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क्या आपका AC भी इस गर्मी में ठंडी हवा देना बंद कर चुका है? जब आपने मैकेनिक को बुलाया, तो क्या उसने भी बिना सोचे-समझे कह दिया कि ‘भैया गैस खत्म है’? असल में AC की गैस कभी खुद से खर्च या एक्सपायर नहीं होती. अगर कूलिंग कम है, तो इसके पीछे लीकेज या कोई और तकनीकी खराबी हो सकती है. इस फ्रॉड से खुद को कैसे बचाएं? मैकेनिक से कौन से 5 सवाल पूछना जरूरी है और बिना मीटर रीडिंग देखे गैस भरवाने की गलती क्यों नहीं करनी चाहिए? जानिए AC सर्विसिंग से जुड़े वो सच जो आपका हजारों का नुकसान होने से बचाएंगे.

गर्मियां आते ही हमारे घरों में AC का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि AC ऑन करने के काफी देर बाद भी कमरा ठंडा नहीं होता. ऐसे में जब हम किसी मैकेनिक या रिपेयर वाले को बुलाते हैं, तो उसका पहला और सबसे आम जवाब होता है कि भैया आपके AC की तो गैस खत्म हो गई है. यह सुनते ही हमारे दिमाग में खर्च का मीटर घूमने लगता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार मैकेनिक बिना जांच किए ही झूठ बोल देते हैं ताकि वे आपसे पैसा वसूल सकें? आज हम आपको कुछ ऐसे आसान तरीके और जरूरी बातें बताएंगे, जिससे आप खुद समझ पाएंगे कि आपके AC की गैस सच में कम है या आपको बेवकूफ बनाया जा रहा है. (Image – AI)

AC में गैस कम है या नहीं, इसे पहचानने का सबसे पहला और आसान तरीका है कमरे का तापमान. अगर आपका AC लगातार चल रहा है, उसमें से हवा भी पूरी रफ्तार से आ रही है, लेकिन कमरे में कूलिंग बिल्कुल गायब हो चुकी है, तो यह गैस कम होने का एक बड़ा इशारा हो सकता है. इसके अलावा आपको अपने कमरे के अंदर लगी इनडोर यूनिट को भी ध्यान से देखना चाहिए. अगर आपने AC के फिल्टर को अच्छी तरह साफ कर दिया है, फिर भी इनडोर यूनिट की कॉइल्स पर बर्फ जमती हुई दिखाई दे रही है, तो समझ जाइए कि सिस्टम के अंदर गैस का प्रेशर गड़बड़ है और इसी वजह से वहां बर्फ जमा हो रही है. (Image – Canva)

सिर्फ अंदर ही नहीं, बल्कि घर के बाहर लगी आउटडोर यूनिट भी गैस कम होने के कई बड़े संकेत देती है. अगर आप आउटडोर यूनिट के पास जाकर उसके पतले वाले पाइप को छुएंगे और वह आपको बहुत ज्यादा ठंडा या उस पर बर्फ की सफेद परत जमी हुई दिखे, तो यह भी गैस कम होने का साफ लक्षण है. इसके साथ ही एक और बात पर गौर करें कि क्या आपका कंप्रेसर बार-बार ऑन और ऑफ हो रहा है. जब AC में गैस कम होती है, तो कंप्रेसर पर दबाव बढ़ता है और वह कूलिंग को मेंटेन नहीं कर पाता, जिससे वह बार-बार बंद और चालू होने लगता है. ऐसे में आपका बिजली का बिल तो बहुत ज्यादा आता है, लेकिन कमरे में ठंडक नाममात्र की भी नहीं होती. (Image – Canva)

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जब भी कोई रिपेयर वाला आपके घर आए और कहे कि गैस खत्म है, तो उसकी बात को तुरंत सच मत मानिए. असली टेस्ट तब होता है जब मैकेनिक अपने साथ लाए प्रेशर गेज मीटर को आपके AC में लगाता है. सिर्फ मुंह से बोल देना कि गैस उड़ गई है, काफी नहीं होता है. आपको उस मैकेनिक से कहना चाहिए कि वह पहले प्रेशर गेज लगाए और आपको मीटर की रीडिंग दिखाए कि इस वक्त AC में कितना प्रेशर बचा है. अगर कोई मैकेनिक बिना मीटर लगाए या बिना लीकेज चेक किए सीधे गैस टॉप-अप करने की जिद करे, तो समझ जाइए कि वहां कुछ गड़बड़ है और आपको सावधान हो जाना चाहिए. (Image – Canva)

