बिहार में दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा के रिजल्ट में 79 कतारों में 301 अभ्यर्थी के क्रमवार पास होने का पैटर्न किसी गड़बड़ी की तरफ संकेत करता है। इसलिए इसकी जांच कर रही ईओयू ने भी परीक्षा लेने वाले आयोग से भी इस संबंध में जवाब देने को कहा है। ईओयू ने आयोग से पूछा है कि आखिर सैकड़ों अभ्यर्थी क्रमवार कैसे पास हो गए? रिमाइंडर भेजने के बावजूद आयोग ने ईओयू को अभी तक जवाब नहीं दिया है। कहा जा रहा है कि अभी जवाब तैयार किया जा रहा है। 

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा 1799 पदों पर आयोजित दारोगा मुख्य परीक्षा का आधिकारिक परिणाम देखने पर पता चलता है कि परीक्षा केंद्रों के अलग-अलग कमरों और कतारों में क्रमवार बैठे करीब 301 अभ्यर्थी लगातार पास घोषित हुए हैं। आयोग की 68 पेज की रिजल्ट शीट में 79 स्थानों पर लगातार अभ्यर्थियों के पास होने की कतारें मिली हैं। अभ्यर्थियों ने मुख्य सचिव और EOU को ज्ञापन सौंपकर ‘हॉल मैनेजमेंट’ और मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

19 जून को जारी हुआ था रिजल्ट

मुख्य परीक्षा में शामिल 34,298 अभ्यर्थियों में से शारीरिक दक्षता परीक्ष के लिए 10,759 का चयन किया गया। 19 जून को रिजल्ट जारी हुआ था। परिणाम के आंकड़ों और पुलिस की दर्ज एफआईआर में बड़ा विरोधाभास है। आयोग का दावा है कि कदाचार के कारण केवल 2 को अयोग्य किया गया। जबकि गया के रामपुर थाने में परीक्षा के दिन ही एक संगठित सॉल्वर सिंडिकेट की एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें परीक्षा हॉल से ब्लूटूथ व वॉकी-टॉकी के जरिए जुड़े अभ्यर्थी मुकेश कुमार, सॉल्वर आशुतोष, अर्जुन, बिचौलिया अमन और 17 से अधिक लोगों की नामजद संलिप्तता दर्ज है। 1 जून को पूर्णिया में भी एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बावजूद आयोग ने परिणाम बनाते समय इन संदिग्ध रोल नंबरों को फिल्टर नहीं किया।

सैकड़ों अभ्यार्थियों ने आरटीआई के तहत अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी और उत्तर-कुंजी मांगी, जिसे आयोग प्रक्रियाधीन बताकर टाल रहा है। यह हाईकोर्ट के उस आदेश का अवहेलना है, जिसमें अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट और मॉडल उत्तर-कुंजी देखने का अधिकार दिया गया था। आयोग की 68 पेज की रिजल्ट शीट में 79 स्थानों पर लगातार अभ्यर्थियों के पास होने की कतारें मिली हैं।

 सॉल्वर गैंग और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए धांधली का खुलासा

दारोगा बहाली परीक्षा के दिन (27 मई) ही गया में वॉकी-टॉकी, सॉल्वर गैंग और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए धांधली का आधिकारिक खुलासा हो चुका था। 1 जून को पूर्णिया से भी प्रश्न-पत्र बाहर भेजने का मामला दर्ज हुआ। लेकिन रिजल्ट पब्लिश करते  समय इन संदिग्धों को बाहर क्यों नहीं किया गया? ईओयू को जवाब न देना और हाईकोर्ट के 2018 के आदेश के बावजूद अभ्यर्थियों को ओएमआर व मॉडल आंसर-की न देने को लेकर भी छात्र सवाल उठा रहे हैं। 

इसके अलावा परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट के सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण भी अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों के पास सोशल मीडिया पर वायरल ऐसी कई तस्वीरें हैं जिसे EOU और आयोग को उपलब्ध कराया गया है। तस्वीरों में OMR शीट की फोटो भी दिख रही है। परीक्षा हॉल के साथ साथ केंद्र के बाहर किसी पाइप के साथ तस्वीरें हैं। किसी फोटो में (OMR के साथ फोटो) छात्र ने अंगूठी पहन रखी है। आखिर जहां मोबाइल प्रतिबंधित है वहां परीक्षा केंद्र से इतने फोटो बाहर कैसे आये, परीक्षा केंद्र के बाहर क्वेश्चन पेपर, OMR कैसे आया? एक तस्वीर में जिस छात्र का रोल नंबर दिख रहा है, सफल अभयर्थियों की लिस्ट में उसका नाम भी है। 

शातिरों को नकल करते हुए किया गया था गिरफ्तार

इस प्रकरण में गयाजी के रामपुर स्थित गया कॉलेज के पास पुलिस ने सॉल्वर गैंग के शातिर को नकल कराते हुए गिरफ्तार किया था। छात्रों के अनुसार पूरे बिहार के 59 परीक्षा केंद्रों में से इसी सेंटर से सबसे अधिक 471 कैंडिडेट पास हुए हैं। विवादों में पूर्णिया का राजकीय कन्या उच्च विद्यालय भी है। इस परीक्षा केंद्र से 113 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। 27 मई को जिन दो केंद्रों पर वॉकी-टॉकी, सॉल्वर सिंडिकेट और प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर वायरल करने की नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई  थी, आयोग के रिजल्ट में उन्हीं दोनों – केंद्रों से कुल 584 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।

