसूस होता है. बच्चे हों या बड़े, ऐसी इडली हर किसी को पसंद आती है.
मेदू वड़ा भी बनेगा ज्यादा बेहतर
यह ट्रिक सिर्फ इडली के लिए ही नहीं बल्कि मेदू वड़ा बनाने में भी काफी मददगार मानी जाती है. अगर बैटर सही गाढ़ापन रखता है, तो वड़ा बाहर से सुनहरा और कुरकुरा बनता है, जबकि अंदर से मुलायम रहता है. अगर बैटर ज्यादा गर्म होकर पतला हो जाए, तो वड़ा तलते समय ज्यादा तेल सोख सकता है. इसलिए बैटर का सही तापमान बनाए रखना जरूरी माना जाता है.
बैटर का रंग भी रहेगा अच्छा
कई बार देखा जाता है कि बैटर पीसने के बाद उसका रंग हल्का पीला या फीका पड़ जाता है. इसकी एक वजह पीसते समय पैदा होने वाली गर्मी भी हो सकती है. अगर ठंडे पानी का इस्तेमाल किया जाए, तो बैटर अपना प्राकृतिक सफेद रंग काफी हद तक बनाए रख सकता है. इससे तैयार इडली भी ज्यादा सफेद और आकर्षक दिखाई देती है.
कैसे पहचानें कि बैटर सही तैयार हुआ है?
अनुभवी लोग बैटर तैयार होने के बाद उसकी एक बूंद पानी में डालकर देखते हैं. अगर वह बूंद पानी की सतह पर तैरने लगे, तो माना जाता है कि बैटर में अच्छी तरह हवा भर गई है और उसकी बनावट सही है. हालांकि यह सिर्फ एक घरेलू तरीका है, लेकिन कई लोग इसे आज भी अपनाते हैं.
इन बातों का भी रखें ध्यान
ठंडे पानी या बर्फ का इस्तेमाल करते समय जरूरत से ज्यादा बर्फ नहीं डालनी चाहिए. उड़द दाल को कम से कम 4 से 6 घंटे अच्छी तरह भिगोना जरूरी है. बैटर तैयार होने के बाद उसे पर्याप्त समय तक ढककर फर्मेंट होने दें. नमक भी सही समय पर मिलाएं. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से इडली और मेदू वड़ा दोनों का स्वाद और टेक्सचर बेहतर हो सकता है.