Last Updated:

Dal Baati Recipe: बारिश के मौसम में देसी कंडों (उपलों) की धीमी आंच पर सिकी राजस्थानी बाटी का स्वाद अलग ही आनंद देता है. पारंपरिक तरीके से बनाई गई बाटी बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम होती है. इसके लिए गेहूं के आटे में घी, नमक और आवश्यक सामग्री मिलाकर बाटियां तैयार की जाती हैं, जिन्हें धीमी आंच पर कंडों के बीच सेंका जाता है. पकने के बाद इन्हें घी में डुबोकर दाल, चूरमा, लहसुन की चटनी और हरी मिर्च के साथ परोसा जाता है. यह पारंपरिक व्यंजन मानसून में परिवार और मेहमानों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बन जाता है.

ख़बरें फटाफट

भीलवाड़ा: बरसात का मौसम शुरू होते ही हर कोई व्यक्ति यही चाहता है कि वह सबसे स्वादिष्ट और लाजवाब देसी खाने का स्वाद ले. ऐसे में चाहे भीलवाड़ा शहर हो या फिर भीलवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्र यहां पर हर जगह देसी अंदाज में बाटी तैयार की जाती हैं. इस बाटी का स्वाद ऐसा होता है कि चाहे दाल बाटी हो या फिर नॉनवेज बाती हो. यह बाटी सब्जी का स्वाद और ज्यादा बड़ा देता है. खास बात यह है कि जब बाटी गैस या ओवन की बजाय गोबर के कंडों की धीमी आंच पर पकाई जाती है, तो उसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.

यही वजह है कि आज भी ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरों में भी लोग कंडों पर बनी बाटी खाना पसंद करते हैं. कंडों की धीमी और बराबर आंच में बाटी बाहर से सुनहरी और कुरकुरी बनती है, जबकि अंदर से पूरी तरह नरम और स्वादिष्ट रहती है. इसमें हल्की-सी धुएं की खुशबू भी आ जाती है, जो इसके स्वाद को और खास बना देती है. कई लोग मानते हैं कि कंडों पर बनी बाटी का स्वाद गैस पर बनी बाटी से बिल्कुल अलग होता है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. कई होटल, ढाबे और ग्रामीण पर्यटन स्थलों पर भी खास तौर पर कंडों पर सिकी दाल-बाटी तैयार की जाती है, ताकि लोगों को असली राजस्थानी स्वाद मिल सके. बाहर से आने वाले पर्यटक भी इस पारंपरिक व्यंजन का भरपूर आनंद लेते हैं. बारिश के मौसम में परिवार और दोस्तों के साथ खुले स्थान या खेत पर दाल-बाटी बनाने का अलग ही आनंद होता है.

दाल बाटी खाना काफी लोग पसंद करते
भीलवाड़ा के राधे कृष्णा कॉलोनी के रहने वाली पूजा कुमारी सांखला ने बताया कि बारिश किस सीजन में दाल बाटी खाना काफी लोग पसंद करते हैं. इसके अलावा यह एक व्यंजन है जो पूरे साल भर घर पर बनाया जाता है लेकिन बारिश में इसका स्वाद अलग ही हो जाता है. बाटी बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे में थोड़ा सूजी, नमक, अजवाइन और 4–5 चम्मच देसी घी मिलाकर सख्त आटा गूंथ लें. चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ा-सा बेकिंग सोडा भी डाल सकते हैं. आटे को 15–20 मिनट ढककर रख दें, ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए. इसके बाद आटे की मध्यम आकार की गोल-गोल बाटियां बना लें. दूसरी ओर खुले स्थान पर गोबर के कंडों में आग लगाकर अंगारे तैयार करें. जब कंडे अच्छी तरह जल जाएं और उनमें तेज लौ की जगह धीमी आंच रह जाए, तब बाटियों को अंगारों के बीच रख दें और ऊपर से भी कुछ गर्म कंडे ढक दें.

गर्मागर्म बाटियों को शुद्ध देसी घी में डुबो दें
बाटियों को बीच-बीच में पलटते रहें ताकि वे चारों तरफ से समान रूप से सिक जाएं. लगभग 25 से 35 मिनट में बाटियां सुनहरी और कुरकुरी हो जाती हैं. पकने के बाद हल्का दबाकर देखें. यदि अंदर तक अच्छी तरह सिक गई हों, तो उन्हें निकाल लें. अब गर्मागर्म बाटियों को शुद्ध देसी घी में डुबो दें या ऊपर से भरपूर घी डालें. इन्हें पंचमेल दाल, लहसुन की चटनी, हरी मिर्च, प्याज और चूरमे के साथ परोसें. कंडों पर बनी बाटी में हल्की धुएं की खुशबू आती है, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देती है.

About the Author

Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…

और पढ़ें



Source link

Write A Comment