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शहर में स्वाद के कई ठिकाने हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि संघर्ष, हुनर और विरासत का स्वाद भी साथ लेकर आती हैं. ऐसी ही एक कहानी है जॉर्ज की, जिनके हाथों में ऐसा जादू है कि उनके बनाए चिकन या मटन का स्वाद लोगों को दूर-दूर से खींच लाता है. जॉर्ज आज गोरखपुर के अल्युमिनियम फैक्ट्री इलाके में अपना रेस्टोरेंट चलाते हैं, लेकिन उनकी शुरुआत बेहद साधारण रही. उन्होंने अपने सफर की शुरुआत एक छोटे से ठेले पर अंडा बेचने से की थी.
गोरखपुरः शहर में स्वाद के कई ठिकाने हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि संघर्ष, हुनर और विरासत का स्वाद भी साथ लेकर आती हैं. ऐसी ही एक कहानी है जॉर्ज की, जिनके हाथों में ऐसा जादू है कि उनके बनाए चिकन या मटन का स्वाद लोगों को दूर-दूर से खींच लाता है.
जॉर्ज आज गोरखपुर के अल्युमिनियम फैक्ट्री इलाके में अपना रेस्टोरेंट चलाते हैं, लेकिन उनकी शुरुआत बेहद साधारण रही. उन्होंने अपने सफर की शुरुआत एक छोटे से ठेले पर अंडा बेचने से की थी. सीमित संसाधनों के बावजूद उनके अंदर खाना बनाने का जुनून और कुछ अलग करने की चाह थी, जिसने धीरे-धीरे उन्हें पहचान दिलाई.
पिता से सीखा नॉनवेज बनाना
जॉर्ज के इस हुनर की जड़ें उनके परिवार से जुड़ी हैं. उनके पिता एक कुशल बावर्ची थे, जिनसे उन्होंने नॉनवेज पकाने के खास तरीके और मसालों का सही इस्तेमाल सीखा, आज भी जॉर्ज अपने पिता की उसी पारंपरिक शैली को अपने कुकिंग में अपनाते हैं, जो उनके खाने को खास बनाती है.
जॉर्ज के मेन्यू में मटन और चिकन के कई लाजवाब व्यंजन शामिल हैं, लेकिन उनकी खासियत है ‘मटन दो प्याजा’ और ‘मटन मसाला’, इन व्यंजनों को वह गैस पर नहीं बल्कि लकड़ी और कोयले की आंच पर पकाते हैं, जिससे उनमें एक अलग ही स्मोकी फ्लेवर आता है. यही वजह है कि उनके खाने का स्वाद बाकी जगहों से बिल्कुल अलग महसूस होता है.
चिकन पुलाव का टेस्टर शानदार
हाल ही में जॉर्ज ने अपनी बिरयानी में भी एक नया ट्विस्ट जोड़ा है. हालांकि वह इसे बिरयानी नहीं बल्कि पुराने जमाने का ‘चिकन पुलाव’ कहना पसंद करते हैं. इस डिश में वह अपने खास मसालों का इस्तेमाल करते हैं, जिसे वह खुद अपने हाथों से तैयार करते हैं. यही वजह है कि उनकी यह डिश ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. जॉर्ज के यहां खाने की कीमतें भी आम लोगों की पहुंच में हैं. यहां 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में स्वादिष्ट व्यंजन मिल जाते हैं. यही कारण है कि उनके रेस्टोरेंट पर रोजाना ऐसे ग्राहक पहुंचते हैं, जो कई किलोमीटर दूर से सिर्फ उनके हाथों का जायका चखने आते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें