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हाल ही में अमूल, सांची और मदर डेयरी ने अपने दामों में इजाफा किया है. ऐसे में आम आदमी के जेब पर सीधा असर पड़ रहा है. खास तौर से किचन पर, जहां पर दूध का इस्तेमाल होता है. लेकिन बढ़ती महंगाई के बीच दूध के दामों में इजाफा क्यों हुआ? दूध के दामों के इजाफे से किसानों कितना फायदा होगा. आइये जानते हैं….

बालाघाट. बीते कुछ दिनों में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस सहित दूध के दामों में इजाफा हुआ है. ऐसे में आम आदमी की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. खास तौर से किचन पर, जहां पर दूध का इस्तेमाल होता है. हाल ही में अमूल, सांची और मदर डेयरी ने अपने दामों में इजाफा किया है. लेकिन बढ़ती महंगाई के बीच दूध के दामों में इजाफा क्यों हुआ? दूध के दामों के इजाफे से किसानों कितना फायदा होगा. जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

अमूल ने जैसे ही अपने दूध की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने का ऐलान किया. इसके ठीक बाद मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में इजाफा कर दिया. अमूल स्टैंडर्ड मिल्क, भैंस का दूध, गोल्ड, स्लिम एंड ट्रिम, टी-स्पेशल, ताजा और गाय का दूध शामिल हैं. वहीं, सांची ने 15 मई से भी दो रुपए प्रति लीटर महंगा कर दिया. अब सांची ने दूध की कीमत बढ़ाने के निर्णय लिए हैं. फुल क्रीम गोल्ड दूध पहले 67 रुपए लीटर थे. अब वह 70 रुपए लीटर हो गया. वहीं, आधा लीटर अब 35 रुपए में मिलेगा. चाह दूध अब 62 रुपए लीटर मिलेगा. टोंड दूध आधा लीटर 29 में, स्टैंडर्ड दूध आधा लीटर 32 में और डबल टोंड दूध 27 रुपए में आधा लीटर मिलेगा.

आखिर गर्मियों में ही क्यों बढ़ते हैं दाम
अक्सर एक पैटर्न देखा गया है कि आमतौर पर गर्मियों के सीजन में ही दूध के दामों में वृद्धि देखी गई है. ऐसे में दूध के दामों के बढ़ने की क्या वजह है? ये जानने के लिए लोकल 18 ने सांची दुग्ध संघ की रीजनल मैनेजर माधुरी सोनेकर से बातचीत की. उन्होंने बताया कि गर्मियों के दिनों में ट्रांसपोर्ट से लेकर भंडारण में दूध की लागत बढ़ जाती है.

गर्मियों में दूध उत्पादन कम होता है और ठंड में उत्पादन ज्यादा होता है. गर्मियों में परिवहन में लागत दोगुनी हो जाती है. ठंड में चिलिंग प्रोसेस सिर्फ दो बार होती है. वहीं, गर्मियों में यह प्रोसेस चार बार होती है. इसके अलावा प्रोसेस किए दूध को भी जल्दी ट्रांसपोर्ट करना होता है. ऐसे में गर्मियों के दिनों में दूध की कीमत बढ़ाई जाती है.

किसान को कितना मुनाफा
ठंड और बारिश में पशुपालक को हरे चारे के लिए अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती है. लेकिन गर्मियों में पशुओं के चारे के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. वहीं, गर्मियों में पशु बार-बार बीमार भी पड़ते हैं. इससे उनके इलाज पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है और उत्पादन भी कम हो जाता है. ऐसे में पशुपालक भी चाहते हैं कि उन्हें दूध की कीमतें बढ़ाकर मिले. गर्मियों में दुधारू पशु पर औसतन 200 से 250 रुपए तक खर्च होता है. फिर उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत तक गिरावट आती है. दुग्ध संघ का मूल उद्देश्य किसान या पशुपालक को लाभ पहुंचाना होता है. ऐसे में दुग्ध संघ भी पशुपालक के हित में सोचकर दूध की कीमतें बढ़ाते हैं.

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Mohd Majid

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