गयाजी के रामपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, परीक्षा के दौरान गया कॉलेज के पास रामपुर शिव मंदिर से नालंदा निवासी सॉल्वर आशुतोष कुमार को पुलिस ने दबोचा था। उसके पास से वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और ईयरफोन मिले थे। जांच में खुलासा हुआ कि वह ‘xyz’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप (जिसमें 11 संदिग्ध नंबर जुड़े थे) से उत्तर लेकर गया कॉलेज के भीतर बैठे अभ्यर्थी मुकेश कुमार (रोल नंबर 111301… सीरीज) को वॉकी-टॉकी से प्रश्न हल करवा रहा था। इस संगठित गिरोह की गिरफ्तारी के बावजूद आयोग ने इस केंद्र का रिजल्ट होल्ड नहीं किया। आवंटित 1,440 परीक्षार्थियों में से रिकॉर्ड 471 पास घोषित हुए और इस केंद्र की सफलता दर 32.71% रही। जबकि राज्य का औसत पास प्रतिशत 31.37 है।

प्रश्नपत्र सोशल मीडिया में वायरल

पूर्णिया साइबर थाने की प्राथमिकी के मुताबिक, केहट स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय के कमरा नंबर 23 में तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने अनुपस्थित छात्रों की प्रश्न पुस्तिका संख्या 22532773 और 22532780 की तस्वीरें अपने मोबाइल में खींचीं। इसके बाद मोबाइल अपने ममेरे भाई पप्पू कुमार को सौंप दिया, जिससे प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुलिस ने वीक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सवाल यह है कि जिस केंद्र और जिस कमरे से पर्चे की गोपनीयता भंग हुई, वहां के परिणाम को होल्ड करने के बजाय आयोग ने सामान्य रूप से जारी कर दिया। यहां 439 में से 113 परीक्षार्थी पास हो गए (सफलता दर 25.7%)

दारोगा परीक्षा बहाली में कथित गड़बड़ियों को जांच के क्रम में आर्थिक अपराध इकाई (EoU) को एसआईटी ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इंओयू ने परीक्षार्थियों के अनुपात में सर्वाधिक रिजाल्ट देने वाले टॉप 20 परीक्षा केंद्रों की सूची तलब की है। साथ ही ऐसे शीर्ष 20 परीक्षा केंद्रों से संबंधित ब्योरा भी मांगा है, जहां के क्रमवार रोल नम्बर के अधिक विद्यार्थी सफल हुए हैं। ईओयू ने बीपीएसएससी को तीन और आठ सितंबर को दो पत्र लिखे हैं। आयोग अब जवाब तैयार कर रहा है। इंओयू एसआईटी ने आयोग से शिकायत वाले परीक्षा केंद्रों के वीडियो फुटेज भी मांग हैं। इनमें पूर्णिया के साइबर थाना और गया जी के रामपुर थाना में दर्ज एफआईआर से संबंधित परीक्षा केंद्र के साथ ही छात्रों की आपत्ति वाले परीक्षा केंद्र भी शामिल हैं।

परीक्षा माफिया के संबंधों की हो रही तलाश

सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र लीक से संबंधित कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, पूर्णिया में एक शिक्षक द्वारा वाट्सअप से पटना भेजी गयी प्रश्न पत्र की कॉपी और गया जी में परीक्षा के दौरान मिले डिजिटल प्रमाणों के आधार पर परीक्षा माफिया के संबंधों की तलाश की जा रही है।

  1.  छात्रों ने जो प्रमाण अपने स्तर से जुटाये हैं उसके एक एक प्रमाण पर छात्रों से बातचीत -कागज़ को दिखाते हुए (PDF भी इस छात्र ने दिया है.., इसको अलग से भी देखें)
  2.  प्रदर्शन में आये छात्रों से बातचीत 
  3. आज के प्रदर्शन में दरभंगा के छात्र रोहन कुमार के माता पिता और भाई भी आये थे. रोहन ने भी दारोगा भर्ती की परीक्षा दी थी लेकिन परीक्षा में धांधली की खबरों के सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली थी.. आत्महत्या करने वाले छात्र की माँ और भाई से बातचीत 
  4.  रिजल्ट का PDF जिसमें कई पेज में क्रमवार पास अभ्यर्थी का रिजल्ट दिखता है

दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा के रिजल्ट में पेज नंबर 30, 41 और 57 पर लगातार सात परीक्षार्थी (क्रमवार ) सफल दिख रहे हैं। पेज नंबर 10, 29, 43, 57 और 62 पर लगातार 6 छात्र सफल दिख रहे हैं। 


पेज नंबर 9, 13, 23, 24, 33, 41, 50 और 56 पर लगातार पांच छात्र सफल दिख रहे हैं।

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