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Wild Banana in Telangana: तेलंगाना के घने जंगलों में उगने वाला असली जंगली केला आधुनिक मीठे और बीज-मुक्त केलों से पूरी तरह अलग होता है. इस प्राकृतिक फल का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा केवल कंकड़ जैसे सख्त और बड़े काले बीजों से भरा होता है, जिसके कारण इसे सीधे खाना असंभव है. हज़ारों साल पहले किसानों ने संकरण और चयन के ज़रिए आज के कैवेंडिश केले को विकसित किया है. आज भी ये जंगली केले कृषि वैज्ञानिकों के लिए आधुनिक फसलों को गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
Telangana: केला दुनिया भर में सबसे ज़्यादा खाया जाने वाला और आसानी से मिलने वाला फल है. हम सभी बाज़ार से जो केला लाते हैं वह छीलते ही बेहद मुलायम, मीठा और बिना बीज का निकलता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर केले का छिलका उतारते ही अंदर गूदे की जगह कंकड़ जैसे सख्त और बड़े काले बीज निकल आएं तो कैसा लगेगा. तेलंगाना के घने जंगलों में उगने वाला जंगली केला असल में ऐसा ही होता है. यह आज के केले का वह असली और कुदरती रूप है जिससे हज़ारों साल पहले हमारे खाने वाले केले का जन्म हुआ था.
वैज्ञानिक नजरिए से कुदरती जंगलों में पाए जाने वाले केले की प्रजातियों, जैसे मूसा एक्यूमिनाटा और मूसा बाल्बिसियाना में फल का 70 से 80 फीसदी हिस्सा सिर्फ और सिर्फ सख्त बीजों से भरा होता है. इसके अंदर खाने लायक मीठा गूदा बहुत कम मात्रा में चिपका रहता है. ये काले बीज इतने कड़े और नुकीले होते हैं कि अगर कोई इन्हें फल की तरह सीधे चबाने की कोशिश करे, तो दांत टूट सकते हैं. इसलिए जंगलों में रहने वाले लोग या तो इसके बीजों को छानकर गूदा अलग करते हैं या फिर इसके तने और फूलों की सब्ज़ी बनाकर खाते हैं.
बाज़ारू और जंगली केले में मुख्य अंतर
आम बाज़ारू केले में सिर्फ बारीक काले रेशे या बिंदु दिखते हैं जबकि जंगली केले में मटर के दाने जितने बड़े और कठोर बीज भरे होते हैं. आम केला बिना बीज के क्लोनिंग यानी तने की जड़ों से उगाया जाता है. वहीं जंगली केला अपने बीजों के ज़रिए कुदरती रूप से जंगलों में फैलता है. आज हम जो केला खाते हैं वह पार्थेनोकार्पी प्रक्रिया से पैदा होता है जिसमें बिना परागण के ही फल तैयार हो जाता है और बीज नहीं बनते हैं.
केले के इतिहास का दिलचस्प सच
हज़ारों साल पहले किसानों ने कुदरती बदलाव वाली ऐसी किस्मों को छांटकर उगाया, जिनमें बीज कम थे. सदियों की मेहनत के बाद आज का मीठा कैवेंडिश केला तैयार हुआ है. आज भी वैज्ञानिक केले की फसलों को खतरनाक फंगस और बीमारियों से बचाने के लिए इन जंगली केलों के डीएनए का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इनमें बीमारियों से लड़ने की ज़बरदस्त ताकत होती है. प्रकृति का यह अनोखा रूप आज भी जंगलों की जैव विविधता को जीवित रखे हुए है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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