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Gulab Lachhi‌: छतरपुर के लवकुश नगर के छिद्दू अनुरागी पिछले 25 साल से अपने हाथों से गुलाब लच्छी बनाकर बेच रहे हैं. पहले मजदूरी करने वाले छिद्दू ने परिवार चलाने के लिए यह हुनर सीखा और अब इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. बच्चे इसे बढ़ी शौक से खाते हैं.

Gulab Lachhi‌ Man Story. आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं जो पिछले 25 सालों से खुद अपने हाथों से गुलाब लच्छी बनाकर लोगों को खिला रहे हैं. दरअसल, छतरपुर के लवकुश नगर के रहने वाले छिद्दू अनुरागी जो पहले मजदूरी करके अपना परिवार पालते थे. लेकिन जब मजदूरी में परिवार खर्च चलाना मुश्किल हो गया तो उन्होंने गुलाब लच्छी बनाना सीखी. इसके बाद वह गुलाब लच्छी बनाकर बेचने लगे. कैसे तैयार करते हैं गुलाब लच्छी? कितना कमाते हैं? आइए जानते उन्हीं की जुबानी

55 वर्षीय छिद्दू अनुरागी बताते हैं कि वह पिछले 25 सालों से गुलाब लच्छी बनाकर बच्चों, युवाओं और बूढ़ों को खिला रहे हैं. ये गुलाब लच्छी वह अपने हाथों से ही तैयार करते हैं. हालांकि, ये गुलाब लच्छी उन्हें बनाना नहीं आती थी. वह बताते हैं कि उनके मोहल्ले में बाहर के लोग रहते थे वह गुलाब लच्छी बना लेते थे. उन्हीं से मैंने भी सीख ली थी. इसे बनाना बहुत आसान होता है.

ऐसे करते हैं तैयार
छिद्दू बताते हैं कि गुलाब लच्छी बनाने के लिए मैदा, शक्कर और डालडा की जरूरत होती है. इसको भी गजक या सोन हलवा जैसा बनाते हैं. इसको बनाने में भी मेहनत लगती है. घंटों इसको खींचना पड़ता है. इसे ठंड और बरसात में ही बना सकते हैं. क्योंकि, गर्मी होने पर ये पिघलने लगती है.

छतरपुर जिले में हर जगह बेचने जाते
छिद्दू बताते हैं कि वह सिर्फ लवकुश नगर में ही नहीं बेचते हैं बल्कि आसपास के सभी गांव-कस्बों में बेचते हैं. छतरपुर जिले में लगने वाले सभी हाट बाजार में गुलाब लच्छी बेचने जाते हैं. आने-जाने के लिए बसों का किराया ही लगता है. इसके अलावा इस बिजनेस को चलाने के लिए उन्हें किसी भी सुविधा की जरूरत नहीं पड़ती है. गुलाब लच्छी बेचने के लिए उन्हें न तो मोटरसाइकिल की जरूरत होती है और न ही साइकिल की. वह पैदल ही घूम-घूम कर गुलाब लच्छी बेच लेते हैं.

कुछ ही घंटों में बिक जाती गुलाब लच्छी
छिद्दू बताते हैं कि सबसे ज्यादा कमाई उन्हें हॉट बाजार के दिन होती है. क्योंकि यहां हजारों की संख्या में भीड़ होती है. 1 या 2 घंटे में ही पूरा माल खत्म हो जाता है.‌ वह हर दिन आसानी से 1500 रुपए की गुलाब लच्छी बेच लेते हैं. खर्च काटकर आसानी से 500 रुपए की बचत हो जाती है.

इस सीजन में सबसे ज्यादा डिमांड
छिद्दू बताते हैं कि गुलाब लच्छी की डिमांड तो साल भर रहती है लेकिन गर्मियों में नहीं बना सकते हैं क्योंकि गर्मी में ये पिघल जाती है. बरसात और ठंड में तो बढ़िया चलता है. गर्मियों में अपना आतिशबाजी का काम करते हैं. गुलाब लच्छी की सबसे ज्यादा डिमांड ठंड में रहती है. इसलिए ठंड सीजन में महंगी बिकती है. अभी तो 10 रुपए की 50 ग्राम बिक रही है लेकिन अब महंगी होती जाएगी. ठंड सीजन में यही गुलाब लच्छी 10 रुपए की नाम मात्र मिलती है.

वह मानते हैं कि गुलाब लच्छी बनाने का हुनर सीख लिया तो आज यही हुनर मेरी इस बढ़ती उम्र में भी काम आ रहा है. अगर ये हुनर नहीं सीखता तो आज भी पहले की तरह मजदूरी कर रहा होता.

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Mohd Majid

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