पटना. बेली रोड के पुनाइचक में स्थित काशी स्टाइल घी वाली चाट की खुशबू सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि एक बेटे के जज्बे की कहानी भी बयां करती है. अपने बुजुर्ग माता-पिता को ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराने का सपना लिए शेखर कुमार ने चाट की छोटी सी दुकान शुरू की. यह दुकान आज लोगों के दिलों में खास जगह बना रही है. हर प्लेट में काशी का स्वाद और मां-बाप के प्रति समर्पण झलकता है. यही वजह है कि उनकी चाट सिर्फ पेट नहीं, दिल भी भर देती है. शाम चार बजे से लेकर रात 10 बजे तक लोग चाट खाने के लिए जुटे रहते हैं. शेखर दावा करते हैं कि पटना में घी वाली चाट की शुरुआत उन्होंने ही की है.
बेहद खास है यह दुकान
पटना के टेक्नोलॉजी भवन के बगल में स्थित काशी चाट हब कई मायनों में बेहद खास दुकान है. यहां घी में बनी टिक्की से चाट बनाई जाती है. साथ ही घर की बनी गाढ़ी दही और गुड़-धनिया की चटनी चाट का स्वाद ही नहीं, बल्कि रंग-रूप भी निखार देती है. आखिरी में अनार दाना से गार्निश तो सबका दिल जीत लेती है.
यहां मिक्स चाट, समोसा चाट, टिक्की चाट, पापड़ी चाट, दही टिक्की चाट, दही पापड़ी चाट और दही समोसा चाट की कीमत मात्र 50 रुपये प्रति प्लेट है, जबकि स्पेशल जायका मिक्स 60 रुपये प्रति प्लेट है. इसके अलावा, शुद्ध घी की चाट 80 रुपये प्रति प्लेट है. सभी मसाले घर पर बनाए हुए होते हैं. पूरा परिवार दिनभर इसको तैयार करता है, जबकि दोनों भाई इस काशी चाट हब को संभालते हैं.
1975 से है यह बिजनेस
लोकल 18 से बातचीत में वे बताते हैं कि उनके परिवार का यह काम कोई नया नहीं, बल्कि साल 1975 से चली आ रही विरासत है. उनके पिता ने नेहरू पार्क के पास एक छोटे से मिठाई स्टॉल से इस सफर की शुरुआत की थी. उसी मेहनत की कमाई से उन्होंने बेटियों की शादी की और तीनों बेटों को अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाया.
लेकिन वक्त के साथ उम्र ने साथ छोड़ना शुरू किया और पिता का काम धीरे-धीरे रुक गया. ऐसे में बड़े भाई ने जिम्मेदारी संभाली और मिठाई का स्टॉल फिर से चलाने लगे. वहीं, वे बताते हैं कि हम दोनों भाई सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पिता की गिरती सेहत और बढ़ती उम्र को देखते हुए हमलोगों ने नौकरी को पीछे रखकर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया.
माता-पिता को ज्योतिर्लिंगों का करवाना है दर्शन
शेखर बताते हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना अपने बुजुर्ग माता-पिता को देश के सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराना है. इसी इच्छा के साथ वे सबसे पहले उन्हें काशी लेकर गए, जहां से यह सफर शुरू हुआ. इसके बाद कई और तीर्थस्थलों के दर्शन कराए, लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि सिर्फ छोटी मिठाई की दुकान से यह सपना पूरा करना मुश्किल है. यही सोचकर उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर चाट की दुकान खोलने का फैसला किया. दुकान का नाम भी पहले ज्योतिर्लिंग के नाम पर रखा गया.
वे बताते हैं कि मिठाई के स्टॉल से घर का खर्च चलता है, जबकि काशी चाट हब से होने वाली कमाई से वे अपने माता-पिता और पूरे परिवार को ज्योतिर्लिंग यात्रा करा रहे हैं. अब तक वे 6 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करा चुके हैं और बाकी की यात्रा भी जल्द पूरी करने का लक्ष्य है. अगला पड़ाव महाराष्ट्र होगा.
पूरे बिहार के लोग खा चुके हैं चाट
काशी चाट हब का लोकेशन ऐसा है कि सरकारी बाबू से आम लोग रोजाना स्वाद चखते हैं. इस एरिया के आस-पास न्यू सचिवालय, सूचना भवन, टेक्नोलॉजी भवन, विश्वेश्वरैया भवन सहित कई विभाग के ऑफिस हैं. यहां काम करवाने के लिए पूरे बिहार से लोग पहुंचते हैं. काम खत्म होने के बाद लोग चाट का स्वाद चखना नहीं भूलते. शेखर का कहना है कि 2022 में यह दुकान खुली और अब तक सभी जिलों के लोग चाट खा चुके हैं. कई लोग पैक करवा कर भी ले जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण स्वाद है.