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सल्फी अब केवल पारंपरिक नशे वाले पेय तक सीमित नहीं रहेगी. वैज्ञानिकों ने सल्फी के रस से गुड़ और साबूदाना जैसे उत्पाद बनाने की दिशा में अहम सफलता हासिल की है. इस शोध से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि आदिवासी परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों को नया बाजार भी मिलेगा.

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सल्फी के पेड़ पर चड़कर रस निकालते हुए ग्रामीण

बस्तर. सल्फी का पेड़ मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के आदिवासी इलाकों और जंगलों में पाया जाता है. इस पेड़ से निकलने वाला मीठा रस कई चीजे बनाने के काम आता है और इसके अनेक स्वास्थ्य फायदे में भी हैं. वहीं, अब तक इसका उपयोग मुख्य रूप से पेय पदार्थ के रूप में ही किया जाता था, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसमें मौजूद प्राकृतिक मिठास और पोषक तत्वों को देखते हुए इससे अन्य खाद्य उत्पाद तैयार करने पर काम शुरू किया.

शोधकर्ताओं के मुताबिक सल्फी के रस में पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक शर्करा पाई जाती है, जिससे गुड़ तैयार किया जा सकता है. वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत रस को एकत्र कर उसे गर्म किया जाता है और विशेष तापमान पर पकाने के बाद उससे गुड़ तैयार होता है. यह गुड़ स्वाद और गुणवत्ता में पारंपरिक गन्ने के गुड़ से अलग और अधिक पौष्टिक माना जा रहा है. सल्फी के पेड़ से निकलने वाला रस प्राकृतिक मिठास से भरपूर होता है. ताजा रस में ऊर्जा देने वाले तत्व, खनिज और प्राकृतिक शर्करा पाई जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे गर्मी के मौसम में ताजगी देने वाले पेय के रूप में पिया जाता है.

श्रीलंका में प्राचीन समय से बन रहा गुड़
भास्कर रिपोर्ट में वैज्ञानिक प्रोफेसर सुशील कुमार दत्ता के अनुसार सल्फी के रस से गुड़ बनाने की परंपरा बहुत पुरानी है. श्रीलंका में प्राचीन समय से ही इसके रस को उबालकर ऊंच गुणवत्ता वाला गुड़ तैयार किया जाता है. इस प्रक्रिया खजूर के रस से गुड़ बनाने जैसी है.

इसके अलावा सल्फी के रस से साबूदाना बनाने की तकनीक पर भी काम किया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि रस में मौजूद स्टार्च और अन्य तत्वों के कारण यह प्रक्रिया संभव हो सकी है. यदि यह प्रयोग बड़े स्तर पर सफल होता है, तो इससे बस्तर क्षेत्र के आदिवासी किसानों और ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा.

गुड़ बनाने की पूरी प्रक्रिया
प्रोफेसर सुशील कुमार दत्ता बताते हैं कि पेड़ की शाखा को काटकर उसके नीचे हांडी बांधी जाती है. रात भर हांडी में कार्बोहाइड्रेट युक्त मीठा रस टपकता रहता है. लेकिन सूर्योदय होने से पहले इस रस को उतारना जरूरी है. धूप पड़ते ही रस में फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. जिससे वे नशीला बनने लगता है. गुड़ बनाने के लिए ताजा और मीट रस तुरंत बड़े कड़ाही में डालकर लगातार उबाला जाता है और धीरे-धीरे ये पकर सुनहरा होने लगता है और स्वादिष्ट गुड़ में बन जाता है.

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Mohd Majid

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