उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का सत्तू अब देश और विदेश में धूम मचा रहा है. स्वाद और पोषण से भरपूर इस उत्पाद को सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना में शामिल किया गया है. इससे सत्तू को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है. बलिया में चने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. गांवों में महिलाएं पारंपरिक भट्ठी (गोसार) में चने भूनती हैं. इसके बाद इसे चक्की में पीसकर सत्तू तैयार किया जाता है. डॉक्टरों के अनुसार सत्तू प्रोटीन का एक बेहतरीन जरिया है. इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और प्यास सही से लगती है. लोग इसे लस्सी बनाकर या नमक-पानी के साथ गूंथकर अचार और चटनी के साथ चाव से खाते हैं. ओडीओपी में शामिल होने के बाद सत्तू की मांग काफी बढ़ गई है. इससे बलिया में रोजगार और व्यवसाय के नए रास्ते खुल रहे हैं. स्थानीय लोगों को आने वाले समय में इसका बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.