आपको रिपेयर वाले से कुछ सवाल जरूर पूछने चाहिए. जैसे ही वह गैस कम होने की बात करे, आप उससे कहें कि मुझे गेज लगाकर लाइव प्रेशर दिखाइए. इसके बाद आपका अगला सवाल होना चाहिए कि अगर गैस कम हुई है तो लीकेज कहां पर है. मैकेनिक से कहें कि वह साबुन के पानी के झाग से या लीक डिटेक्टर मशीन की मदद से आपको वह जगह दिखाए जहां से गैस निकल रही है. आपको उससे यह भी पूछना चाहिए कि क्या वह पहले लीकेज को वेल्डिंग करके ठीक करेगा या फिर सीधे ऊपर से गैस भर देगा. यह सवाल सुनते ही मैकेनिक को समझ आ जाएगा कि आपको इस काम की अच्छी जानकारी है. (Image – Canva)

गैस भरवाते समय कुछ और तकनीकी बातें हैं जो आपको पता होनी चाहिए और आपको मैकेनिक से उनके बारे में बात करनी चाहिए. आप उससे पूछें कि आपके AC में कौन सी गैस भरी जाएगी, क्योंकि बाजार में R32, R410A या R22 जैसी अलग-अलग गैसें आती हैं और हर AC के लिए एक खास गैस होती है. इसके साथ ही सबसे जरूरी सवाल यह करें कि क्या वह पुरानी बची हुई गैस को पूरी तरह बाहर निकालकर सिस्टम को वैक्यूम पंप से वैक्यूम करेगा या फिर पुरानी गैस के ऊपर ही नई गैस डाल देगा. नियम के मुताबिक, बिना वैक्यूम किए ऊपर से गैस भरना AC की लाइफ को खराब कर देता है. (Image – Canva)

हकीकत में AC को ठीक करने का एक सही और फिक्स तरीका होता है जिसे हर मैकेनिक को फॉलो करना चाहिए. सबसे पहले AC के पूरे पाइप नेटवर्क में लीकेज की तलाश की जाती है. जब लीकेज मिल जाता है, तो उसे अच्छी तरह रिपेयर या वेल्ड किया जाता है. इसके बाद वैक्यूम पंप लगाकर पाइप के अंदर मौजूद सारी हवा और नमी को पूरी तरह बाहर खींचा जाता है. जब सिस्टम पूरी तरह वैक्यूम हो जाता है, तब गैस के सिलेंडर को एक इलेक्ट्रॉनिक वजन कांटे पर रखकर, तोलकर ठीक उतनी ही गैस भरी जाती है जितनी आपके AC के मॉडल के लिए जरूरी हो. इस पूरे प्रोसेस के बिना गैस भरना पैसों की बर्बादी है. (Image – Canva)

एक बहुत बड़ा सच जो ज्यादातर लोग नहीं जानते, वह यह है कि चाहे 1 टन का विंडो AC हो या स्प्लिट AC, इसमें भरी जाने वाली गैस की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती. AC की गैस पेट्रोल की तरह गाड़ी चलने पर खर्च नहीं होती है, बल्कि यह एक पूरी तरह से बंद लोहे और तांबे के पाइपों के सिस्टम में गोल-गोल घूमती रहती है. अगर आपके AC के पाइपों में कहीं कोई खराबी या छेद नहीं है, तो यह गैस आराम से 10 से 15 साल या उससे भी ज्यादा समय तक चल सकती है. यानी आपको हर साल या हर दो साल में गैस भरवाने की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए. (Image – Canva)

अगर आपके घर में हर एक-दो साल के अंदर AC की गैस कम हो जा रही है, तो इसका सीधा और साफ मतलब है कि आपके AC में कहीं न कहीं लीकेज है. हो सकता है कि तांबे के पाइप या कॉइल में कोई बहुत ही बारीक सा छेद हो गया हो, या फिर पाइपों को आपस में जोड़ने वाले नट-बोल्ट और जॉइंट्स ढीले पड़ गए हों जहां से गैस धीरे-धीरे रिस रही है. एक वजह यह भी हो सकती है कि पिछली बार जब मैकेनिक ने गैस भरी थी, तो उसने पाइपों को सही से वैक्यूम नहीं किया था या गैस पूरी मात्रा में नहीं भरी थी. इसलिए अगली बार जब भी AC कूलिंग छोड़े, तो मैकेनिक से सीधे कहें कि पहले मुझे लीकेज ढूंढकर दिखाओ, उसे ठीक करो और उसके बाद ही गैस भरो.

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