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Famous Chaat Shop in Shahjahanpur: शाहजहांपुर के खिरनी बाग चौराहे के पास लगने वाला घटिया घाट चाट भंडार सिर्फ एक ठेला नहीं, बल्कि स्वाद की सालों साल पुरानी जीती-जागती विरासत है. आज की आधुनिक मशीनों के दौर में भी यहां पानी के बताशों के लिए मसाले सिलबट्टे पर पीसे जाते हैं और फिर शुद्ध देसी घी में उनका छौंका लगाया जाता है. यहां मिलने वाले गोलगप्पों का पानी इतना खास है कि लोग दूर-दूर से सिर्फ इसका स्वाद चखने पहुंचते हैं. यही वजह है कि शाम होते ही इस ठेले पर चाट प्रेमियों की लंबी कतार लग जाती है.

शाहजहांपुर में लगने वाला ‘घटिया घाट चाट भंडार’ सिर्फ एक ठेला नहीं, बल्कि स्वाद का एक ऐतिहासिक केंद्र बन चुका है. वर्तमान में इसे संभाल रहे जतिन सैनी बताते हैं कि चाट बनाना और बेचना उनका पुश्तैनी व्यवसाय है. इस काम को उन्होंने अपने बड़ों से सीखा है. विरासत में मिले इस हुनर को उन्होंने न सिर्फ संभाल कर रखा है, बल्कि इसकी लोकप्रियता को और ज्यादा बढ़ाया है.

जतिन सैनी के पिता उमेश चंद्र सैनी ने करीब 47 साल पहले ठीक इसी जगह पर एक छोटे से ठेले के साथ इस सफर की शुरुआत की थी. इतने दशकों का समय बीत जाने के बाद भी इस दुकान की जगह और इसके स्वाद की साख बिल्कुल नहीं बदली. उमेश चंद्र ने अपनी ईमानदारी और लाजवाब स्वाद के दम पर जो नाम कमाया, उसे आज उनकी अगली पीढ़ी पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रही है.

इस दुकान की चाट और पानी के बताशे यानी गोलगप्पे इतने लाजवाब हैं कि इनका नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. शहर के लोग तो इसके दीवाने हैं ही, लेकिन सबसे खास बात यह है कि आस-पास के जिलों और दूर-दराज के इलाकों से भी लोग सिर्फ इस चाट का स्वाद लेने के लिए शाहजहांपुर खिंचे चले आते हैं. शाम होते ही यहां शौकीनों की भारी भीड़ जुट जाती है.

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जतिन सैनी के बताशों के पानी में स्वाद का एक अनोखा जादू छुपा हुआ है. बाजार के रेडीमेड मसालों के बजाय, वो आज भी पूरी तरह से शुद्ध देसी मसालों का इस्तेमाल करते हैं. पानी तैयार करने के लिए जीरा, काली मिर्च, धनिया, हींग और हरी मिर्च जैसे खड़े मसालों को घर पर पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर पीसा जाता है. यही मेहनत इस पानी को सबसे अलग और बेहद पाचक बनाती है.

सिलबट्टे पर मसाले पीसने के बाद अगली प्रक्रिया बेहद दिलचस्प और अनोखी है. जतिन इन पिसे हुए मसालों को सीधे पानी में नहीं मिलाते, बल्कि पहले तवे पर शुद्ध देसी घी डालकर इन मसालों को अच्छी तरह से भूनते हैं यानी छौंका लगाते हैं. इस छौंका की वजह से मसालों की खुशबू और स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. इसके बाद ही इसे पानी में मिलाकर तीखा और चटपटा पानी तैयार किया जाता है.

आजकल ज्यादातर जगहों पर पानी को खट्टा करने के लिए सिंथेटिक सिरके, नींबू के सत्त या सैट्रिक एसिड का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत को नुकसान पहुंचाता है. लेकिन घटिया घाट चाट भंडार पर शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है. पानी में प्राकृतिक और बेहतरीन खट्टापन लाने के लिए जतिन सैनी केवल अमचूर की खटाई का ही इस्तेमाल करते हैं, जो स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बढ़िया है.

बताशों के साथ परोसी जाने वाली मटर को भी यहां बेहद खास अंदाज में तैयार किया जाता है. जतिन ग्राहकों की पसंद के हिसाब से दो तरह की मटर रखते हैं. पहली साधारण उबली हुई सफेद मटर होती है, जबकि दूसरी वैरायटी में उबली हुई मटर को तवे पर विशेष मसालों के साथ फ्राई किया जाता है. तवे पर फ्राई होने के बाद इस सोंधी मटर का स्वाद बताशों के भीतर जाते ही दोगुना हो जाता है.

बदलते वक्त के साथ भले ही महंगाई बढ़ गई हो, लेकिन यहां का स्वाद आज भी 47 साल पुराना ही है. जतिन बताते हैं कि जब उनके पिता ने शुरुआत की थी, तब 10 रुपए में 50 बताशे मिलते थे. आज के दौर में कीमतें बदल चुकी हैं और अब 10 रुपए के 3 पानी वाले बताशे मिलते हैं, जबकि चटनी वाले 5 बताशों की कीमत 20 रुपए है. कीमत बदलने के बाद भी ग्राहकों का प्यार कम नहीं हुआ है.

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