भारतीय मिठाइयों की बात हो और छेना तथा रसमलाई का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. दोनों ही बंगाल और पूर्वी भारत की लोकप्रिय मिठाइयों में शामिल हैं. कई लोग इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में छेना और रसमलाई में काफी अंतर होता है. इनकी बनाने की विधि, स्वाद, बनावट और परोसने के तरीके अलग-अलग होते हैं. आइए जानते हैं दोनों के बीच मुख्य अंतर.

क्या होता है छेना?

छेना एक डेयरी उत्पाद है, जिसे दूध को फाड़कर बनाया जाता है. दूध में नींबू का रस या सिरका डालने पर वह फट जाता है और उससे जो ठोस हिस्सा अलग होता है, उसे छेना कहा जाता है.

छेना अपने आप में कोई तैयार मिठाई नहीं है, बल्कि कई मिठाइयों का आधार होता है. रसगुल्ला, रसमलाई, संदेश और चमचम जैसी कई बंगाली मिठाइयां छेना से ही बनती हैं. छेना का स्वाद हल्का, ताजा और दूध जैसा होता है.

क्या होती है रसमलाई?

रसमलाई एक लोकप्रिय भारतीय मिठाई है, जिसे छेना से तैयार किया जाता है। सबसे पहले छेना को अच्छी तरह गूंथकर उसके छोटे-छोटे चपटे गोले बनाए जाते हैं. इन्हें चीनी की चाशनी में पकाया जाता है और बाद में केसर, इलायची तथा मेवों से युक्त गाढ़े मीठे दूध (रबड़ी) में डुबोकर परोसा जाता है.

रसमलाई का स्वाद मलाईदार, मीठा और बेहद रिच होता है. यह त्योहारों और खास अवसरों पर खूब पसंद की जाती है.

छेना और रसमलाई में मुख्य अंतर

1. स्वरूप

छेना एक कच्चा डेयरी उत्पाद है, जबकि रसमलाई एक तैयार मिठाई है.

2. बनाने की प्रक्रिया

छेना केवल दूध फाड़कर बनाया जाता है. वहीं रसमलाई बनाने के लिए छेना को कई चरणों से गुजरना पड़ता है, जैसे गूंथना, चाशनी में पकाना और रबड़ी में भिगोना.

3. स्वाद

छेना का स्वाद हल्का और कम मीठा होता है. दूसरी ओर रसमलाई का स्वाद मीठा, मलाईदार और अधिक समृद्ध होता है.

4. उपयोग

छेना का उपयोग विभिन्न मिठाइयां बनाने के लिए किया जाता है, जबकि रसमलाई सीधे खाने के लिए तैयार मिठाई होती है.

5. पोषण

छेना में प्रोटीन और कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. रसमलाई में भी ये पोषक तत्व होते हैं, लेकिन इसमें चीनी और मलाई होने के कारण कैलोरी की मात्रा अधिक होती है.

कौन है ज्यादा हेल्दी?

अगर सेहत के नजरिए से देखा जाए तो छेना अपेक्षाकृत अधिक हेल्दी माना जाता है, क्योंकि इसमें अतिरिक्त चीनी नहीं होती. वहीं रसमलाई स्वाद में बेहतरीन होती है, लेकिन इसमें शक्कर और फुल-फैट दूध का उपयोग होने से कैलोरी ज्यादा होती है. इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना बेहतर रहता है.



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