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अगर आप चाय के शौकीन हैं, तो मिर्जापुर की यह खास मलाई चाय आपके दिल को जीत लेगी. कोयले की भट्ठी पर बनी यह चाय न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि इसकी खुशबू ही आपको अपनी ओर खींच लाएगी. आइए जानते है इसकी खासियत और लोकेशन….
चाय का नाम सुनते ही मन उसे पीने को मचल उठता है, और जब वही चाय आग की भट्ठी पर बनी हो तो उसका स्वाद और भी खास हो जाता है. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में एक ऐसी ही मशहूर चाय की दुकान है, जहां भट्ठी पर चाय तैयार की जाती है और उसमें शुद्ध दूध का इस्तेमाल होता है. यही कारण है कि चाय प्रेमियों की यहां हमेशा भीड़ लगी रहती है. दुकान सुबह 8 बजे खुलती है और रात 10 बजे तक चलती है. अगर यह और देर तक खुली रहे, तो शायद यहां भीड़ कभी कम न हो। खास बात यह है कि बेहतरीन क्वालिटी के बावजूद चाय की कीमत भी काफी किफायती है.
मिर्जापुर के पीली कोठी इलाके में स्थित मलाई चाय की यह दुकान जिले भर में अपनी खास पहचान बना चुकी है. यहां की मलाई चाय इतनी मशहूर है कि आसपास के जनपदों से लोग खासतौर पर इसे पीने आते हैं और एक बार स्वाद लेने के बाद बार-बार यहीं खिंचे चले आते हैं. मलाई यादव इस चाय को शुद्ध दूध से तैयार करते हैं और कोयले की भट्ठी पर पकाते हैं. भट्ठी पर धीमी आंच में पकने के बाद चाय का रंग और स्वाद दोनों ही गाढ़ा और लाजवाब हो जाता है, जो इसे और भी खास बना देता है.
चाय बनाने वाले अल्लू यादव बताते हैं कि वे चाय तैयार करने के लिए शुद्ध दूध का इस्तेमाल करते हैं. इसमें चाय पत्ती और अदरक मिलाया जाता है, जबकि इसके अलावा किसी अन्य सामग्री का उपयोग नहीं किया जाता. चाय को अच्छी तरह पकाया जाता है, जिससे उसका स्वाद और भी बेहतरीन हो जाता है. यही वजह है कि जो भी इसे पीता है, वह इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहता.
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अल्लू यादव बताते हैं कि यह दुकान 20 साल से भी ज्यादा पुरानी है. शुरुआत में यहां ग्राहकों की संख्या कम थी, लेकिन बेहतरीन क्वालिटी के चलते अब यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. जो एक बार यहां की चाय पी लेते हैं, वे दोबारा जरूर लौटकर आते हैं. चाहे ऑफिस जाने वाले हों या कामकाजी लोग, दिन में दो बार चाय पीना उनकी आदत बन चुकी है. खासकर सुबह और शाम के समय यहां ग्राहकों की जबरदस्त भीड़ उमड़ती है.
अल्लू यादव बताते हैं कि उनकी चाय औसत दर पर बेची जाती है. यहां छोटी चाय 10 रुपये और बड़ी चाय 20 रुपये में मिलती है. खास बात यह है कि दोनों ही कपों में पुरवा का साइज अच्छा रहता है, जिससे चाय पीने के बाद मन भर जाता है. एक कप चाय से ही थकान दूर हो जाती है और ताजगी लौट आती है.
ग्राहक गगन उपाध्याय बताते हैं कि वे पिछले करीब 10 साल से यहां की मलाई चाय पी रहे हैं. जब भी इस इलाके में आते हैं, चाय पीना नहीं भूलते. उनका कहना है कि इस चाय की खासियत यह है कि एक बार पीने के बाद मन और भी पीने को करता है. भट्ठी पर तैयार होने की वजह से इसका स्वाद और बढ़ जाता है. खास बात यह भी है कि इतने सालों में चाय की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जो इसे और भी खास बनाती है.
नीरज कुमार बताते हैं कि फील्ड में काम करने के बाद वे यहां जरूर आते हैं. उनका कहना है कि मलाई चाय पीने के बाद दिनभर की थकान पूरी तरह खत्म हो जाती है. शाम को चाय पीकर वे ताजगी के साथ घर लौटते हैं. उनके अनुसार, इस तरह की मलाई चाय पूरे शहर में कहीं और नहीं मिलती और यही वजह है कि यह चाय जिले भर में मशहूर है.
अगर आप भी चाय के शौकीन हैं और मिर्जापुर जिले में आ रहे हैं, तो रोडवेज के पास स्थित मलाई चाय का स्वाद जरूर लें. यहां देसी अंदाज में तांबे और पीतल के बर्तनों में चाय तैयार की जाती है. एक बार चाय पीने के बाद आप भी इसकी तारीफ किए बिना खुद को रोक नहीं पाएंगे.