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परात में सजा स्वाद का पहाड़! दुनियाभर में मशहूर बीकानेर की भुजिया का ऐसा जलवा

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Rajasthan Famous Food: बीकानेर की भुजिया सिर्फ एक नमकीन नहीं, बल्कि राजस्थान की पहचान और स्वाद की विरासत है. बेसन, मोठ दाल और पारंपरिक मसालों से तैयार होने वाली यह खास भुजिया आज देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना चुकी है. बीकानेर की कई दुकानों पर आज भी भुजिया बड़ी परातों में सजाकर बेची जाती है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है. इसकी कुरकुरी बनावट, मसालों का संतुलित स्वाद और पारंपरिक बनाने की विधि इसे अन्य नमकीनों से अलग बनाती है. बीकानेर आने वाला लगभग हर पर्यटक इस प्रसिद्ध भुजिया का स्वाद जरूर चखता है और इसे अपने साथ यादगार के रूप में भी ले जाता है. यही वजह है कि बीकानेरी भुजिया को राजस्थान की सबसे लोकप्रिय फूड पहचान माना जाता है.

बीकानेर के पुराने बाजारों में ऐसी विशाल परातें हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं. तस्वीर में दिखाई दे रही परात भुजिया केवल नमकीन नहीं, बल्कि बीकानेर की पहचान है. दुकान पर सुबह तैयार होने वाली यह भुजिया शाम तक लगभग पूरी बिक जाती है. कुरकुरी बनावट और हल्के मसालों का संतुलन इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंद बनाता है. इसकी पैकिंग इतनी मजबूत होती है कि इसे देश-विदेश तक आसानी से भेजा जा सकता है. यही कारण है कि बीकानेरी भुजिया का कारोबार हर साल हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. परात में केक जैसी सजावट इस नमकीन की खास पहचान बन चुकी है. कुरकुरी बनावट और हल्के मसालों का संतुलन इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंद बनाता है.

इस तस्वीर में बीकानेर की मोटी भुजिया दिखाई दे रही है, जिसे कई लोग तीन नंबर भुजिया या बड़ी भुजिया के नाम से भी जानते हैं. सामान्य बारीक भुजिया की तुलना में इसका आकार बड़ा होता है और इसका स्वाद भी अलग अंदाज का होता है. इसे चाय के साथ खाने के अलावा सब्जियों और कई व्यंजनों में भी इस्तेमाल किया जाता है. पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाली यह भुजिया ताजगी और कुरकुरेपन के लिए प्रसिद्ध है. बीकानेर के पुराने बाजारों में आज भी इसे हाथों-हाथ खरीदा जाता है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी इसकी खास पैकिंग करवाकर अपने शहर ले जाते हैं. यही वजह है कि बीकानेर की भुजिया ने विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाई है.

परात में सजी यह बारीक बीकानेरी भुजिया शहर की सबसे लोकप्रिय नमकीनों में से एक है. इसे तैयार करने के लिए मोठ, बेसन और खास मसालों का उपयोग किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों अलग पहचान बनाते हैं. बीकानेर के कारीगर वर्षों पुराने पारंपरिक तरीके से इसे बनाते हैं, जिससे हर बैच में वही पुराना स्वाद बरकरार रहता है. यही वजह है कि यह नमकीन देश के हर कोने में पसंद की जाती है. त्योहारों, शादी-ब्याह और मेहमाननवाजी में भी इसकी मांग सबसे ज्यादा रहती है. बीकानेर आने वाले पर्यटक अक्सर इस भुजिया को शहर की सबसे यादगार सौगात मानकर अपने साथ ले जाते हैं.

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बीकानेर के पुराने बाजारों में सुबह से ही भुजिया खरीदने वालों की भीड़ लग जाती है. तस्वीर में परात में सजी ताजा भुजिया ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करती नजर आ रही है. दुकानदारों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली भुजिया की बिक्री रोजाना कई क्विंटल तक पहुंच जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक कुरकुरी बनी रहती है और सफर के दौरान भी खराब नहीं होती. इसलिए देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों में रहने वाले लोग भी इसे बड़े चाव से मंगवाते हैं. बीकानेर की पहचान बन चुकी यह भुजिया आज स्थानीय उद्योग और रोजगार का भी बड़ा आधार है.

बीकानेर की प्रसिद्ध परात भुजिया की परंपरा को दर्शाती है. बड़े लोहे की परात में पहाड़ की तरह सजाई गई यह भुजिया ग्राहकों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है. बीकानेर के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं और पारंपरिक तरीके से स्वाद को बरकरार रखते हैं. बारीक, कुरकुरी और हल्के मसालों वाली यह भुजिया हर उम्र के लोगों की पसंद है. इसकी विशेष पैकिंग के कारण इसे आसानी से लंबी दूरी तक भेजा जा सकता है. आज बीकानेरी भुजिया केवल एक नमकीन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन चुकी है. देश-विदेश में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और यही स्वाद बीकानेर को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाता है.

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