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सुबह का नाश्ता बन जाएगा यादगार, बरेली के इन 8 ठिकानों पर जरूर जाएं, देखिए जगह

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अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं, तो बरेली की गलियां आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं. यहां सुबह की शुरुआत ही होती है गरमा-गरम नाश्तों से, जिनका स्वाद सालों पुरानी परंपरा से जुड़ा हुआ है. दही-जलेबी, समोसा चाट, पानी के बताशे और देसी घी की कचौड़ी जैसे स्वाद आपको यहां बार-बार आने पर मजबूर कर देंगे.

बिहारीपुर की तंग गलियों में, बिहारीपुर ढाल के पास स्थित यह जगह करीब 70-80 साल से बरेली वासियों का पसंदीदा नाश्ता परोस रही है. यहां का पारंपरिक स्वाद चखने के लिए कई सेलिब्रिटी, नेता और पर्यटक भी पहुंचते हैं. लोग यहां स्वाल-आलू के साथ ताजी दही-जलेबी खाना बेहद पसंद करते हैं. खास बात यह है कि यह नाश्ता केवल सुबह के समय ही मिलता है, आमतौर पर सुबह 6 बजे से लेकर 11 बजे तक.

“स्वाल” मैदा से बनी एक तरह की कुरकुरी पपड़ी होती है, जिसे जीरे और नमक वाले उबले हुए सादे आलू के साथ परोसा जाता है. इस नाश्ते की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के तीखे मसालों का उपयोग नहीं किया जाता, फिर भी इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है.

अगर आप असली और पारंपरिक “बिहारीपुर के दही-जलेबी” का स्वाद लेना चाहते हैं, तो सुबह 9 बजे से पहले पहुंचना बेहतर होता है, क्योंकि यहां ताज़ा नाश्ता जल्दी खत्म हो जाता है. ओल्ड बरेली सिटी के बिहारीपुर की तंग गलियों में सुबह के समय नाश्ते के शौकीन लोगों की भीड़ लगी रहती है, जहां लोग बड़े चाव से नाश्ते का आनंद लेते नजर आते हैं.

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बरेली शहर के लोगों को सुबह के समय समोसा चाट खाना बेहद पसंद है. यह पारंपरिक ठेला पिछले करीब 50 साल से लोगों को देसी स्वाद में छोलों के साथ समोसे की चाट परोस रहा है. पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी सुबह के वक्त कुहाड़ापीर चौकी के पास सड़क किनारे खड़े होकर इस चटपटी चाट का आनंद लेते हैं. महज 10 रुपए में मिलने वाला यह नाश्ता साइकिल सवार से लेकर कार चालक तक हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है.

बरेली एक ऐसा शहर है, जहां सुबह के समय कुहाड़ापीर क्षेत्र में लगने वाला यह ठेला अपने पानी के बताशों के लिए काफी प्रसिद्ध है. सोशल मीडिया पर भी इनके वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं. पैदल चलने वाले से लेकर बड़े व्यापारी, नेता और अधिकारी तक यहां रुककर सुबह के वक्त पानी के बताशों का स्वाद लेना पसंद करते हैं. इनका दावा है कि सुबह इनके अर्क वाले बताशे खाने से कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है.

यहाँ का “काशीफल” यानी कद्दू की सब्जी अपने अनूठे जायके के लिए सबसे ज्यादा मशहूर है. एक प्लेट में 5 कचौड़ियां दी जाती हैं, जिनके साथ मीठा काशीफल (कद्दू), छोले और आलू-टमाटर की सब्जी परोसी जाती है. यहां की कचौड़ियाँ दाल भरे मसालों वाली पूरियां होती हैं, जिन्हें देसी घी में तैयार किया जाता है. बरेली का मशहूर त्यागी रेस्टोरेंट अपनी कचौड़ियों और पारंपरिक स्वाद के लिए पूरे शहर में जाना जाता है. यहां की कचौड़ियों का इतिहास काफी पुराना है और यह जगह स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एक पसंदीदा ठिकाना बनी हुई है.

बरेली में सबसे छोटे समोसे मुख्य रूप से अलमगीरीगंज और मठ की चौकी क्षेत्र में मिलते हैं. ये समोसे अपने बेहद छोटे आकार और कम कीमत के लिए पूरे शहर में प्रसिद्ध हैं. नितिन नाम के व्यक्ति की करीब 70 साल पुरानी दुकान इन छोटे समोसों के लिए जानी जाती है. पहले ये समोसे 50 पैसे से 1 रुपए तक में मिलते थे, लेकिन महंगाई के चलते अब इनकी कीमत 2 रुपए हो गई है. इन समोसों का असली स्वाद इनके साथ मिलने वाली खास खट्टी-मीठी चटनी से आता है, जो खजूर, धनिया और पुदीना से तैयार की जाती है और शहरभर में काफी मशहूर है.

बरेली शहर में त्यागी रेस्टोरेंट अपने खास स्वाद, विशेष रूप से देसी घी की कचौड़ी और छोले भटूरे के लिए पूरे शहर में प्रसिद्ध है. यह दुकान 80 साल से भी अधिक पुरानी है और यहां का स्वाद चखने के लिए अक्सर लोगों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं. यहां छोले भटूरे की एक प्लेट में 2 भटूरे और 2 तरह की सब्जियां मिलती हैं, जिसकी कीमत लगभग 120 रुपए है. स्वाद की खासियत यह है कि सब्जियों में आलू और कद्दू के साथ मीठी सौंठ की चटनी परोसी जाती है, जो स्वाद को और बढ़ा देती है. यह रेस्टोरेंट नोवेल्टी चौराहा, सिविल लाइंस, बरेली के पास स्थित है और आमतौर पर सुबह 7 बजे से रात 8-9 बजे तक खुला रहता है.



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