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Monsoon Murabba: आपने आंवले का मुरब्बा तो खाया होगा, लेकिन छतरपुर के जितेंद्र लोगों को सालों से खास मुरब्बा बनाकर खिला रहे हैं. इसे बनाना भी आसान होता है. साथ ही इसके फायदे भी अनेक होते हैं. इस मुरब्बे को खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं, साथ ही बल वृद्धि में सहायक होता है. जानें सबकुछ…

Bamboo Murabba: छतरपुर जिले के रहने वाले जीतेंद्र बाजपेयी सालों से बांस का मुरब्बा बना रहे हैं. लेकिन, इसका स्वाद लाजवाब है. मार्केट में इसे 400 रुपए किलो में बेचते हैं. जीतेंद्र बताते हैं कि आपने आंवला का मुरब्बा तो खाया होगा, लेकिन हम लोगों को सालों से बांस का मुरब्बा बनाकर खिला रहे हैं. इसे बनाना भी आसान होता है. साथ ही इसके फायदे भी अनेक होते हैं.

ऐसे करते बांस मुरब्बा तैयार 
जीतेंद्र बताते हैं कि बांस का मुरब्बा तैयार करने के लिए सबसे पहले बांस के पेड़ से ताजा माल निकाला जाता है. ये ताजा माल उस समय निकाला जाता है जब बांस में पीका होता है इसी को ताजा माल कहते हैं. ताजे बांस को काटने के बाद इसे टुकड़ों में काट लेना होता है.  फिर इसे प्राकृतिक रुप से चीनी (शक्कर) में गलाना होता है. चीनी में गलने के बाद बांस का मुरब्बा तैयार हो जाता है. इसे बनाने में ज्यादा समय और मेहनत नहीं लगती है. जीतेंद्र बताते हैं कि जो भी बांस का मुरब्बा खाता है. उस व्यक्ति की हड्डियां मजबूत हो जाती हैं. साथ ही बल वृद्धि में सहायक होता है. इसके अलावा यह लंबाई बढ़ाने में भी मदद करता है.

400 रुपए किलो बेचते 
जीतेंद्र बताते हैं कि बांस का मुरब्बा बनाने का सबसे अच्छा सीजन जून के आखिरी सप्ताह से शुरू हो जाता है. क्योंकि, मानसून की बारिश हो जाती है. इसी बारिश से बांस पीका फोड़ता है. यही ताजा बांस किसान भाइयों से खरीदते हैं. जुलाई से बांस के मुरब्बे का प्रोडक्शन शुरू कर देते हैं. हालांकि, इसका रेट महंगा होता है. 1 किग्रा बांस का मुरब्बा 400 रुपए किलो बेचते हैं. लोग इसे पसंद भी करते हैं. जीतेंद्र बांस मुरब्बा के अलावा आंवला कैंडी, बाजरे और रागी का पोहा, तमाम तरह के अचार, गेहूं का दलिया , महुआ लड्डू और शिलाजीत पेड़ा जैसे तमाम तरह के फूड प्रोडक्ट बनाते हैं. जीतेंद्र का ये बिजनेस अब आगे बढ़ चला है. वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से प्रोडक्ट बेच रहे हैं.

महुआ लड्डू और मिठाई भी बनाते 
जीतेंद्र वाजपेई ने महुआ फूल से भी फूड आयटम बनाए जिसकी डिमांड छतरपुर जिले में ही नहीं बल्कि देशभर में है. दरअसल, जीतेंद्र महुआ फूल से विभिन्न तरह के मीठा-मिष्ठान बनाते हैं. जीतेंद्र ने महुआ से बर्फी और लड्डू भी तैयार किए हैं.

छतरपुर और पन्ना में दुकान 
जीतेंद्र बताते हैं कि बुंदेली अनुभूति स्व सहायता समूह के नाम से अभी हमारी दुकान बिजावर और पन्ना में खुली है. बिजावर में प्रोडक्शन भी करते हैं. पन्ना में आउटलेट है.

ऑनलाइन आर्डर भी 
जीतेंद्र बताते हैं कि हमारी बुंदेली व्यंजन की ऑफिशियल वेबसाइट है, जहां पर ऑनलाइन ऑर्डर लिए जाते हैं. आप bundelihub.com  पर विजिट कर सकते हैं. यहां आपको सभी तरह के बुंदेली व्यंजनों की जानकारी मिल जाएगी. यहां से आप बुंदेली व्यंजन के फूड को आर्डर भी कर सकते हैं.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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