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Satna News: बारिश के मौसम में चाय के साथ कुछ देसी और मीठा खाने का मन हो तो बघेलखंडी गुड़ की गुगौरी जरूर बनाएं. गेहूं के आटे, गुड़, सौंफ और इलायची से तैयार यह पारंपरिक पकवान बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होता है जिसका स्वाद आपको गांव-घर की याद दिलाएगा.
Baghelkhandi Gugauri: बारिश के मौसम में अगर शाम की चाय के साथ कुछ देसी और मीठा खाने का मन हो तो बघेलखंड की पारंपरिक गुड़ की गुगौरी एक बेहतरीन ऑप्शन है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम व मीठी यह गुगौरी गांव-घर के पारंपरिक स्वाद की याद दिलाती है. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती और घर में आसानी से तैयार किया जा सकता है.
गुड़ से शुरू होती है इसकी खास मिठास
लोकल 18 को जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी ने बताया कि गुगौरी बनाने के लिए सबसे पहले जरूरत के अनुसार गुड़ लें और उसमें थोड़ा सा गुनगुना पानी डालकर अच्छी तरह घोल लें. गुड़ पूरी तरह घुल जाने के बाद इसे साफ छलनी से छानना जरूरी है ताकि उसमें मौजूद किसी भी तरह की गंदगी या अशुद्धियां अलग हो जाएं. यही छना हुआ गुड़ का पानी आगे आटा तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है.
आटे में डालें सौंफ और इलायची
अब एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा लें. इसमें स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए दरदरी कुटी हुई सौंफ और कुटी इलायची डालें. चाहें तो एक चुटकी बेकिंग सोडा या खाने वाला सोडा भी मिलाया जा सकता है. हालांकि पारंपरिक तरीके में आटे को अच्छी तरह फेंटकर भी गुगौरी को फुलाया जाता है. इसके बाद गुड़ के पानी को धीरे-धीरे आटे में डालते हुए लगातार मिलाएं जिससे गुठलियां न पड़ें.
घोल की सही कंसिस्टेंसी रखना जरूरी
ध्यान रखें कि गुगौरी का घोल न बहुत पतला होना चाहिए और न ही बहुत सख्त. इसे पकौड़े के घोल जैसा गाढ़ा और चिकना रखना बेहतर रहता है. घोल तैयार होने के बाद बर्तन को करीब 15 से 20 मिनट के लिए ढककर रख दें. इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाता है और तलने के बाद गुगौरी अंदर से नरम व स्पंजी बनती है.
अब बारी है गरम तेल में तलने की
घोल तैयार होने के बाद लोहे या भारी तले की कड़ाही में शुद्ध सरसों का तेल या घी गर्म करें. तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए तो हाथों को थोड़ा गीला करके घोल की छोटी-छोटी लोइयां या पकौड़ी जैसे हिस्से सावधानी से कड़ाही में डालते जाएं. गुगौरी डालने के बाद आंच को मध्यम से धीमा कर दें. धीमी आंच पर तलने से यह बाहर से जल्दी नहीं जलती और अंदर तक अच्छी तरह पक जाती है.
सुनहरा रंग आते ही समझिए गुगौरी तैयार
गुगौरी को बीच-बीच में पलटते रहें ताकि वह चारों तरफ से बराबर सिके. जब इसका रंग गहरा सुनहरा या हल्का भूरा हो जाए और बाहर से अच्छी तरह कुरकुरा दिखाई देने लगे तब इसे करछी की मदद से तेल से निकाल लें. तैयार गुगौरी को साफ बर्तन में रख दें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए.
चाय के साथ बढ़ जाता है देसी स्वाद
गरमागरम गुड़ की गुगौरी का स्वाद वैसे तो अपने आप में खास है लेकिन बारिश के मौसम में शाम की चाय के साथ इसका मजा और बढ़ जाता है. गुड़ की मिठास, सौंफ और इलायची की खुशबू और बाहर की कुरकुरी परत इसे खास बनाती है. बघेलखंड की यह पारंपरिक डिश आज भी अपने देसी स्वाद के कारण लोगों को खूब पसंद आती है और सगे-संबंधियों के बीच इसे बड़े चाव से परोसा जाता है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…
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