हिंदू धर्म में पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पूर्णिमा का व्रत किया जाता है। यह व्रत मार्गशीर्ष, माघ और वैशाख माह की पूर्णिमा से आरंभ किया जाता है। वहीं पूर्णिमा व्रत का उद्यापन भाद्रपद व पौष माह की पूर्णिमा को किया जाता है। बत्तीसी पूर्णिमा व्रत को द्वात्रिंशी पूर्णिमा व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से समस्त प्रकार के सुख-सौभाग्य एवं पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति होती है। बता दें कि  बत्तीसी पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक विशेष और फलदायी अनुष्ठान है। यह व्रत लगातार 32 पूर्णिमा तिथियों तक किया जाता है। यह व्रत लगभग 2 वर्ष और 8 महीने तक चलता है, जिसमें कुल 32 पूर्णिमाएं आती हैं। तो चलिए अब जानते हैं कि सावन पूर्णिमा का व्रत कब किया जाएगा।

सावन पूर्णिमा व्रत 2026 डेट

पंचांग के अनुसार, सावन माह की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। बता दें कि जब पूर्णिमा दो दिनों की होती है तो पहले दिन पूर्णिमा का व्रत किया जाता है और दूसरे दिन स्नान-दान करके पुण्य प्राप्त किया जाता है। दरअसल जिस दिन पूर्ण रूप से चंद्रमा उदय होता है उसी दिन व्रतादि की पूर्णिमा मनाई जाती है। ऐसे में सावन पूर्णिमा व्रत 27 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। वहीं स्नान-दान की पूर्णिमा 28 अगस्त को मनाई जाएगी। 

सावन पूर्णिमा 2026 चंद्रोदय का समय

सावन पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्रोदय का समय शाम 6 बजकर 34 मिनट रहेगा। पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव अपने संपूर्ण रूप में प्रकाशित होते हैं। मान्यताओं के अनुसार, जब आकाशमंडल में चंद्रमा पूर्ण रूप से उदयमान रहते हैं तो इस समय चंद्र देव की उपासना करने से विशेष लाभ मिलता है।

पूर्णिमा व्रत का महत्व 

पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्रदेव के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। पूर्णिमा का व्रत करने से अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण, भविष्यपुराण और महाभारत आदि धार्मिक ग्रन्थों में पूर्णिमा व्रत का महत्व बताया गया है।

सावन पूर्णिमा व्रत का पारण कब किया जाएगा?

पूर्णिमा व्रत का पारण ज्यादातर लोग सायाह्नकाल में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद करते हैं। तो सावन पूर्णिमा व्रत का पारण भी चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद करें।  संभव हो तो पारण से पहले ब्राह्मण को अपनी क्षमतानुसार दान जरूर करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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