Last Updated:
Rajasthan Trditional Sweet Ghewar: मानसून की दस्तक के साथ ही राजस्थान में पारंपरिक मिठाई घेवर की बिक्री तेज हो गई है. अलवर जिले के किशनगढ़ बास, खैरथल और तिजारा सहित कई शहरों की मिठाई दुकानों पर तीज और रक्षाबंधन को लेकर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है. अलवर के दुकानदार चार तरह के घेवर बनाते हैं. जिसमें सादा, मावा, रबड़ी, दूध और पनीर घेवर शामिल है. मिठाई विक्रेता पवन अग्रवाल ने बताया कि सावन में घेवर सबसे अधिक बिकने वाली मिठाई है और इसकी बिक्री करीब डेढ़ महीने तक रहती है. सिंजारे की परंपरा में भी घेवर का विशेष महत्व होने से इसकी खरीदारी लगातार बढ़ रही है.
अलवर: राजस्थान में मानसून की शुरुआत के साथ ही बाजारों में पारंपरिक मिठाई घेवर की रौनक लौट आई है. तीज और रक्षाबंधन से पहले मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है. दुकानदारों ने बढ़ती मांग को देखते हुए सादा, मावा, मलाई और ड्राई फ्रूट घेवर की भरपूर तैयारी की है. दुकानों पर कई प्रकार के घेवरों से सजी दुकानें लोगों को आकर्षित कर रही हैं और त्योहारों की मिठास पहले से ही बाजारों में घुलने लगी है. किशगढ़ बास के प्रमुख मिठाई विक्रेताओं पवन अग्रवाल ने बताया कि घेवर को स्पेशल कारीगरों द्वारा तैयार किया जाता है. जिसकी सबसे ज्यादा खरीदारी की जाती है. सावन के महीने में यह सबसे ज्यादा बिकने वाली मिठाई है.
घेवर को एक डिस्क के आकार में तैयार किया जाता है. जिसकी बनावट मधुमक्खी के छत्ते जैसी है, जो खाने में सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होती है. इस बार सावन शुरू होने से पहले ही घेवर की बिक्री में तेजी देखने को मिल रही है. बाजार में एक से डेढ़ महीने तक घेवर की बिक्री होती है. महिलाएं तीज के लिए और परिवार रक्षाबंधन के अवसर पर घेवर की जमकर खरीदारी करते हैं. मिठाई कारोबारियों के अनुसार, किशनगढ़ बास, खैरथल, तिजारा सहित अन्य शहरों में आसपास के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी विशेष रूप से घेवर खरीदने पहुंच रहे हैं. त्योहार नजदीक आने के साथ बिक्री में और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीद है. दुकानों पर ग्राहकों की पसंद को देखते हुए विभिन्न आकार और स्वाद के घेवर तैयार किए जा रहे हैं.
अलवर में चार वैरायटी में मिलती है घेवर
घेवर राजस्थान की परंपरा और संस्कृति का है प्रतीक
जानें पारंपरिक मिठाई घेवर बनाने का तरीका
सावन के महीने में सबसे ज्यादा खाए जाने वाली मिठाई घेवर है. ऐसे में कुछ लोग अपने घरों में भी घेवर की मिठाई तैयार की जाती है. अगर घेवर बनाना चाहते हैं तो आपको मैदा की आवश्यकता होगी जो बाजार में आसानी से मिल जाता है. उसके बाद बर्फ के अंदर जमा हुआ घी की आवश्यकता होती है. इस दौरान घी को बर्फ के साथ अच्छी तरह फेंटें, जब तक वह क्रीमी न हो जाए. उसके बाद हाथों से धीरे-धीरे मैदा मिलाएं और ठंडा पानी डालते हुए पतला, बिना गुठली वाला घोल तैयार करें. इसके बाद एक गहरे बर्तन में घी या तेल अच्छी तरह गर्म करें. घोल जितना पतला होगा, घेवर उतना ही जालीदार बनेगा. इस विधि से आप घर पर पारंपरिक राजस्थानी सादा, मावा या रबड़ी घेवर तैयार कर सकते हैं.
About the Author
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें