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Muharram 2026: मुहर्रम के दौरान दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय इबादत और मानवीय सेवा के कामों में शामिल होता है. हलीम, खिचड़ा और शरबत-ए-खास जैसे खास पकवान बनाने और बांटने की भी एक पुरानी परंपरा है. आइए, इसके पीछे के धार्मिक और सामाजिक महत्व को जानें.
Muharram 2026
Muharram 2026: मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है और इसे बहुत पाक माना जाता है. यह महीना न सिर्फ़ नए साल की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि कर्बला की ऐतिहासिक घटना और इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत की याद भी दिलाता है. इस दौरान, दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय इबादत, दुआ और मानवीय सेवा के कामों में शामिल होता है. लोगों के बीच हलीम, खिचड़ा और शरबत-ए-खास जैसे खास पकवान बनाने और बांटने की भी पुरानी परंपरा है. आइए, इसके पीछे के धार्मिक और सामाजिक महत्व को जानें…
हलीम क्यों बनाया जाता है?
हलीम गेहूं, दालों, सब्जियों और मांस (या शाकाहारी वर्ज़न के लिए सिर्फ दालों) से बनने वाला एक व्यंजन है. इसे धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाया जाता है. मुहर्रम के दौरान लोगों में हलीम बांटना दान और सेवा-भाव का प्रतीक माना जाता है. यह व्यंजन एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है, क्योंकि इसे बड़ी मात्रा में बनाया जाता है और सभी के साथ बांटा जाता है.
खिचड़ा लंगर की परंपरा
मुहर्रम के मौके पर कई जगहों पर खिचड़ा लंगर (सामुदायिक रसोई जहां खिचड़ा परोसा जाता है) का आयोजन किया जाता है. खिचड़ा दाल, चावल और दूसरी चीज़ों से बना एक पौष्टिक व्यंजन है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मानने वालों और राहगीरों को खाना खिलाना पुण्य का काम माना जाता है. इसीलिए मुहर्रम के दौरान खिचड़ा सामूहिक रूप से तैयार किया जाता है और लोगों को परोसा जाता है. यह परंपरा समाज में समानता और सहयोग की भावना को मज़बूत करती है.
शरबत-ए-खास का क्या महत्व है?
मुहर्रम के दौरान शरबत-ए-खास भी खास तौर पर तैयार किया जाता है. कर्बला की घटना के वृत्तांतों में पानी की कमी और प्यास से हुई तकलीफ़ का ज़िक्र मिलता है. इसलिए कई जगहों पर लोगों को शरबत (मीठा पेय) और ठंडे पेय बांटे जाते हैं. इसे इंसानियत, दया और सेवा का प्रतीक माना जाता है. गर्मी के मौसम में लोगों को शरबत पिलाना एक नेक काम माना जाता है.
हलीम, खिचड़ा और शरबत-ए-खास सिर्फ़ स्वादिष्ट व्यंजन ही नहीं हैं. वे मुहर्रम का मुख्य संदेश भी देते हैं त्याग, सेवा, भाईचारा और इंसानियत. इन चीज़ों के ज़रिए, लोग एक-दूसरे की मदद करने और अपने आस-पास के लोगों का ख्याल रखने के लिए प्रेरित होते हैं.
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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.
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