Last Updated:

Maida Health Risk: इसमें कोई दोराय नहीं कि मैदे को सफेद जहर कहा जा सकता है. क्योंकि ज्यादा मात्रा में खाने पर यह मोटापा, डायबिटीज, पाचन संबंधी समस्याओं और दिल की बीमारियों जैसी दिक्कतों से जुड़ा होता है. डॉक्टर बताते हैं कि ये असल में जहर नहीं है, लेकिन ज्यादा मात्रा में इसका सेवन जानलेवा बीमारियों के जोखिम को बढ़ता है. इसलिए इसका सेवन संभलकर करना जरूरी है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

मैदा कई घर के खाने में इस्तेमाल होने वाली सबसे आम चीजों में से एक है, जैसे ब्रेड, बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, पिज्जा, नूडल्स, समोसे और कई तरह के पैक्ड स्नैक्स. इससे बनी खाने की चीजें मुलायम बनती है और साथ ही ये फूड्स जल्दी खराब भी नहीं होते. यही कारण है कि फूड इंडस्ट्री में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. लेकिन सेहत के लिहाज से देखा जाए तो ज्यादा मैदा खाना हानिकारक होता है.

सेक्टर-88 में स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर डायरेक्टर डॉ. जयंत ठाकुरिया बताते हैं कि मैदा कोई जहरीली चीज नहीं है, लेकिन रिफाइंड आटे से बनी चीजें खाने से लाइफस्टाइल से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है. ऐसे में जरूरी है कि रिफाइंड गेहूं का आटा या मैदा से बने फूड प्रोडक्ट का सेवन कम करें.

कैसे बनता है मैदा?
एक्सपर्ट बताते हैं कि मैदा के इस्तेमाल से सबसे बड़ा खतरा इसके रिफाइंड होने के तरीके से जुड़ा है. रिफाइनिंग की प्रक्रिया में गेहूं के दाने के बाहरी हिस्से अंकुर को हटा दिया जाता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि दाने के इस हिस्से में काफी मात्रा में नुट्रिएंट्स होते हैं, जैसे फाइबर, विटामिन, मिनरल और हेल्दी फैट. इसके बाद जो बचता है, वह ज्यादातर स्टार्च होता है. इसका मतलब है कि मैदा बस पेट भरने का एहसास देता है, लेकिन इसमें इंसानी शरीर के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स नहीं होते

क्यों माना जाता है सफेद जहर?
मैदा कोई ऐसा जहर नहीं है जिसके खाने से कोई व्यक्ति तुरंत मर जाए. बल्कि ये आपके शरीर को जानलेवा बीमारियों की चपेट में धकेलने का काम करता है. एक और बात जो मैदा को सेहत के लिए नुकसानदायक बनाती है, वह है इसका तेजी से पचना. इसे खाने के बाद ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ जाता है. ऐसे में लंबे समय में इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज हो सकती है, खासकर उन लोगों में जिन्हें मोटापा, कसरत की कमी या डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री के कारण पहले से ही इन बीमारियों का खतरा होता है.

इन बातों का भी ध्यान रखना जरूरी
मैदा में फाइबर भी कम होता है. फाइबर डाइजेस्टिव सिस्टम में खाने को आगे बढ़ाने में मदद करता है. मैदा में लगभग कोई फाइबर नहीं होता, इसलिए इसे खाने से कब्ज की वजह से परेशानी हो सकती है. मैदा से बनी चीजें खाने के कुछ ही देर बाद कई लोगों को भूख लगने लगती है, जिससे ओवरईटिंग का खतरा बढ़ जाता है और फिर मोटापा. इतना ही नहीं ज्यादा मैदा खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है, हाई ब्लड प्रेशर और विकास से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं.

क्या बिल्कुल न खाएं मैदा?
एक्सपर्ट बताते हैं कि नुकसान होने का मतलब यह नहीं है कि आपको मैदा बिल्कुल नहीं खाना चाहिए. संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर इसे सीमित मात्रा में खाने से स्वस्थ लोगों को कोई नुकसान नहीं होता. समस्या तब होती है जब मैदा हर खाने और हर स्नैक का हिस्सा बन जाता है. जरूरी बात है इसे सीमित मात्रा में खाना. बेहतर पोषण और ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखने के लिए हमेशा साबुत गेहूं का आटा, ओट्स, बाजरा, ब्राउन राइस या दूसरे साबुत अनाज चुनें. प्रोसेस्ड फूड के बजाय साबुत अनाज का इस्तेमाल करके खुद ताजा खाना बनाना कहीं ज्यादा हेल्दी विकल्प है.

About the Author

शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



Source link

Write A Comment