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Ulavacharu Natu Kodi Pulao: हैदराबाद में अब नवाबी बिरयानी के साथ-साथ आंध्र प्रदेश का पारंपरिक ‘उलवा चारु’ और ‘नाटु कोड़ी’ (देसी चिकन) पुलाव बेहद लोकप्रिय हो रहा है. अमीरपेट और केपीएचबी जैसे क्षेत्रों में रहने वाले आंध्र के छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स ने इस इमिग्रेंट जायके को शहर की नई पहचान बना दिया है. कुलथी की दाल के सूप और रायलसीमा के मसालों से तैयार यह पुलाव अपने सोंधेपन और तीखे स्वाद के लिए जाना जाता है, जो अब हैदराबाद के फूड कल्चर का अभिन्न हिस्सा बन चुका है.

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Hyderabadi Rise of Ulavacharu Pulao: जब भी हैदराबाद के स्वाद की चर्चा होती है, तो ज़हन में सबसे पहले नवाबी दम बिरयानी का नाम आता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शहर के ‘फूड मैप’ पर एक खामोश क्रांति हुई है. अमीरपेट की तंग गलियों से लेकर केपीएचबी (KPHB) के आलीशान रेस्टोरेंट्स तक, अब ‘उलवा चारु’ और ‘नाटु कोड़ी’ पुलाव का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है. यह सिर्फ स्वाद का बदलाव नहीं है, बल्कि एक इमिग्रेंट फूड कल्चर की जीत है, जिसने दो क्षेत्रों के जायकों को एक साथ ला दिया है.

हैदराबाद के अमीरपेट और मधापुर जैसे इलाके दशकों से आंध्र प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले छात्रों और आईटी प्रोफेशनल्स का ठिकाना रहे हैं. घर से दूर इन युवाओं ने अपनी जड़ों के स्वाद—जैसे कुलथी की दाल (Horse Gram) से बनी ‘उलवा चारु’ की तलाश शुरू की. देखते ही देखते छोटे करी पॉइंट्स से लेकर बड़े होटलों तक ने इसे अपने मेन्यू का राजा बना लिया. 2014 में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के राजनीतिक बंटवारे के बाद भी भोजन ने एक सेतु का काम किया है. आज एक स्थानीय हैदराबादी भी उतने ही चाव से ‘रायलसीमा रुचि’ का आनंद लेता है, जितना कि आंध्र से आया कोई नागरिक.

नाटु कोड़ी पुलाव: देसी चिकन और सोंधी खुशबू का संगम
केपीएचबी के शेफ बताते हैं कि इस जायके की असली ताकत इसकी सादगी और देसी बनावट है. इसमें ‘नाटु कोड़ी’ यानी देसी चिकन का उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य और स्वाद दोनों में बेहतर माना जाता है. इसका सबसे बड़ा ‘सीक्रेट इंग्रीडिएंट’ है उलवा चारु का सूप, जो पुलाव को हल्का खट्टापन और मिट्टी जैसी सोंधी खुशबू देता है. अदरक-लहसुन का पेस्ट, करी पत्ता और रायलसीमा का विशेष तीखा लाल मिर्च पाउडर मिलकर इसे एक अद्वितीय पहचान देते हैं.

रसोई से रेस्टोरेंट तक की आसान विधि
इस पुलाव को बनाना जितना आसान है, इसका स्वाद उतना ही गहरा है. सबसे पहले सख्त देसी चिकन को प्रेशर कुकर में पकाया जाता है. फिर एक भारी तले के बर्तन में राई, करी पत्ता और प्याज के साथ चिकन को सुनहरा होने तक भुना जाता है. इसके बाद उलवा चारु सूप और भीगे हुए बासमती चावल डालकर इसे धीमी आंच पर ‘दम’ दिया जाता है. अंत में देसी घी और ताजे धनिये की सजावट इसकी खुशबू को दोगुना कर देती है.

बदल गई हैदराबाद की थाली
आज हैदराबाद की थाली अब केवल नवाबी नहीं रही, बल्कि इसमें रायलसीमा का तीखापन और तटीय आंध्र की सादगी भी घुल गई है. यह ‘इमिग्रेंट फूड’ अब शहर की अपनी असली पहचान बन चुका है. शहर के बदलते खान-पान के इस दौर में बिरयानी के साथ-साथ अब ‘उलवा चारु पुलाव’ की डिमांड भी आसमान छू रही है.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें



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