उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए वोटों की गिनती सोमवार (14 सितंबर) को शुरू हो गई है। शहर के सिविक एडमिनिस्ट्रेशन पर कब्ज़े के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। उदयपुर की सिविक राजनीति में BJP का दबदबा लगभग तीन दशकों से बना हुआ है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस उसकी इस लंबे समय से चली आ रही पकड़ को तोड़ पाती है या नहीं।

सभी 80 वार्डों के लिए 11 सितंबर को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के जरिए वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में 69.77 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो पिछले चुनाव के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत ज़्यादा थी। शहर भर में कुल 410 पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे और लगभग 4.16 लाख वोटर वोट डालने के लिए योग्य थे। यह चुनाव इसलिए भी खास था क्योंकि इसमें 10 नए जोड़े गए वार्डों के वोटरों ने पहली बार अपने वोट का इस्तेमाल किया।

उदयपुर नगर निगम की सीटों के लिए कुल 220 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। नतीजों से ही नए नगर निगम का गठन और उदयपुर की नगर निकाय पर किसका राजनीतिक कब्ज़ा होगा, यह तय होगा। जहां कई वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं कुछ सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार अंतिम नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

2019 के चुनाव में उदयपुर नगर निगम में 70 वार्ड थे। बीजेपी ने 44 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 20 सीटें मिली थीं। निर्दलीय उम्मीदवारों ने पांच सीटें जीतीं और CPI(M) को एक सीट मिली। अब वार्डों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है, इसलिए चुनाव के नतीजों पर सबकी नजर रहेगी कि क्या बीजेपी अपना दबदबा बनाए रख पाती है या कांग्रेस नगर निकाय में अपनी स्थिति मज़बूत कर पाती है।





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