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Jaipur Pani Puri: जयपुर की पानी-पतासी (पानी पुरी) सिर्फ एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि हजारों लोगों के रोजगार का मजबूत आधार भी है. शहर में एक परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से पतासी बनाने का काम कर रहा है और आज उनकी बनाई पतासी से जयपुर के अधिकांश ठेले, दुकानें और फूड स्टॉल ग्राहकों को चटपटा स्वाद परोसते हैं. पारंपरिक तकनीक और गुणवत्ता के कारण इस परिवार की पतासी पूरे शहर में पहचान बना चुकी है. इस कारोबार से न केवल उनका परिवार जुड़ा है, बल्कि कई अन्य लोगों को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है. जयपुर की फूड संस्कृति में इस परिवार का योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह कहानी बताती है कि कैसे एक पारंपरिक घरेलू व्यवसाय समय के साथ एक सफल उद्यम बनकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है.
जयपुर: जयपुर का चारदीवारी बाजार अपनी भव्यता और सुंदर बाजारों के लिए प्रसिद्ध हैं जहां बेहतरीन खरीदारी के साथ बाजारों में लोगों को बेहतरीन जायके का स्वाद भी मिलता हैं. चारदीवारी बाजार की छोटी-छोटी गोलियों में हुनरमंद हलवाई सिर्फ जायका ही नहीं तैयार करते बल्कि अलग-अलग प्रकार के जायके के स्वाद के आइटम भी तैयार करते हैं, ऐसे ही चारदीवारी के चौड़ा रास्ता में स्थित नटनियों का रास्ता जो जयपुर में पतासी/गोलगप्पे के मार्केट के रूप में मशहूर हैं. यहां लोग पीढ़ियों से पतासी/गोलगप्पे का काम करते आ रहे हैं. वैसे तो जयपुर में लोग अलग-अलग प्रकार के जायके के स्वाद को पसंद करते हैं लेकिन पानी-पतासी/गोलगप्पे का स्वाद लोग चलते फिरते लेते हैं.
लोकल-18 ने नटनियों के रास्ते में पहुंच कर यहां पानी-पतासी/गोलगप्पे बनाने वाले लोगों से बात की तो 23 वर्षीय युवराज सिंह बताते हैं की पानी-पतासी/गोलगप्पे का यह काम 100 सालों से उनके दादाजी राजपाल सिंह के समय चलते आ रहा हैं. वह खुद तीसरी पीढ़ी के हैं, जो अब इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं. युवराज बताते हैं कि यहां 10-12 दुकानें हैं जहां वर्षों से पानी-पतासी/गोलगप्पे बनाने का काम लोग करते हैं, जहां से पूरे जयपुर में सुखी पतासी के लिए नटनियों का रास्ता सबसे बड़ा मार्केट हैं.
कारखाने में बनती हैं पतासी और दुकानों में सजती हैं
लोकल-18 से बात करते हुए युवराज बताते हैं कि नटनियों के रास्ते में दुकानों पर खुखी परासियां सजी रहती हैं, लेकिन इन पचासियों को हम अपने अलग-अलग कारखानों में तैयार करते हैं और फिर वह दुकान से पूरे जयपुर तक पहुंचती हैं. हमारे यहां अलग-अलग प्रकार की पचासियां बनाई जाती हैं. जिनमें आटे, मैदा, दाल और सूजी की पचासियां हैं जिनकी बाजारों में जमकर डिमांड रहती हैं. अलग बात करें कुसी पतासी की कीमत की तो 100,500 और 1000 हजार की पैकिंग में पतासी बिकती हैं. युवराज बताते हैं कि अलग-अलग जगह पर पानी-पतासी/गोलगप्पे को अलग-अलग नाम से जाना जाता हैं. जैसे राजस्थान और हरियाणा में पानी पतासी, उत्तर प्रदेश में पड़ाका या पानीपुरी, असम में फुस्का, ओडिशा में ‘गुप-चुप’, बंगाल में पुचका, छत्तीसगढ़ में फुचका जैसे गोलगप्पे के कई नाम हैं. इसी काम के चलते यहां वर्षों से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलता हैं.
सैकड़ों लोगों के लिए बड़ा रोज़गार हैं पानी-पतासी
लोकल-18 से बात करते हुए युवराज बताते हैं कि जयपुर अपने स्ट्रीट फूड के लिए खूब फेमस हैं. यहां लोग जमकर खाने पीने का स्वाद लेते हैं और लोगों को सबसे ज्यादा फास्ट फूड में पानी पतासी बहुत पंसद आती हैं. क्योंकि इस फूट को लोग किसी भी समय का सकते हैं. इसलिए जयपुर में हजारों लोगों का रोजगार इस पानी-पतासी/गोलगप्पे से जुड़ा हुआ हैं. शहर के हर इलाके में हर जगह पानी-पतासी/गोलगप्पे के ठेले लगे रहते हैं. जिसके चलते लोगों के लिए यह एक बड़ा रोजगार का साधन हैं. इसलिए यह पानी-पतासी/गोलगप्पे का व्यापार वर्षों से एक चैन की तरह जुड़ा हुआ हैं.
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