Last Updated:
बिहार की मशहूर शाही लीची अब सिर्फ फल के रूप में ही नहीं, बल्कि वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के जरिए भी किसानों और युवाओं के लिए कमाई का नया जरिया बन रही है. मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र ने लीची से तैयार होने वाले खास ‘लीची रसगुल्ला’ को बढ़ावा देना शुरू किया है, जिसकी बाजार में तेजी से मांग बढ़ रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और ऑफ सीजन में इसकी कीमत भी ज्यादा मिलती है. यही वजह है कि लीची प्रसंस्करण अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का बड़ा अवसर बनता जा रहा है.
बिहार की मशहूर शाही लीची अब सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रह गई है. इससे कई तरह के वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इन्हीं में से एक है ‘लीची रसगुल्ला’, जिसकी बाजार में धीरे-धीरे मांग बढ़ रही है. मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार ने बताया कि लीची रसगुल्ला किसानों और युवाओं के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है. खास बात यह है कि ऑफ सीजन में इसकी कीमत और मांग दोनों बढ़ जाती हैं.
डॉ. अंकित कुमार ने बताया कि लीची रसगुल्ला बनाने के लिए सबसे पहले ताजी और अच्छी गुणवत्ता वाली लीची चुनी जाती है. इसके बाद लीची के अंदर से सावधानीपूर्वक बीज निकाला जाता है, ताकि उसका पल्प खराब न हो. यह पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है. बीज निकालने के बाद लीची को थर्मल ट्रीटमेंट दिया जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है.
उन्होंने कहा कि किसानों और उद्यमियों को यह व्यवसाय शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लेना जरूरी है. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं. यहां लोगों को लीची प्रसंस्करण की तकनीक सिखाई जाती है और लाइसेंस भी जारी किया जाता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस व्यवसाय से जुड़ सकें. केंद्र की ओर से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
विशेषज्ञों के अनुसार, आधा किलो लीची रसगुल्ला तैयार करने में करीब 70 से 80 रुपये तक की लागत आती है. वहीं ऑफ सीजन में इसका थोक बाजार मूल्य करीब 150 रुपये प्रति आधा किलो तक पहुंच जाता है. ऐसे में यह किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है.
डॉ. अंकित कुमार ने बताया कि अगर लीची रसगुल्ला को 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर फ्रिज में रखा जाए, तो इसे एक साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है. यही कारण है कि अब लीची के प्रसंस्करण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सके, लीची की बर्बादी कम हो और लोग सालभर लीची का स्वाद ले सकें.